✊🏻 'गिग वर्कर्स न्याय अभियान' फेस्टिवल 🇮🇳
इंडियन यूथ कांग्रेस गुरुग्राम ने गिग वर्कर्स न्याय अभियान फेस्टिवल का आयोजन किया।
इस आयोजन के जरिए हमने प्लेटफॉर्म बेस्ड श्रमिकों के प्रति अपना आभार जताया, उन्हें धन्यवाद दिया।
जो हाथ हर दिन आपका खाना पहुंचाने में, आपका राशन पहुंचाने में, यात्रा करने में, सफाई करने से लेकर तरह तरह से आपकी रोज मदद करता है। वही हाथ आज अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं। धूप हो, बारिश हो, त्योहार हो या बीमारी ये साथी कभी रुकते नहीं।
कंपनिया उन्हें सिर्फ़ "पार्टनर" कहती हैं पर जब बात उनके अधिकारों की आती है तो उन्हें न उचित मेहनताना मिलता है, न कोई सुरक्षा, न उचित सम्मान, न काम की गरिमा ही मिलती है।
इसलिए, अब हम उनके साथ मिलकर पूरी ताकत से कह रहे हैं
"पार्टनर" का लॉलीपॉप बंद करो
कर्मचारी का दर्जा दो।
देश के करोड़ों गिग वर्कर्स की मांग है -
◾ कर्मचारी का दर्जा दो
◾सामाजिक सुरक्षा का अधिकार दो
◾ उचित और समय पर भुगतान दो
◾मनमानी तरीक़े से ID ब्लॉक करने पर पूरी रोक
◾ बीमा और पेंशन की पक्की गारंटी
◾ एल्गोरिदम के ज़रिए होने वाले शोषण का अंत
◾ गिग वर्कर्स के अधिकारों की रक्षा करने वाला मज़बूत राष्ट्रीय कानून बनाओ
📍 गुरुग्राम
धर्मेंद्र प्रधान को जाना होगा...
चंडीगढ़ में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर जोरदार विरोध दर्ज कराया।
देशभर में लगातार हो रहे पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और युवाओं के साथ हो अन्याय का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है।
@RahulGandhi@priyankagandhi@IYC
•सरकारी स्कूल व्यवस्था ध्वस्त
•बढ़ती फीस के बावजूद प्राइवेट स्कूल की गुणवत्ता ध्वस्त
•बढ़िया संस्थानों में सीट की घोर कमी
• प्रवेश परीक्षाओं की मंहगी तैयारी
• उन परीक्षाओं में भी पेपर लीक और धांधली
छात्र जाएं तो जाएं कहां?
युवाओं को दबा दबा कर कोने में ला दिया गया है।
लेकिन अब और नहीं....
मालवीयनगर आग दुर्घटना @BJP4Delhi सरकार के घोर लापरवाही का नतीजा है।
@gupta_rekha जी बताएं कि दिल्ली के फायर स्टेशनों में आधे से अधिक पद खाली क्यों हैं?
• MHA के गाइडलाइंस के आधार पर दिल्ली में 120 फायर स्टेशन होने चाहिए, लेकिन दिल्ली में सिर्फ 71 फायर स्टेशन ही हैं।
• उन 71 फायर स्टेशनों में भी आधे से ज्यादा पद खाली हैं।
• स्टेशन ऑफिसर के 90 पद स्वीकृत हैं, इनमें 72 पद खाली हैं।
•सब-ऑफिसर के 172 पदों में 61 पद खाली हैं।
•लीडिंग फायरमैन के 422 पदों में 246 पद खाली हैं।
•ड्राइवर के 185 पदों में 115 पद खाली हैं।
•इसके अलावा भारी संख्या में फायर ऑपरेटर के पद खाली पड़े हैं।
जब इतनी बड़ी संख्या में पद खाली रहेंगे तो लोगों की जान कैसे बचाई जा सकेगी?
