How can a Government Reporter be let go after labelling a student as pakistani?
Is he an ISI agent? (Allegedly)
Sent to India to run a psyop of Pakistani superiority?
#amitkilhor#kilhor#ashoksrivastav#vedant#cbse
ऋषिकेश घटना के बाद उत्तराखंड और ऋषिकेश को भर भर के गालियाँ धमकी 😱😡
अब पानी सर से ऊपर जा चुका ये वीडियो उत्तराखंड पुलिस तक पहुँचाये बाक़ी काम पुलिस कर लेगी
लगातार एक घटना से पूरे ऋषिकेश उत्तराखंड को जिस तरह से टारगेट किया जा रहा और कुछ व्यूज के भूले सोशल मीडिया में हरियाणा उत्तराखंड के बीच नफ़रत फैला रहे है
#Uttarakhand #Rishikesh #Haridwar #Hariyana
2017 में पेट्रोलियम मंत्री रहे व वर्तमान में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बेटी के इंटरनेशनल सिम कार्ड का 68,424 रूपये का बिल सरकारी कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी ने भरा....
मंत्रियों के बच्चों के बिल सरकार भरे और 22 लाख नीट के बच्चों के भविष्य का कोई हिसाब नहीं?
One tweet from Anand Mahindra about Phool Dei and suddenly everyone wants to make it “global”. Even the Chief Minister steps in, appreciation flows, and the festival becomes a talking point overnight.
But then you read this letter.
The same people who are actually working on the ground to keep the culture alive are still waiting for basic support. No response, no backing, no real help.
This is the gap.
Celebration online is easy.
Supporting it on the ground is where things fall apart.
@anandmahindra@pushkardhami
कहने को हम चौथी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हैं और राजधानी Delhi का ये हाल है! आम इंसान ना सड़क पर सुरक्षित है और ना ही घर में! उत्तम नगर में आग लगी, 9 लोग ज़िंदा जल गए। सरकार और सिस्टम क्या सिर्फ जांच कमेटी बिठाने के लिए है?
📝पत्रकार: आप भारतीय लोकतंत्र को कैसे देखते हैं?
🚨खान सर: मोदी ने 100 स्मार्ट शहरों का वादा किया था, लेकिन वे नहीं पाए। वे महंगाई पर काबू नहीं पा सके, लेकिन आप उनसे सवाल भी नहीं पूछ सकते।🔥
"यहाँ जवाबदेही (accountability) बिल्कुल शून्य है। क्या मैं ट्रंप से सवाल पूछूँ?" 🔥
हमारी जमीन बिक जाएगी, बच्चे बर्बाद हो जाएंगे, हम नाती-पोतों को क्या देंगे?
देवप्रयाग में एक गांव की विधवा महिला पिछले 4 दिनों से धरने पर बैठी है। वजह गांव में खोला गया शराब का ठेका।
💔 महिला का दर्द सुनिए…
“मैं एक विधवा हूं… हमारे बच्चे बर्बाद हो रहे हैं। घर के काम छूट गए हैं, नाती-पोते भूखे होंगे, लेकिन मैं यहां से नहीं हटूंगी।”
वह कहती है
“जिसने भी यहां शराब का ठेका खोला है, उसने हमारे घरों को बर्बादी की ओर धकेल दिया है। हमारी जमीन बिक जाएगी… बच्चों का भविष्य अंधेरे में चला जाएगा।”
😢 4 दिन से धरने पर बैठी इस महिला की आंखों में गुस्सा और बेबसी साफ दिखती है।
“मेरे दिल में आग लगी है… अगर जरूरत पड़ी तो मैं इस ठेके को आग लगा दूंगी… मुझे जेल भेज देना।”
📢 सबसे बड़ा सवाल…
चुनाव के समय ग्राम प्रधान ने वादा किया था कि ठेका बंद कराया जाएगा, लेकिन अब प्रधान ही गायब हैं।
पांडवाज के ईशान डोभाल की अपील गौरतलब है
उत्तराखंड की संस्कृति, प्रकृति, संगीत और समुदाय के किसी भी उत्सव को सरकार या कंपनियों पर निर्भर नहीं होना चाहिए बल्कि इसे उनके दम पर होना चाहिए, जिनका प्रतिनिधित्व यह उत्सव करता है.
इस उत्सव के आयोजन के इस पक्ष को पूरा करने के लिए उत्तराखंडी समाज को, खास तौर पर कला, संस्कृति प्रेमी साधन संपन्न लोगों को हाथ बढ़ाना चाहिए.
I must confess that until recently I had never heard of Phool Dei, a spring festival that was celebrated yesterday in the villages of Uttarakhand.
Children gather fresh flowers from the hills and go from house to house placing them on doorsteps, offering a blessing for the household:
“Phool Dei, Chhamma Dei,
Deni Dwar, Bhar Bhakar…” roughly wishing the home prosperity.
In return they receive sweets.
It reminded me a little of Halloween in the U.S., where children go door to door saying “trick or treat.” But what a lovely contrast. Here the children arrive not threatening a prank, or asking first, but giving first. Flowers.
In an age when we speak so much about environmental consciousness, this graceful celebration of spring and nature deserves to be far more widely known.
