कल प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मामले का संज्ञान लिया और आज छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों के ‘चिता आंदोलन’ पर दमनकारी पुलिस कार्रवाई हो गई।
जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर के आमरण अनशन का 14वाँ दिन था। उन्हें भी, सोनम वांगचुक जी की तरह, पुलिस उठाकर भाग गई।
अहंकार के नशे में चूर यह सत्ता संवाद नहीं; दमन चुनती है।
#KenBetwa #Satyagraha
@authoramish Rereading Meluha series, reminded me that we're still awaiting for the final installment of Ram chandra series.
Will there be 5th book in the series? Or is the series complete according to you?
Tasalli:
The black lane driver picks me up from San Jose baggage claim. Nice guy. Not a great driver. You can tell he’s uncomfortable behind a the wheel. Or at least new behind it. He’s Indian. We start talking. I try and speak to people I find abroad in Hindi, it’s like a little quick cure for homesickness for both of us. We miss the turn for my hotel, he now has to readjust. We’ve got three more minutes. We talk about America, I say “hard work here”, he laughs and nods knowingly. He says “tasalli nahin hai”, you can never fully relax, I feel bad. Then he tells me he is a PhD, an IIT Mumbai graduate and a scientist who was laid off a year ago. This explains the driving. He does this to make ends meet. It confirms what I usually assume. If there two people including me in the room, I’m the dumbass. I ask him if he ever thinks of going home, he smiles and says “every day”. There’s a sadness to the smile. Like he knows that’s all it will ever be. I imagine he’s knee deep in the system, kids in school, mortgage, insurance….hard to give that all up for….tasalli. I get it. I get out of the car. We shake hands, I say “good luck with everything”. I walk away. The next morning, he picks me up to drop me to the airport. Asks me how the show was, he says he saw Delhi Belhi and didn’t connect the dots when I was in the back of the car. I laugh, so does he. We’re friends now, who will never see each other ever again. We’re at drop off now. I shake his hand and say “good luck with everything”. All I can think is - I hope you get to use all of your amazing brain soon, I know first hand it’s heartbreaking to feel like you are more than what you’re doing, and I hope you get to relax soon. Tasalli.
My flight is boarding. Gotta go.
आई हैवन्ट डाइड येट!!
लन्दन, पार्लियामेंट स्क्वेयर पर टहलते हुए अचानक गांधी दिखे। आश्चर्य हुआ।ब्रिटिश क्राउन का सबसे बड़ा ज्वेल- हिंदुस्तान!! जिसने अंग्रेजों से छीना,
उस शख्स की तांबे की सजीव मूर्ति,अंग्रेजो ने अपनी संसद के सामने.. ऐसी आइकॉनिक लोकेशन पर लगाई है?
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मूर्ति की जानकारी न थी, कहीं पढ़ा न था। खोजा, तो पता चला, अभी 2015 में ही लगी। PM डेविड कैमरॉन ने, गांधी के अफ्रीका से भारत लौटने के शताब्दी वर्ष पर, अनावरण किया।
क्या ही विडंबना है, कि जब गांधी को नकारने का बवंडर भारत मे उठा, दुनिया में उनकी स्वीकृति बढ़ती जा रही है।
ये गांधी भारत का आइकन नही है। ये तो उनका निजी दैवत्व है।ईसा की आराधना, फिलिस्तीन की पूजा नही होती। फिलिस्तीन ईसा का, तो भारत गांधी का, रंगमंच भर है।
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रामचन्द्र गुहा ने 2013 में गांधी की जीवनी लिखी। प्रचार के लिए अमेरिका गये। कमरा साफ करने आये होटल कर्मचारी ने किताब पर तस्वीर देखी, पूछा- यह युवा गांधी हैं न??
वकील की पोशाक वाले गांधी को पहचाने जाने से विस्मित गुहा ने हामी भरी। कर्मचारी बोला- मेरे देश मे गांधी का बड़ा सम्मान है।
तो पूछने की बारी गुहा की थी- तुम्हारा देश??
