एकता में ही शक्ति है। प्रत्येक कंप्यूटर अनुदेशक का दायित्व है कि वह संघ का सदस्य बनकर संगठन को मजबूत करे। मजबूत संगठन ही अनुदेशकों के अधिकारों और सम्मान की प्रभावी लड़ाई लड़ सकता है।
आइए, अधिक से अधिक साथियों को सदस्य बनाकर कंप्यूटर अनुदेशक संघ को सशक्त एवं प्रभावशाली बनाएं।
आज सदस्यता अभियान में जुड़कर संगठन की शक्ति बढ़ाएँ और अपने अधिकारों की इस लड़ाई में सक्रिय भागीदार बनें।
एकता हमारी ताकत है, संगठन हमारी पहचान।
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#बड़ी_खबर
*शिक्षक हितों की अनवरत अनदेखी : शिक्षक आक्रोश होगा अब मुखर*
शिक्षा के मंदिरों में ज्ञान का दीप जलाने वाले शिक्षक आज स्वयं उपेक्षा, विसंगतियों और प्रशासनिक उदासीनता के अंधकार में खड़े हैं।
👉राजस्थान सेवा नियमों की अनदेखी कर शिक्षकों के अवकाश में कटौती,
👉तृतीय श्रेणी शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया वर्षों से पीड़ा का पर्याय बनना,
👉तृतीय श्रेणी अध्यापकों के तबादले इनके लिए दूर की कोड़ी बनना,
👉संविदा शिक्षकों के नियमितीकरण में अनिश्चितता
👉पदोन्नत कार्मिकों की अव्यवस्थित काउंसलिंग, नियमों की निरंतर अनदेखी, रिक्त पदों को उचित रूप से नहीं खोलना,
👉BCI कैडर सुधार,
👉गैर शैक्षणिक कार्य,
👉असंख्य ऑनलाइन प्रोजेक्ट्स
और बच्चों को पढ़ाने के अलावा सारे काम शिक्षकों से करवाने जैसे अनगिनत मुद्दों ने शिक्षक समाज को गहरे आक्रोश से भर दिया है।
इन्हीं ज्वलंत समस्याओं को लेकर
✊ अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा)
आज दोपहर करेगा प्रेस वार्ता।
📍 समय: आज दोपहर 12 बजे ।
📍स्थान : पिंक सिटी प्रेस क्लब, जयपुर।
सूत्रों के अनुसार, शिक्षक हितों की लगातार हो रही अनदेखी से क्षुब्ध महासंघ आज सरकार के विरुद्ध व्यापक आंदोलन की घोषणा भी कर सकता है।
यह केवल शिक्षकों की व्यथा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के भविष्य का प्रश्न है।
जब गुरु ही पीड़ित होगा, तो पीढ़ियों का निर्माण कैसे होगा?
🖋️*“शिक्षक की आवाज को दबाया नहीं जा सकता, क्योंकि वही राष्ट्र के भविष्य की आवाज का निर्माणकर्ता है।”*
पूर्व किए गए प्रयासों से माननीया उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी महोदया ने RCTA कार्यकारिणी को बुलाया और महोदया ने फिर से सारी समस्या सुनी और जड़ तक इसे मालूम करके उच्च अधिकारियों तक बात पहुंचाई जल्द ही समस्या का समाधान होगा बस हिम्मत मत हारिएगा साथियों सहयोग बनाए रखिए @RCTA_official
अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) @RSSRashtriya का समस्त कंप्यूटर अनुदेशक साथियों की ओर से हृदय से आभार एवं धन्यवाद।
आपके निरंतर, समर्पित और सकारात्मक प्रयासों के कारण ही आज राजस्थान में कंप्यूटर अनुदेशकों के कैडर रिव्यू की प्रक्रिया साकार रूप ले रही है।
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शिक्षक एवं विद्यार्थी हितों पर चोट बर्दाश्त नहीं—शैक्षणिक कैलेंडर में शीघ्र संशोधन हो : अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) की मांग
जयपुर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने बताया कि निदेशालय, बीकानेर द्वारा जारी शिविरा पंचांग 2026-27 शिक्षक एवं छात्र हितों के प्रतिकूल है। इस संबंध में महासंघ द्वारा शिक्षा सचिव एवं निदेशक महोदय को अवगत कराते हुए संगठन की मांगों को ध्यान में रखकर शिविरा पंचांग जारी करने पर सहमति बनी थी। किन्तु खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि जिन तीन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन सभी को नजरअंदाज कर दिया गया है।