@DelhiPYC@IYC
गिग वर्कर न्याय अभियान कॉन्क्लेव
📍इंदिरा भवन, दिल्ली
प्लेटफॉर्म बेस्ड गिग वर्कर्स के लिए कल का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। गिग वर्कर्स को कर्मचारी का दर्जा, उचित मेहनताना, बेहतर वर्क कंडीशंस और अन्य जरूरी अधिकारों को कानूनी रूप दिलवाने को लेकर बेहद उम्दा संवाद हुआ।
कॉन्क्लेव में पूर्व केंद्रीय मंत्री और AICC treasurer @ajaymaken जी, @IYC राष्ट्रीय प्रभारी @ManishSharmaIYC
जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष @UdayBhanuIYC जी, वरिष्ठ अर्थशास्त्री @SMehrotra1 जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
उपस्थित गिग वर्कर्स साथियों के भारी उत्साह ने इस कॉन्क्लेव को celebration of struggle का रूप दे दिया।
हम सब ने मिलकर यह तय किया है कि इस लड़ाई को देशव्यापी बनाए जाएगा। संघर्ष तब तक नहीं रुकेगा जब तक गिग वर्कर्स को गरिमा सुरक्षा और सम्मान कानूनी रूप से सुनिश्चित नहीं हो जाता।
आज देश में युवाओं के पास बस दो ही विकल्प है ।
एक तरफ बेरोजगारी की खाई है तो दूसरी तरफ एल्गोरिथम की गुलामी का कुँआ।
प्लेटफॉर्म बेस्ड गिग वर्कर्स की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन उनके लिए न तो उचित मेहनताना है, न ही काम के घंटे तय हैं। न ही सामाजिक सुरक्षा है न ही किसी तरह की जॉब सिक्योरिटी।
इसीलिए @IYC गिग वर्कर अभियान चला रही है।
कल 30 मई को इंदिरा भवन में गिग वर्कर न्याय कॉन्क्लेव आयोजित होने जा रहा है।
आप भी जरूर आएं!
दिल्ली के शालीमार बाग गांव में मैक्स रोड पर सड़क चौडीकरण के नाम पर सैकड़ों घरों को ध्वस्त करने का आदेश @gupta_rekha सरकार ने दे दिया है।
यहां लोग 40 -45 सालों से बसे हुए हैं। ज्यादातर परिवार प्रवासी हैं, जो दलित आदिवासी या पिछड़े तबके से आते हैं। यहां के लोग जैसे तैसे पूरी जिंदगी की कमाई लगाकर अपने लिए एक छत की व्यवस्था कर पाए हैं। ये हजारों लोग बेघर हो जायेंगे।
वहां पहले से सत्तर फीट चौड़ा रोड मौजूद है। रोड के ठीक पास से 15 फीट का नाला है। वहीं खाली सरकारी जमीन भी उपलब्ध है।
भाजपा की सरकार कंपनियों के प्रति इतना प्रेम क्यों रखती है कि उन्हें हजारों लोगों का बेघर हो जाना भी मंजूर है।
आखिर जब वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध है तो क्यों मानवीय तरीके से नहीं सोच रही है सरकार?
एक 22 साल का डिलीवरी बॉय
बिहार का मेहनतकश बेटा, अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला दिल्ली में दिल्ली पुलिस द्वारा ही मार दिया गया।
क्या किसी गरीब मेहनतकश युवा की ज़िंदगी इतनी सस्ती है?
कभी धर्म के नाम पर
कभी जाति के नाम पर
कभी भाषा के नाम पर
कभी क्षेत्र के नाम पर
समाज में जहर फैलाने वाले को कड़ा संदेश देने और मृतक के परिवार को न्याय दिलाने के लिए जरूर आइए!
🕯️ न्याय कैंडल मार्च
📍 जंतर मंतर | 4 मई | शाम 5 बजे
Gig workers run our cities every day delivering food, groceries and essentials in rain and heat.
But they are stuck with unfair algorithms, hard work, low pay, uncertainty and almost no security of income.
We @IYC are continuously engaging with them and trying to understand their hardships.
We strongly believe that they deserve a strong National Law that ensures fair wages, dignity and respect.
#GigWorkerNyayAbhiyan
We @IYC have consulted over 36,000 gig workers across multiple cities through the #GigWorkersNyayAbhiyan till now. Still on it.
We’ve heard hundreds of heart-wrenching stories of these platform based workers.
Stories of unsafe conditions, uncertain incomes, lack of social security, and families left vulnerable after accidents.
We urgently need a comprehensive National Gig Workers’ Rights and Welfare Law.
Come! join us in raising the voice of those who keep our cities running and make our lives easier.
Feel free to DM and connect!
