Chandrayaan-3 Mission:
The mission is on schedule.
Systems are undergoing regular checks.
Smooth sailing is continuing.
The Mission Operations Complex (MOX) is buzzed with energy & excitement!
The live telecast of the landing operations at MOX/ISTRAC begins at 17:20 Hrs. IST on August 23, 2023.
Here are the images of the moon captured by the Lander Position Detection Camera (LPDC) from an altitude of about 70 km, on August 19, 2023.
LPDC images assist the Lander Module in determining its position (latitude and longitude) by matching them against an onboard moon reference map.
BRICS Business Forum gave me an opportunity to highlight India’s growth trajectory and the steps taken to boost ‘Ease of Doing Business’ and public service delivery. Also emphasised on India’s strides in digital payments, infrastructure creation, the world of StartUps and more.
Chandrayaan-3 Mission:
🇮🇳Chandrayaan-3 is set to land on the moon 🌖on August 23, 2023, around 18:04 Hrs. IST.
Thanks for the wishes and positivity!
Let’s continue experiencing the journey together
as the action unfolds LIVE at:
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from 17:27 Hrs. IST on Aug 23, 2023.
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पंचमुखी हनुमान की पूजा का महत्त्व..🔆
लंका युद्ध के दौरान अहिरावण अपनी मायावी शक्ति का प्रयोग करते हुए भगवान श्री राम और लक्ष्मण को मूर्छित कर पाताल लोक लेकर पहुंच गया था.
अहिरावण को देवी का वरदान था कि जब तक कोई पाँच दिशाओं में रखे पांचों दीपक को एक साथ नहीं बुझाएगा, तब तक उसका वध असंभव है.
तब हनुमान जी ने पांच दिशाओं में मुख किए पंचमुखी हनुमान का अवतार लिया और पांचों दीपकों को एक साथ बुझाकर अहिरावण का वध किया. तभी से पंचमुखी हनुमान जी के अलोकिक स्वरूप की पूजा होती है.
ये पाँच इस प्रकार है :-
1. वानर मुख- पूर्व दिशा में. यह दुश्मनों पर विजय प्रदान करता है.
2. गरुड़ मुख- पश्चिम दिशा में. यह जीवन की रुकावटों और परेशानियों का नाश करता है.
3. वराह मुख- उत्तर दिशा में जो लंबी उम्र, प्रसिद्धि और शक्ति का दायक है.
4. नृसिंह मुख- दक्षिण दिशा में, जो मन से डर और तनाव को दूर करता है.
5. अश्व मुख- आकाश की दिशा में जो समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति करता है.
जय श्री राम, जय श्री हनुमान, जय सूर्य देव 🙏
हनुमान जी के 5 मुख्य नामों के पीछे की कथाएं....
1. पवनपुत्र/ वायुपुत्र -
हनुमान जी की माता का नाम अंजलि था जो अपने पिछले जन्म में अंजना नाम की एक देव कन्या थी। अंजना को एक ऋषि से श्राप मिला था कि वह जिस किसी से भी प्रेम करेगी उसका मुख बंदर सामान हो जायेगा। अगले जन्म में माता अंजना ने पृथ्वी पर अंजलि के रूप में जन्म लिया और केसरी नामक एक वानर से विवाह रचाया।
माता अंजलि भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थी जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनकी कोख से जन्म लेने का वरदान दिया। जब राजा दशरथ पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कर रहे थे तब ऋषि ने दशरथ की तीनो पत्नियों को खीर खाने को दी। माता कौशल्या की खीर की प्याली में अचानक एक चील आई और थोड़ी सी खीर अपने पंजे में लेकर उड़ गयी।
माता अंजलि एक जगह पर भगवान शिव की आराधना कर रही थी तब शिवजी ने वायुदेव को चील के पंजे से वह खीर माता अंजलि के हाथों में गिराने का आदेश दिया। वायुदेव ने ठीक वैसा ही किया और माता अंजलि ने वह खीर भगवान शिव का आशीर्वाद समझकर खा ली जिसके बाद उन्होंने मारुति को जन्म दिया। इसलिये उन्हें पवनपुत्र या वायुपुत्र के नाम से भी जाना जाता है।
2. हनुमान नाम कैसे पड़ा -
जैसा की हमने आपको बताया कि हनुमान जी का असली नाम मारुति था तो अब सोचने वाली बात यह है कि उनका नाम हनुमान कैसे पड़ा? दरअसल हनुमान संस्कृत भाषा का शब्द है जो दो शब्दों के मेल से बना है: हनु अर्थात जबड़ा व मान अर्थात विकृत। इस तरह हनुमान का अर्थ हुआ विकृत या मुड़े हुए जबड़े वाला। किन्तु क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी का जबड़ा जन्म के समय एक दम सही था तो उनका जबड़ा टेढ़ा कैसे हुआ?