Just as Holi travelled across India and the world, perhaps Phool Dei should too.
For me, the children of Uttarakhand are my #MondayMotivation
"संस्कृति के ध्वजवाहकों का साथ देना और उनकी मदद करना हर पहाड़ प्रेमी का कर्तव्य है!"
सरकार द्वारा उपेक्षित "पंडौ"(#Pandvaas) ग्रुप की अनोखी पहल "काफल फेस्टिवल" को सपोर्ट करने के लिए UKD उक्रांद के युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष आशीष नेगी का संदेश!
#SupportPandavaas#SupportKafalFestival
Pandavaas की टीम ने एक खुला पत्र लिखकर उत्तराखंड की संस्कृति को केवल ऑनलाइन तक सीमित रखने पर चिंता जताई है।
उनका 'काफल फेस्टिवल' राज्य की संगीत और प्रकृति को बचाने का एक जमीनी प्रयास है, लेकिन इसे सरकारी या निजी संस्थानों से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है।
यह पत्र सवाल उठाता है कि यदि फूलदेई जैसी परंपराएं सोशल मीडिया पर गर्व का विषय हैं, तो उन्हें धरातल पर जीवित रखने वाली कोशिशों को प्रायोजन और समर्थन क्यों नहीं मिलता?
संस्कृति के संरक्षण के लिए केवल प्रशंसा नहीं, बल्कि ठोस भागीदारी की आवश्यकता है।
#Uttarakhand
लद्दाख के climate activist सोनम वांगचुक का जेल से बाहर आने के बाद बड़ा बयान
कहा- मैं जेल से या तो कोर्ट में जीतकर निकलने वाला था या 12 महीने बाद बाहर आता
मैं 12 महीने जेल में रहने के लिए पूरी तरह तैयार था और बाहर आकर पूरी horror story बताने वाला था
कैसे मुझे घर से अचानक उठाकर जेल में डाल दिया गया
कई दिनों तक परिवार और वकीलों से बात करने तक का मौका नहीं दिया गया
मेरी पत्नी गीतांजलि जे आंगमो को पत्रकारों से मिलने तक नहीं दिया गया
कैम्पस के बाहर भारी security तैनात थी
वह चुपचाप दिल्ली पहुंचीं और अदालत का दरवाजा खटखटाया
कई हफ्तों तक दिल्ली की सड़कों पर cat and mouse chase जैसा माहौल रहा
उनकी गाड़ियों का पीछा कारों और मोटरसाइकिलों से किया जाता रहा
पूरा घटनाक्रम किसी filmy scene जैसा था
वकीलों तक कोई संदेश भेजना भी बेहद मुश्किल बना दिया गया था
हालांकि जेल के अंदर staff और लोग बेहद upright और kind थे
उत्तराखंड में ज्यादातर दो नंबर वालों और चमचागिरी करने वालों को ही बड़ी फंडिंग मिलती है। Pandavas जैसे प्रतिभाशाली युवाओं के ग्रुप को शून्य सपोर्ट मिलना बहुत कुछ कहता है। अधिक जानकारी के लिए पत्र देख सकते हैं।
PS: शालीनता से कहना चाहूंगा, अगर आप क्राउड फंडिंग की कोई मुहिम शुरू करते हैं तो मेरी तरफ से 11,000 का कंट्रीब्यूशन रहेगा🙏। उम्मीद रहेगी कि जब सरकारों ने हाथ खड़े कर दिए हैं तो हम पब्लिक के लोग मिलकर Pandavas का साथ देंगे, समर्थन करेंगे और सिस्टम को आइना दिखाएंगे।
Sonam Wangchuk
एक वक्त तक इनोवेटर थे, education reformer थे, environmentalist थे...
पूरी जिंदगी पढ़ने-पढ़ाने पर ही खर्च की, सच्चे देशप्रेमी की भूमिका निभाई, लेकिन फिर कुछ मांग लिया.. statehood... उतना ही statehood जितना बिहार-यूपी के पास है
सरकार को गुस्सा आ गया, देशद्रोही करार दे दिए गए , 6 महीने से जेल में हैं
लेकिन अब सरकार का गुस्सा ठंडा हो गया तो गृह मंत्रालय की तरफ़ से nsa हटाने की बात करके आजाद हो रहे...
ये व्यवस्था कब तक चलेगी? 6 महीने जेल में रखने से जो समय की बर्बादी हुई, जो पैसे लगे, इमेज खराब करने का जो प्रयास हुआ, उसकी भरपाई कौन करेगा?
और दुनियाभर में नाम कमाने वालों के साथ अगर ऐसे सलूक होते रहेंगे तो फिर तो देश में कोई social welfare की सोचेगा तक नहीं ।
उस वक्त तो मीडिया भी सोनम के ख़िलाफ़ सरकार का ही एजेंडा चला रही थी
क्या एक सच्चे देशप्रेमी से माफी नहीं मांगनी चाहिए सबको?
ये हाल है सीएम धामी के गृह जनपद उधमसिंह नगर का। खनन करने वालों से वन विभाग की टीम ने कागज मांगे तो फिर वो हुआ जो इस वीडियो में हो रहा है।
सितारगंज के रनसाली रेंज की घटना है।
विधिक कार्रवाई जारी है।