मोदी शाह तो नारी शक्ति वंदन की आड़ लेकर संविधान का चीरहरण करना चाह रहे थे। लेकिन प्रतिपक्ष की सूझ बूझ के कारण अब केवल महिला विरोध का क्रंदन ही कर पा रहे हैं।
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BJP - RSS महिला विरोधी संगठन है यह बच्चा बच्चा जानता है। जो लोग जानबूझ कर आपको मोदी शाह को महिलाओं का सबसे बड़ा हितैषी बता रहे हैं उनसे पूछिए कि
1. 1950 के दशक में Hindu Code Bill
जो महिलाओं को संपत्ति का समान अधिकार, तलाक का अधिकार, अपने मर्जी से विवाह का अधिकार, अंतरजातीय विवाह आदि का अधिकार देता था, का विरोध क्यों किया था?
• BJP के पूर्वज जनसंघ और RSS ने बिल को 'हिंदू समाज पर एटम बम' क्यों बताया था?
•RSS ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 1949 में बड़े प्रदर्शन किए। RSS के मुखपत्र Organizer में संपादकीय लिखकर कहा था “यह हिंदू संस्कृति, धर्म और कानून पर घोर आक्रमण है। क्यों?
2. जनसंघ के 1951 के मैनिफेस्टो में “सामाजिक सुधार समाज से ऊपर से नहीं थोपे जा सकते।” जैसी बातें डालता है।
महिलाओं को संपत्ति और तलाक के अधिकार से वंचित रखने की वकालत क्यों करता था?
3. 1989 में जब राजीव गांधी सरकार का Panchayati Raj में महिलाओं के लिए reservation बिल लाया तो नफ़रती नेता लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी बाजपेई विरोध ने विरोध क्यों किया था? क्यों कहते थे कि महिलाओं के राजनीति में आने से परिवार की संरचना खराब हो जाएगी।
4. पूछिए कि भाजपा के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी वेबसाइट पर लेख लिखकर क्यों कहते हैं कि “महिलाओं को स्वतंत्रता की जरूरत नहीं, संरक्षण और उचित चैनलाइजेशन की जरूरत है।
5. आदित्यनाथ ने क्यों कहा कि महिलाओं को संसद में आरक्षण देने से पहले यह देखना चाहिए कि पंचायतों में quota से महिलाओं की मातृत्व और पत्नी की भूमिका पर क्या असर पड़ा।
6. जब 2023 में महिला रिजर्वेशन बिल सर्वसम्मति से पास हो गया था तो लागू करने से किसने रोका था?
• ये बेतुकी बात क्यों करनी है कि सेंसस और डीलिमिटेशन के बाद ही आरक्षण देंगे? इसका क्या लॉजिक है? 543 में से आरक्षण देंगे तो कौन सी आफत आ जाएगी। जब सीटें बढ़ेंगी तो महिलाओं की सीटें भी बढ़ेंगी।
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चुनाव में धर्म की अफीम भी जब फेल हो रहा है तब भाजपा ये शिगूफा लेकर आई हैं। लोग अब झांसा राम की बातों में नहीं आने वाले।
कल मुंबई प्रदेश युवा कांग्रेस और उत्तर मुंबई जिला युवा कांग्रेस द्वारा 'गिग वर्कर न्याय अभियान' का सफल आयोजन किया गया। इस अभियान में वर्कर्स ने बड़ी संख्या में हिस्सा लेकर अपनी समस्याएं साझा की।
हाल ही में नेता प्रतिपक्ष श्री @RahulGandhi जी गिग-वर्कर्स के एक समूह से मिले और उनकी समस्याओं को सुनकर लोकसभा में सरकार से सवाल पूछा
* क्या गिग-वर्कर्स को न्यूनतम मजदूरी मिलेगी? - कोई जवाब नहीं*
* बीमा योजनाओं में उनके क्लेम (फाइल, स्वीकृत, अस्वीकृत) का डेटा क्या है?
- कोई जवाब नहीं
* गिग-वर्कर्स के एक्सीडेंट और मौतों की संख्या बताई जाए?
- कोई जवाब नहीं
* सरकार के पास ID ब्लॉकिंग, जाति-आधारित भेदभाव और महिला वर्कर्स की समस्याओं को दूर करने की कोई योजना है?