जब भगवान हनुमान छोटे थे तब उन्होंने आकाश में सूर्य को देखा जिसे उन्होंने एक फल समझा। इसी कारण वे आकाश में उड़े और सूर्य को निगल लिया जिस कारण पूरे विश्व में अंधकार छा गया। इससे क्रोधित होकर इंद्र देव ने अपने वज्र से हनुमान जी पर प्रहार किया जो उनके जबड़े पर लगा और वे मुर्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़े। तब से उनका जबड़ा थोड़ा टेढ़ा हो गया और उनका नाम हनुमान पड़ा।
3. बजरंगबली का अर्थ -
संस्कृत भाषा में बजरंग का अर्थ कुमकुम या सिंदूर से होता है। इसके पीछे भी एक रोचक कथा है। आप सभी को यह भलीभांति ज्ञात है कि भगवान राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान थे और हनुमान जी को भी प्रभु राम से अत्यधिक लगाव था (Bajrangbali)।
एक दिन हनुमान जी को माता सीता के सिंदूर लगाने की बात पता चली तो वे उत्सुकता वश इसके पीछे का कारण पूछ बैठे। तो सीता माता ने उन्हें बताया कि वह सिंदूर श्री राम के लिए लगाती है जिससे वे स्वस्थ रहते है और दीर्घायु बनते है। इतना सुनते ही हनुमान जी ने सोचा कि यदि माता सीता के केवल इतना सा सिंदूर लगाने से इतना प्रभाव पड़ सकता है तो मुझसे क्यों नही।
इसके बाद उन्होंने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर का लेप लगा लिया तब से उनका नाम बजरंग बलि पड़ गया। इसलिये आज भी आपको हनुमान जी के मंदिर में सिंदूर चढ़ाने की परंपरा मिलेगी।
4. संकट मोचन नाम क्या है -
चाहे हनुमान चालीसा हो या रामायण, सभी में हनुमान जी को संकट मोचन (Sankatmochan) कहा गया है। अर्थात हनुमान जी ऐसे महापुरुष थे जो अपने चाहने वालो के संकट मिटाते थे। चाहे वह माता सीता को ढूँढना हो या लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लाना। जब-जब भगवान राम पर कोई विपदा आई तब-तब उन्होंने अपने परम भक्त हनुमान को याद किया और हनुमान ने उनका हर संकट दूर भी किया।
हनुमान की निष्ठाभाव से की गयी भक्ति से प्रसन्न होकर माता सीता ने उन्हें अजय अमर होने का आशीर्वाद दिया था। अर्थात हनुमान जी ही भगवान के रूप में ऐसे जीवित मनुष्य है जिन्होंने अमर होने का वरदान प्राप्त किया। लोगों का आज भी यह प्रबल रूप से मानना हैं कि भगवान हनुमान आज भी किसी ना किसी रूप में इस पृथ्वी पर है और उन्हें अगर सच्चे मन से याद किया जाये तो वे अपने भक्तों के हर संकट हरते है।
5. हनुमान जी का पंचमुखी अवतार -
पंचमुखी भी एक संस्कृत भाषा का शब्द है जो दो शब्दों के जोड़ने से बना हैं। इसमें पंच का अर्थ संख्या पांच से है व मुखी का अर्थ मुहं से है अर्थात पांच मुहं वाले हनुमान।
एक बार रावण के भाई अहिरावण या महिरावण जो अपनी मायावी शक्तिओं के लिए प्रसिद्ध था, उसने भगवान राम व लक्ष्मण का अपहरण कर लिया था और उन्हें पाताल लोक ले गया था। वह वहां अपनी देवी महामाया के सामने दोनों की बलि चढ़ाने वाला था किन्तु हनुमान वहां उन्हें बचाने आ गए।
वहां उन्होंने देखा कि पांच दिशाओं में पांच दीपक जल रहे हैं जिन्हें एक साथ बुझाने पर ही अहिरावण का वध संभव था। इसलिये हनुमान ने पांच मुख वाले हनुमान का रूप धरा जिसमे उन्होंने वराह, गरुड़, नरसिंह व हयग्रीव देवताओं के मुख धरे और अहिरावण का वध
क्या आप जानते हैं कि कौन कौन सी होती है चौसठ कलायें...?
