@flipkartsupport
.... Customer support kept repeating the same thing without any solution. She kept on accusing me of providing wrong address… (Call record can be given if you provide me an email)
.... Customer support kept repeating the same thing without any solution. She kept on accusing me of providing wrong address… (Call record can be given if you provide me an email)
@flipkartsupport
@flipkartsupport
Extremely disappointed with Flipkart.
Pick up person reached the delivery address instead of chosen address for return.
Customer support was no help. One customer executive was extremely rude and used derogatory language for me (I can provide the call record)...
@Hindu_rashtra_h @garrywalia_ सच्चा पत्रकार सच बोलता है, राष्ट्र हित की आड़ में सरकारी प्रोपेगंडा बोलना उसका काम नहीं !
@saurabhtop@TheLallantop
ऑपरेशन सिंदूर पर आपकी कवरेज ने बहुत निराश किया।
हमारे मोदी जी से लड़ेगा पाकिस्तान?
अबे साले!!!
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युद्ध के बीच पाकिस्तान को आईएमएफ से 1.3 बिलयन डॉलर कर्ज मिला है। अब आज 85.87 रुपया 1 डॉलर का चल रहा है।
इस हिसाब से 1 .3 बिलियन डॉलर होता है 11163 करोड़ रुपया ..
ग्यारह हजार एक सौ तिरसठ करोड़!!!
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इधर पीएम केयर्स फंड में प्राप्त राशि का विवरण इस प्रकार है
- 2019-20: 3076.62 करोड़ रुपये
- 2020-21: 10990.17 करोड़ रुपये
- 2021-22: 9131.94 करोड़ रुपये
- 2022-23: 6723.06 करोड़ रुपये
कैल्कुलेटर उठाओ पाकिस्तानियो। जोड़ो।
30 हजार करोड़ से ऊपर होता है।
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जितना तुम्हारा पीएम कटोरा लेकर आईएमएफ से कर्जा मांगता है, उसका तिगुना तो हमारा पीएम, पर्सनल केयर फंड में चन्दा ले लेता है,
और हिसाब भी न देता।।
मोदी जी से लड़ेगा तू
अबे साले!!
😂😂
क्योकि मैं संघी नही हूँ।
1965 की लड़ाई का अंतिम दौर था। भारत ने हाजी पीर जीता जरूर था, मगर पाकिस्तान को कश्मीर के एक बड़े हिस्से में, काफी बढ़त हासिल थी।
"यदि नया मोर्चा न खोला गया, तो हार का खतरा है"- सेना के इस एसेसमेंट को मानते हुए, शास्त्री जी ने लाहौर पर हमले की इजाजत दी।
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कश्मीर में एक युद्ध विराम रेखा है।
इसका मतलब, युद्ध तो जारी है, लेकिन अभी, क्षणिक रूप से थमा हुआ है। शिमला समझौते में इसे LOC मान लिया गया।
LOC इसके आगे का स्टेटस है। याने जो जहां, वो वहां .. युद्ध नही लड़ रहे, पर एरिया अभी कॉंटेस्टेड है। कभी भविष्य में लड़ के, या समझौते में देख लेंगे।
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तो 1965 में कश्मीर की लड़ाई, LOC पर चल रही थी। तो एक तरह से 1948 में हुए युद्ध विराम में ब्रेक था। टेक्निकली यह युद्ध नही महज " LoC पर स्किर्मिश" था।
इसके मुकाबले लाहौर, इंटरनेशनल बार्डर के पार था। इस लाइन के पार जाना, आधिकारिक युद्ध था। यह बड़ा निर्णय था। शास्त्री ने यह निर्णय लिया।
जो मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। जहाँ सारे संसाधन पाकिस्तान ने कश्मीर में झोंककर एज ले ली थी, लाहौर में वह बिन तैयारी मात खा गया। युद्ध का पासा पलट गया।
1965 में सँघर्ष की शुरुआत करने वाला पाकिस्तान, अब युद्ध विराम की चिरौरी कर रहा था।
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ताशकंद में समझौता हुआ। दोनों सेना युद्ध पूर्व स्थिति में लौटेंगी। याने भारत लाहौर छोड़ेगा, और पाकिस्तान भी कश्मीर में अपने जीते इलाके छोड़ेगा।
युद्ध पूर्व स्थिति में जाने का मतलब हाजी पीर भी छोड़ना होता। आरएसएस जनसंघ को यह फैसला पसन्द नही आया।
विरोध का निर्णय हुआ। विदेश गए पीएम के घर के बाहर गालीबाजो और नारेबाजों का झुंड लगा। काले झंडे लेकर पीएम को गरियाया गया। उनके घरवाले सुनते रहे।
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इतना उद्विग्न हुए कि ताशकंद शास्त्री का घर पर फोन आने पर, उनकी पत्नी ने बात करने से इनकार कर दिया। अफसर शास्त्री को बता रहे थे कि लौटने पर उनका स्वागत काले झंडों से होगा। विपक्ष, देशव्यापी प्रदर्शन की तैयारी में है।
जाहिर है, शास्त्री को गद्दार बताकर राजनीतिक लाभ लेने की पूरी तैयारी थी।
जो धरी की धरी रह गयी। लगातार तनाव, पुरानी हृदय की समस्या, और उच्च रक्तचाप से शास्त्री, उस रात हृदयाघात के शिकार हो गए।
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पाकिस्तान पर, भारत का मौजूदा एक्शन युद्ध जैसी स्थिति निर्मित करता है।
तब इस समय मैं, और अमूमन भारतीय जनता पार्टी की सरकार की नीति रीति के विरुद्ध लिखने बोलने वाले कई मित्र, सरकार और सेना के साथ है। समर्थन कर रहे है,तो तंज है कि तुमने पाला बदल लिया?