- *कोई जवाब नहीं*
सरकार की चुप्पी दिखाती है कि हमारे गिग-वर्कर्स का श्रम, उनका सम्मान, उनकी सुरक्षा, इस सरकार की प्राथमिकता में है ही नहीं।
संसद में संविधान का चीरहरण छुपाने के लिए नारी वंदन का नाटक किया जा रहा है।
नारी वंदन के नाम पर सरकारी कार्यक्रम में एक नारी के साथ कैसा सलूक हुआ खुद उनसे ही सुनिए!
जो लोग महिलाओं के कपड़ों तक को कंट्रोल करना चाहते हैं, भला वो उनकी अधिकार की बात कैसे करेंगे?
भाजपा का कोई ईमान धर्म नहीं है। इन्हें बस एक चीज दिखाई देती है - सत्ता।
सत्ता से करीबी होने के नशे में चूर दूरदर्शन के एंकर ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष के ख़िलाफ़ अपशब्दों का प्रयोग किया। उसके खिलाफ सरकार ने कुछ नहीं किया।
अपशब्द के विरोध में @nsui के छात्रों ने डीडी दफ़्तर के बाहर प्रदर्शन किया।
सामान्यतः ऐसे राजनीतिक प्रदर्शनों में हिरासत में लिए जाने के बाद शाम तक थाने से ही छोड़ दिया जाता है। लेकिन दिल्ली पुलिस ने इन झूठी धाराओं में मामला दर्ज कर पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया।
ये सरकार अन्याय करने वालों पर नहीं अन्याय का विरोध करने वालों पर कार्रवाई करती है।
दो थूक :
ये @AshokShrivasta6 हैं- "पत्रकार"
ये कभी कांग्रेस अध्यक्ष को भला बुरा कहते हैं। कभी नेता प्रतिपक्ष @RahulGandhi जी को नीचा दिखाने के लिए अपशब्द का प्रयोग करते हैं। बहुत लोग इनपर नाराज हो रहे हैं। नहीं होना चाहिए! ये तो बस पारिवारिक परंपरा के वाहक हैं।
दरअसल इनके दिवंगत पिता विश्वंभर श्रीवास्तव लंबे समय तक भारत में नफ़रती राजनीति के प्रणेता लालकृष्ण आडवाणी के निजी सचिव रहे हैं। जीवन का बड़ा कालखंड उन्होंने नफ़रती राजनीति को बनाने बढ़ाने में लगाया। अंत में आडवाणी के बारे में किताब लिखा और कई ऐसी चीजें भी लिख डालीं जो आडवाणी नहीं चाहते थे कि वो बाहर आए।
अशोक भी पत्रकारिता का लबादा ओढ़कर अपने खानदान की उसी नफरती परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
इसी वजह से इन्हें डीडी न्यूज में लगाया गया। ताकि हमारे ही टैक्स के पैसे से हमारे ही देश में गलत सूचना और नफरत फैलाई जा सके।
• क्या इन्हें आपने कभी जनता के मुद्दे उठाते हुए अपने देखा है?
•क्या कभी सरकार से सवाल पूछते हुए देखा है? बेरोजगारी, मंहगाई,प्रदूषण,बिजली, सड़क, पानी, पढ़ाई, कमाई, दवाई पर बात करते हुए देखा है? नहीं न?
आपने इन्हें हमेशा सिर्फ विपक्षी नेताओं पर गुर्राते और भाजपा नेताओं के आगे दुम हिलाते देखा होगा।
कोई इन्हें बताए कि जिस तरह प्रधानमंत्री को जनता चुनती है उसी तरह नेता प्रतिपक्ष भी जनता ही चुनती है। नेता प्रतिपक्ष कोई दुश्मन नहीं होता है कि उसे बिना कारण गाली देकर प्वाइंट स्कोर किया जाए।
लेकिन इन्हें क्या? ये तो खानदानी भक्त हैं!
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 193 सांसदों द्वारा लाया गया महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा स्पीकर @ombirlakota और राज्यसभा के सभापति द्वारा बिना विस्तृत कारण बताए खारिज कर दिया गया।
लोकतंत्र में महाभियोग जैसी संवैधानिक प्रक्रिया कोई साधारण परिस्थितियों में नहीं लाई जाती। यह तभी लाई जाती जब विश्वास का संकट गहरा हो।
अब समझिए कि इन्होंने भारत के कितनी बड़ी आबादी को अपने अहंकार के बूट के नीचे कुचल दिया है?