64 कलाओं में महारत थे श्रीकृष्ण
श्री कृष्ण अपनी शिक्षा ग्रहण करने आवंतिपुर (उज्जैन) गुरु सांदीपनि के आश्रम में गए थे जहाँ वो मात्र 64 दिन रह थे। वहां पर उन्होंने ने मात्र 64 दिनों में ही अपने गुरु से 64 कलाओं की शिक्षा हासिल कर ली थी हालांकि श्री कृष्ण भगवान के अवतार थे और यह कलाएं उन को पहले से ही आती थी। पर उनका जन्म एक साधारण मनुष्य के रूप में हुआ था इसलिए उन्होंने गुरु के पास जाकर यह पुनः सीखी
निम्न 64 कलाओं में पारंगत थे श्रीकृष्ण
1- नृत्य – नाचना
2- वाद्य- तरह-तरह के बाजे बजाना
3- गायन विद्या – गायकी।
4- नाट्य – तरह-तरह के हाव-भाव व अभिनय
5- इंद्रजाल- जादूगरी
6- नाटक आख्यायिका आदि की रचना करना
7- सुगंधित चीजें- इत्र, तेल आदि बनाना
8- फूलों के आभूषणों से श्रृंगार करना
9- बेताल आदि को वश में रखने की विद्या
10- बच्चों के खेल
11- विजय प्राप्त कराने वाली विद्या
12- मन्त्रविद्या
13- शकुन-अपशकुन जानना, प्रश्नों उत्तर में शुभाशुभ बतलाना
14- रत्नों को अलग-अलग प्रकार के आकारों में काटना
15- कई प्रकार के मातृका यन्त्र बनाना
16- सांकेतिक भाषा बनाना
17- जल को बांधना।
18- बेल-बूटे बनाना
19- चावल और फूलों से पूजा के उपहार की रचना करना। (देव पूजन या अन्य शुभ मौकों पर कई रंगों से रंगे चावल, जौ आदि चीजों और फूलों को तरह-तरह से सजाना)
20- फूलों की सेज बनाना।
21- तोता-मैना आदि की बोलियां बोलना – इस कला के जरिए तोता-मैना की तरह बोलना या उनको बोल सिखाए जाते हैं।
22- वृक्षों की चिकित्सा
23- भेड़, मुर्गा, बटेर आदि को लड़ाने की रीति
24- उच्चाटन की विधि
25- घर आदि बनाने की कारीगरी
26- गलीचे, दरी आदि बनाना
27- बढ़ई की कारीगरी
28- पट्टी, बेंत, बाण आदि बनाना यानी आसन, कुर्सी, पलंग आदि को बेंत आदि चीजों से बनाना।
29- तरह-तरह खाने की चीजें बनाना यानी कई तरह सब्जी, रस, मीठे पकवान, कड़ी आदि बनाने की कला।
30- हाथ की फूर्ती के काम
31- चाहे जैसा वेष धारण कर लेना
32- तरह-तरह पीने के पदार्थ बनाना
33- द्यू्त क्रीड़ा
34- समस्त छन्दों का ज्ञान
35- वस्त्रों को छिपाने या बदलने की विद्या
36- दूर के मनुष्य या वस्तुओं का आकर्षण
37- कपड़े और गहने बनाना
38- हार-माला आदि बनाना
39- विचित्र सिद्धियां दिखलाना यानी ऐसे मंत्रों का प्रयोग या फिर जड़ी-बुटियों को मिलाकर ऐसी चीजें या औषधि बनाना जिससे शत्रु कमजोर हो या नुकसान उठाए।
40-कान और चोटी के फूलों के गहने बनाना – स्त्रियों की चोटी पर सजाने के लिए गहनों का रूप देकर फूलों को गूंथना।