-"डोमिनिकन रिपब्लिक"
गांधी ने डोमिनिक रिपब्लिक का नाम न सुना हो। लेकिन आज, डोमिनिकन रिपब्लिक को, गांधी का पता है।
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क्योकि गांधी का संदेश सत्य, सहिष्णुता, सत्याग्रह और मनुष्यता है। इनमे बुध्द, और ईसा की सततता है। ये सन्देश, किसी पॉलिटिशियन की यादगार स्पीच नही। जीवन है, जीवन शैली है।
उस दुनिया ने दो महायुद्ध देखे। पाया, कि जब भाषा,धर्म,रंग,रेस की उच्चता का झगड़ा, मानवता को विनाश के मुहाने तक ले जाये। तो थके मन को गांधी, मनुष्यता की तरफ लौटा लाते हैं।
अगर अमेरिका और तमाम यूरोप, गांधी को मानवता की रिसेंट मेमरी का मसीहा समझता है। तो भारत भूमि की इसमे हिस्सेदारी नहीं।
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गांधी की महानता, उनसे अभय में है। महान वही, जिसकी विशालताआतंकित न करे। जिसकी आप, आलोचना कर सकें।
तौल सकें। गांधी की अहिंसा को स्त्रैण बताया गया। निर्णयों पर सवाल हुए, यौन व्यवहार पर टिप्पणियां हुईं। गांधी पर तो हर किस्म का विमर्श खुला है।
पर चीन में माओ, पाकिस्तान में जिन्ना, वियतनाम में होची की आलोचना का विमर्श खुला नही। लिंकन और फ्रैंकलिन पर सवाल कर नही सकते।गांधी, नकारने के लिए उपलब्ध हैं।
उन्हें मानिये, मत मानिये। पर आप देखते है कि गांधी से दूर जाता हर मार्ग भयावह है। वह नफरत, विनाश की तरफ जाता है। कौतुक में आप कुछ दूर जाते हैं, औऱ खून का गुबार देख लौट आते हैं।
हाँ। आप मनुष्य है, तो आपको गांधी की ओर ही लौटना है।
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क्योकि गांधी आपकी ताकत है। गांधी, भीरुओ की ताकत है। आम, डरपोक, शांति चाहने वाला व्यक्ति, विरोध से डरता है, क्रांति से डरता है, हथियार उठाकर बढ़ने से डरता है।
जो कानून, पुलिस, जेल, सरकार और मौत से डरता है। गांधी उसे वहीं से उठाते हैं।
अहिंसक रहकर, निडरता से दिल की कहने का आग्रह करते हैं। निडरता, सत्य खुलने से,कर्तव्य जागने से आती है।औरों का दर्द महसूस करने, उसे दूर करने की जिम्मेदारी से आती है।
गांधी आपकी करुणा को जगाते हैँ। चरखा कातने को कहते है, कपड़ो की होली जलवाते हैं, नमक बनवाते हैं। मामूली कामों को प्रतिरोध का प्रतीक, और क्रांति का हथियार बना, हाथ मे थमा देते हैं।
आप जो बंदूक उठाने, हत्या करने से डरते हैं, बम नही चलाना चाहते, तकली चलाते हैं। आपके जैसे लाखों लोग चलाते हैं।अब चरखा सबका रंग है, मजहब है, भाषा है। यह एकीकृत प्रतिरोध है।
ये काम तो कोई गुनाह नही। इसके लिए आप जेल भी जाएं, तो भीतर अपराध बोध नही, गर्व होगा। और जब जेल जाना गर्व की बात बन जाये..
तो उस कौम को भला कब तक दबाया जा सकता है। यही बूंद बूंद प्रतिरोध का सागर,उस ब्साम्राज्य को बहा ले गया है।
जिसका सूर्य अस्त नही होता था।
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उसी पार्लियामेंट स्क्वेयर में चर्चिल की भी मूर्ति है। जिसने जमकर युद्ध लड़ा, साम्राज्य बचाया। वह चर्चिल, जिसने बंगाल का सारा चावल ब्रिटेन मंगाकर, 4 लाख लोगों को भूखा मार दिया।
जब इन मौतों की सूचना आई, तो फाइल नोटिंग पर पूछा- वाय हैवन्ट गांधी डाइड येट ???
लेकिन गांधी मरा नही। वह फैल गया, दुनिया के हर कोने में। आज ब्रिटेन सिकुड़ चुका है, और जितने देशो में गांधी की मूर्तियां लग चुकी, उस साम्राज्य में सूरज अस्त नही होता।
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आज भारत से उन्हें हटाने की कोशिशें है। लेकिन गांधी जरा भी नहीं हिलता। वह अपने कातिलों से निगाहें मिला रहा है,
ठठा रहा है, हिंदुस्तान में।
मैं देखता हूँ, वह लन्दन की संसद को भी देखकर मुस्कुरा रहा है। अगर आप सहसा सुन सकें, तो धीमी, गम्भीर सी आवाज आती है..
नो। आई हैवन्ट डाइड येट!!!!
When I was still a Teenager, I thought maybe my generation will be better at handling religion, racism and gender related discussion and opinions.
I'll be 30 next year, turns out it'll take another generation to be better.
Hopefully sooner.
Tbh, the college me never knew that the pirate in me would pay such amounts getting an OTT subscription to watch stuff like the aboriginal nice guy playing adulthood; but here we are...
There is no stand, no right side, no oppressed party here. It's an all out war of Mights over a piece of land they could not peacefully share and it'll lead only to destruction, death and despair.
#IsraelPalestineWar