#पितरों_का_उद्धार_कैसे_करें
कबीर परमेश्वर जी कहा करते थे जीवित बाप से बठ्ठम-वट्ठा, मूवे गंग पहुँचईयाँ। जब आवै आसौज का महीना, कऊवा बाप बणईयाँ।।
Sant Rampal Ji Maharaj
"श्राद्ध और पितृ पूजा से जीव की गति नहीं होती"
प्रेत शिला पर जाय विराजे, फिर पितरों पिण्ड भराहीं।
बहुर श्राद्ध खान कूं आया, काग भये कलि माहीं।।
#भूतपूजेंगे_वो_भूतबनेंग��ं गीतामेंप्रमाणहै
सुरत-फुर्कानि नं. 25 आयत 58:
कुरान ज्ञान दाता अल्लाह (प्रभु) किसी और पूर्ण प्रभु की तरफ संकेत कर रहा है कि ऐ पैगम्बर, उस कबीर परमात्मा पर विश्वास रख जो तुझे जिंदा महात्मा के रूप में आकर मिला था।
#AlKabir_Islamic#SaintRampalJi
#भूतपूजेंगे_वो_भूतबनेंगे गीतामेंप्रमाणहै
श्राद्ध की शास्त्र अनुकूल विधि संत रामपाल जी महाराज के सभी सतलोक आश्रमों में हर दूसरे तीसरे महीने समागम में की जाती ही। वहां तो श्राद्ध हर दूसरे तीसरे महीने निकालते हैं। आप जी तो साल में एक ही बार निकालते हो।
#भूतपूजेंगे_वो_भूतबनेंगे गीतामेंप्रमाणहै
संत गरीबदास जी ने परमेश्वर कबीर जी से प्राप्त सूक्ष्मवेद में कहा है कि यदि सतगुरू (तत्वदर्शी सन्त) की शरण में जाकर दीक्षा लेते तो सर्व कर्मों के कष्ट कट जाते अर्थात् न प्रेत बनते, न गधा, ��� बैल बनते।
Sant Rampal Ji Maharaj
#भूतपूजेंगे_वो_भूतबनेंगे गीतामेंप्रमाणहै
श्राद्ध किसके लिए निकालते हैं। श्राद्ध उनके लिए करते हैं जो मृत्यु को प्राप्त हो गए यानी प्रेत पित्तर बन गए। गीता अध्याय 9 श्लोक 25 में इसके लिए मना किया गया है।
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कुरान शरीफ सुरत-फुर्कानि 25, आयत 59 भी यही संकेत करती है कि सृष्टि को बनाने वाले अल्लाह की जानकारी / खबर कोई बाख़बर / इल्मवाला ही बतायेगा। वो बाख़बर संत रामपाल जी महाराज जी हैं।
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#मांस_खाना_महापाप_है The commandment to eat meat doesn't originate from God.
The Holy Bible prohibits the consumption of meat. This is supported by the verses Genesis 1:29-30.
Meat Eaters will go to hell 🙏
#भूतपूजेंगे_वो_भूतबनेंगे गीतामेंप्रमाणहै मार्कण्डेय पुराण (गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित पृष्ठ 237) में श्राद्ध के विषय मे एक कथा का वर्णन मिलता है जिसमें रूची नामक एक ऋषि को अपने चा��� पूर्वज जो शास्त्र विरुद्ध साधना करके पितर बने हुए थे तथा कष्ट भोग रहे थे, दिखाई दिए।
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तत्वदर्शी संत (गीता अ-4 श्लोक-34) से दीक्षा लेकर शास्त्रविधि अनुसार सतभक्ति करने वाले परमधाम सतलोक को प्राप्त होते हैं जहाँ जन्म-मरण, दुख, कष्ट व रोग नहीं होता है
Sant Rampal Ji Maharaj
#भूतपूजेंगे_वो_भूतबनेंगे_गीतामेंप्रमाणहै
मृत्यु के पश्चात् की गई सर्व क्रियाऐं (मोक्ष) कराने के उद्देश्य से की जाती हैं। ज्ञानहीन गुरु अन्त में कौवा बनवाकर छोड़ते हैं। वह जीव तो प्रेत शिला पर प्रेत योनि भोग रहा होता है। पीछे से गुरू और कौवा मौज से भोजन कर रहे होते हैं।
#भूतपूजेंगे_वो_भूतबनेंगे गीतामेंप्रमाणहै!
श्राद्ध आदि निकालना शास्त्र विरुद्ध है, सत्य शास्त्रोक्त साधना करने वाले साधक की 101 पीढ़ी पार होती हैं। सत्य शास्त्��ानुसार साधना केवल तत्वदर्शी संत दे सकता है जिसकी शरण में जाने के लिए गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में कहा गया है।
#भूतपूजेंगे_वो_भूतबनेंगे गीतामेंप्रमाणहै
गीता अध्याय 2 श्लोक 53 में कहा है कि जिस समय आपकी बुद्धि भिन्न-भिन्न प्रकार के भ्रमित करने वाले ज्ञान से हटकर एक तत्व ज्ञान पर स्थिर हो जाए���ी, तब तू योगी बनेगा अर्थात् भक्त बनेगा।
Sant Rampal Ji Maharaj
#भूतपूजेंगे_वो_भूतबनेंगे गीतामेंप्रमाणहै
आज सभी पढ़े लिखे हैं सब यह समझ सकते हैं कि आदमी को तृप्त सिर्फ एक दिन खाना खिलाने से नहीं किया जा सकता। संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि-
जीवित बाप से लट्ठम-लठ्ठा,मूवे गंग पहुँचईयाँ |
जब आवै आसौज का महीना, कऊवा बाप बणईयाँ ||
#पितरों_का_उद्धार_कैसे_करें
गीता अध्याय 2 श्लोक 53 में कहा है कि जिस समय आपकी बुद्धि भिन्न-भि्न प्रकार के भ्रमित करने व���ले ज्ञान से हटकर एक तत्व ज्ञान पर स्थिर हो जाएगी, तब तू योगी बनेगा अर्थात्भक्त बनेगा।
Sant Rampal Ji Maharaj
#पितरों_का_उद्धार_कैसे_करें
गीता अध्याय 9 श्लोक 25 में कहा है कि जो पित्तरों की पूजा करते हैं, वे पित्तर योनि प्रा���्त करेंगे, मोक्ष नहीं होगा। जो भूत पूजते हैं, वे भूत बनेंगे। श्राद्ध करना पित्तर पूजा तथा भूत पूजा है।
Sant Rampal Ji Maharaj
गरीब, जीव हिंसा जो करते हैं, या आगे क्या पाप। कंटक जुनी जिहान में, सिंह भेड़िया और सांप।।
जो जीव हिंसा करते हैं उससे बड़ा पाप नहीं है। जीव हत्या करने वाले वे करोड़ो जन्म शेर, भेड़िया और साँप के पाते हैं।
#मांस_खाना_महा���ाप_है
#MeatEatersWillGoToHell
#रहम_करो_मूक_जीवों_पर
श्राद्ध किसके लिए निकालते हैं। श्राद्ध उनके लिए करते हैं जो मृत्यु को प्राप्त हो गए यानी प्रेत पित्तर बन गए। गीता अध्या��� 9 श्लोक 25 में इसके लिए मना किया ��या है।
विष्णु पुराण के अंदर लिखा हुआ है, व्यास जी कह रहे
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