130 लोकसभा और 63 राज्यसभा सांसद यानी कुल 193 जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने किसी संवैधानिक पदाधिकारी के आचरण पर सवाल उठाया है।
इसके क्या मायने हैं?
भारत की अनुमानित जनसंख्या 2026 में लगभग 147.6 करोड़ है। लोकसभा के प्रत्येक सांसद औसतन लगभग 27 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
130 लोकसभा सांसद = 130 × 27 लाख, मतलब लगभग 35.1 करोड़ नागरिकों का प्रतिनिधित्व।
कुल 193 सांसद (130 + 63) मिलाकर लगभग 50-52 करोड़ नागरिकों का अनुमानित प्रतिनिधित्व करते हैं।
यानि भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 34-35% हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों ने जिस व्यक्ति और संस्था पर अविश्वास जताया उसे स्पीकर महोदय ने दबा दिया।
इन्होंने पक्षपात कर लोकतंत्र पर कालिख पोता है।
क्या इस रवैये को आप लोकतंत्र मानते हैं? अगर ये लोकतंत्र है, तो ऐसे लोकतंत्र में सरसों तेल और अचार का मसाला डालकर छत पर सुखाइए। शायद कुछ काम आ जाए।
@ECISVEEP
संवाद - संघर्ष - समाधान
जहां एक तरफ कुछ नेता गिग वर्कर्स के पीड़ा का इस्तेमाल सिर्फ अपने पीआर के लिए करते हैं। वहीं हमारे यूथ कांग्रेस के साथी लगातार Blinkit, Swiggy,zepto, zomato जैसे प्लेटफॉर्म वर्कर्स से सीधा संवाद कर उनके लिए सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं।
यह संवाद नागपुर में हुआ। इसी तरह देश के 20 शहरों में लगातार संवाद किया जा रहा है।
व्यापक संवाद के बाद हम जल्द ही देशव्यापी संघर्ष की शुरुआत करेंगे।
📞 9811867474 पर मिस्ड कॉल देकर इस आंदोलन को मज़बूत करें।
गिग वर्कर्स न्याय अभियान
गरिमा सुरक्षा और सम्मान
अपना जीवन,करियर दांव पर लगाकर सच दिखाने वाले हमारे पत्रकार, क्रिएटर दोस्तों!
आपको सलाम!
भारत में एक आत्मबल से कमजोर, डरपोक लेकिन मुँहजोर व्यक्ति की सत्ता है।
पैसा, पीआर और प्रोपगंडा से तैयार यह मोम का शेर आपके ईमानदार कैमरा और बेबाक माइक का ताप नहीं झेल पा रहा।
आपके कुछ साथियों ने अपनी रीढ़, अपना जमीर डर या लालच के कारण सत्ता के जूतों के नीचे रख दिया है।
इसलिए, अगर आप आम युवाओं,किसानों, दलितों, आदिवासियों,पिछड़ों और महिलाओं की आवाज उठाएंगे तो सरकार द्वारा कुचले जायेंगे।
लेकिन,आप इस संघर्ष में अकेले नहीं हैं। हम आपके साथ हैं। इस देश का युवा आपके साथ हैं।
एक समय आयेगा जब आपके रीढ़ विहीन साथियों की कहानी इतिहास के कूड़ेदान में बदबू फैला रहा होगा। ठीक उसी वक्त, आने वाली पीढ़ियां आपके इस संघर्ष को आदर से याद कर रही होगी।
लड़े चलो, बढ़े चलो!
Link Road, New Lajpat Rai Market क्षेत्र में स्ट्रीट वेंडर्स के विरुद्ध पुलिस द्वारा अवैध बेदखली, मारपीट, धमकी एवं बिना विधिक प्रक्रिया के सामान जब्ती हो रही है।
यहां Street Vendors Act, 2014, Delhi Street Vending Scheme, 2019 तथा माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का स्पष्ट उल्लंघन हो रहा।
इस संदर्भ में क्षेत्र के स्ट्रीट वेंडर्स भाई बहनों ने हम से मिलकर अपनी समस्या साझा किया।
गरिमा के साथ आजीविका कमाने का अधिकार संविधान ने सबको दिया है।
प्रशासन से अनुरोध है कि जल्द ही इनकी समस्याओं का समाधान किया जाय।
@IYC@DelhiPYC