41- कठपुतली बनाना, नाचना
42- प्रतिमा आदि बनाना
43- पहेलियां बूझना
44- सूई का काम यानी कपड़ों की सिलाई, रफू, कसीदाकारी व मोजे, बनियान या कच्छे बुनना।
45 – बालों की सफाई का कौशल
46- मुट्ठी की चीज या मनकी बात बता देना
47- कई देशों की भाषा का ज्ञान
48 – मलेच्छ-काव्यों का समझ लेना – ऐसे संकेतों को लिखने व समझने की कला जो उसे जानने वाला ही समझ सके।
49 – सोने, चांदी आदि धातु तथा हीरे-पन्ने आदि रत्नों की परीक्षा
50 – सोना-चांदी आदि बना लेना
51 – मणियों के रंग को पहचानना
52- खानों की पहचान
53- चित्रकारी
54- दांत, वस्त्र और अंगों को रंगना
55- शय्या-रचना
56- मणियों की फर्श बनाना यानी घर के फर्श के कुछ हिस्से में मोती, रत्नों से जड़ना।
57- कूटनीति
58- ग्रंथों को पढ़ाने की चातुराई
59- नई-नई बातें निकालना
60- समस्यापूर्ति करना
61- समस्त कोशों का ज्ञान
62- मन में कटक रचना करना यानी किसी श्लोक आदि में छूटे पद या चरण को मन से पूरा करना।
63-छल से काम निकालना
64- कानों के पत्तों की रचना करना यानी शंख, हाथीदांत सहित कई तरह के कान के गहने तैयार करना..!!
जय श्री कृष्ण 🚩🙏💐❣️
#सनातन_धर्म_ही_सर्वश्रेष्ठ_है
आज एक अजीब सी चीज देखने को मिली,इस घडी को देखिये अनोखा संग्रह है इसमें विद्या -बुद्धि दोनों का अद्भुत मेल
1:00 बजने के स्थान पर #ब्रह्म लिखा है,अर्थात ब्रह्म एक ही है..एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति।
2:00 पर #अश्विन और लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि अश्विनी कुमार दो हैं।
3:00 पर #त्रिगुणः लिखा हुआ है अर्थात गुण तीन प्रकार के हैं- सतोगुण रजोगुण तमोगुण।
4:00 पर #चतुर्वेद लिखा हुआ है अर्थात वेद चार प्रकार के होते हैं- ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद और अथर्ववेद।
5:00 पर #पंचप्राणा लिखा हुआ है अर्थात प्राण पांच प्रकार के होते हैं
6:00 के स्थान पर #षड्र्स लिखा हुआ है अर्थात रस 6 प्रकार के होते हैं
7:00 पर #सप्तर्षि लिखा हुआ है अर्थात सप्तऋषि 7 हैं ।
8:00 पर #अष्ट_सिद्धियां लिखा हुआ है अर्थात सिद्धियां आठ प्रकार की होती है
9:00 के स्थान पर #नव_द्रव्यणि अभियान लिखा हुआ है अर्थात 9 प्रकार की निधियां होती हैं।
10:00 के स्थान पर #दश_दिशः लिखा हुआ है अर्थात दिशाएं 10 होती है
11:00 के स्थान पर #रुद्रा लिखा हुआ है अर्थात रुद्र 11 प्रकार के हुए हैं
12:00 के स्थान पर #आदित्य लिखा हुआ अर्थात सूर्य 12 प्रकार के होते हैं..!!
जय श्रीराम 🚩🙏💐❣️
#सनातन_धर्म_ही_सर्वश्रेष्ठ_है