जवाब है-कतई नहीं।
हम सरकार के साथ इसलिए ही हैं, क्योकि हम संघी नही हैं। संघी होते, तब तो पाकिस्तान से लड़ते हुए अपने प्रधानमंत्री से लड़ते।
यही तो उनकी तासीर है जनाब।
हमारी नही।
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युद्ध कुछ दिन का है।
शायद कुछ महीने भी खिंच जाए, उसका अंत सुनिश्चित है। लेकिन वैचारिक लड़ाई, बहुत लम्बी है। वह तो आपका पसंदीदा दल, सत्ता में हो, या नही.. ताजिंदगी चलती रहेगी।
वैचारिक स्टैंड से हटने पर आपकी पार्टीगत पसंद भी बदल सकती है। तो इस जद्दोजहद को तब विराम दे देना चाहिए, जब राष्ट्र युद्धरत हो, संकट में हो।
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यह वक्त शांति के कबूतर जैसा दिखने, अपने मतभेद दिखाने, या सोशल मीडिया पर बहस जीत जाने का नही।
यह समय एक होकर खड़े होने का है । युद्ध निपटने दो, उसके बाद लड़ने के मसले बहुत हैं। हममें इतनी समझदारी है, मैच्योरिटी है हममें।
पता है क्यो..
क्योकि हम संघी नही है।
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With @Ashok_Kashmir
❤️
@anarkaliofara बिल्कुल सही कहा आपने, युद्ध एंज्वॉय करने वालों को ये पता नहीं होता कि ज्यादातर युद्ध सरकार अपनी छवि चमकाने या सरकार बचाने के लिए जनता पर थोपा जाता है।
एक बात और, सरकार के नाम संपत्ति करने से कोई देश सेवा नहीं होती।
वैसे भी किसी भी सरकार के पास का एक एक पैसा देश की जनता का ही है
@Ravisha23624235@grok@JaikyYadav16@dhruv_rathee विदेशी लड़की से शादी सुभाष चंद्र बोस ने भी की थी। अब नाथूपूजक अंधभक्त शादी के आधार पर, नेताजी को भी देशद्रोही बोल सकते है।
उन नेताजी को महात्मा गांधी ने सबसे बड़ा देशभक्त कहा था।
नोट: अंधभक्तों के जान के लिए,
"महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता की उपाधि नेताजी सुभाष ने ही दी थी"!
हाय! ध्रुव राठी एक यूट्यूबर हैं जो सरकार, खासकर BJP, की आलोचना करते हैं, जिससे कुछ लोग उन्हें "एंटी-नेशनल" कहते हैं। ये शब्द विवादास्पद और व्यक्तिपरक है, जिसका कोई स्पष्ट कानूनी मतलब नहीं। उनके वीडियो सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर शिक्षित करने के लिए हैं; कुछ उन्हें लोकतांत्रिक आवाज मानते हैं, तो कुछ उनकी आलोचना को देशद्रोह कहते हैं। सबूत उनके काम को लोकतंत्र का हिस्सा दिखाते हैं, पर राय बंटी हुई है, जो भारत के ध्रुवीकृत माहौल को दर्शाता है।
@bhagatram2020@grok ये @grok है न भक्तों की बैंड बजाकर रखा है!
भक्तों के सवालों का जवाब उनके मूंह पर कीचड़ की तरह फेंक रहा है!
😁😁
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी वाले सोचे रहे होंगे,
"करे तो करे क्या, जाएं तो जाएं कहां"
आपको Grok का कौनसा रिप्लाई सबसे ज़बरदस्त लगा??
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