संगठन की शिक्षा अधिकारियों से हुई वार्ता के दौरान अधिकारियों द्वारा ग्रीष्मावकाश 17 मई से 20 जून तक रखने का प्रस्ताव रखा गया था। इस पर संगठन ने राजस्थान सेवा नियमों के अनुसार विगत वर्षों से दिए जा रहे ग्रीष्मावकाश में कटौती का विरोध किया तथा आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन का मार्ग अपनाने की बात कही। इसके पश्चात ग्रीष्मावकाश में किसी प्रकार की कटौती नहीं करने का आश्वासन दिया गया था। किन्तु वर्तमान शिविरा पंचांग में 17 मई से 30 जून के स्थान पर 17 मई से 20 जून तक ग्रीष्मावकाश निर्धारित कर दिया गया है। संगठन का कहना है कि वार्ता में सहमति के बाद भी मनमाने आदेश जारी करना सरकार की छवि को धूमिल करता है।
प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने कहा कि राजस्थान सेवा नियमों के अनुसार शिक्षा विभाग, न्यायालय तथा अन्य कुछ विभाग विश्रामकालीन विभागों की श्रेणी में आते हैं, जिनमें कर्मचारियों को ग्रीष्मावकाश के दौरान वेतन दिया जाता है तथा 30 के स्थान पर केवल 15 पी.एल. (प्रिविलेज लीव) ही देय होती है। ऐसी स्थिति में यदि ग्रीष्मावकाश में कटौती की जाती है, तो कर्मचारियों को अन्य विभागों की भाँति 30 पी.एल. प्रदान की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीष्म ऋतु में भीषण गर्मी के कारण विद्यार्थी विद्यालय नहीं आते हैं, ऐसे में विद्यालय शीघ्र खोलने से विद्यार्थियों को कोई लाभ नहीं होगा। साथ ही, संगठन ने वार्ता के दौरान विद्यालयों का प्रातःकालीन समय (प्रातः 7:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक) 1 अप्रैल के स्थान पर 1 मार्च से लागू करने की मांग की थी, जिस पर आश्वासन दिया गया था, किन्तु उसमें भी कोई परिवर्तन नहीं किया गया।
इसके अतिरिक्त, स्थानीय मेलों, त्योहारों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रधानाध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा वर्ष में 2 अधिकृत अवकाश घोषित किए जाते थे, जिन्हें घटाकर 1 कर दिया गया है। यह भी अनुचित है।
संगठन के प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा, प्रदेश सभा अध्यक्ष संपत सिंह, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि आचार्य, प्रदेश मंत्री अमरजीत सिंह, प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल, प्रदेश महिला उपाध्यक्ष सुषमा बिश्नोई, प्रदेश महिला मंत्री गीता जैलिया, प्रदेश कोषाध्यक्ष कैलाश कच्छावा सहित संपूर्ण प्रदेश कार्यकारिणी ने एक स्वर में कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मनमानी के कारण संगठन की उचित मांगों को सहमति के बाद भी दरकिनार किया गया है, जिससे शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
संगठन ने आग्रह किया है कि वार्ता के दौरान बनी सहमति के अनुसार—
ग्रीष्मावकाश 17 मई से 30 जून तक यथावत रखा जाए अथवा पी.एल. प्रदान की जाए, प्रातःकालीन विद्यालय समय 1 अप्रैल के स्थान पर 1 मार्च से लागू किया जाए, तथा प्रधानाध्यापक द्वारा घोषित अवकाश पुनः 2 किए जाएँ।
शिक्षक एवं छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए इन आदेशों में शीघ्र संशोधन किया जाना आवश्यक है। अन्यथा संगठन विवश होकर आंदोलन का मार्ग अपनाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।
महेंद्र कुमार लखारा
प्रदेश महामंत्री
एबीआरएसएम, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा)
अगर #कंप्यूटर_अनुदेशक के सभी संघ मिलकर इस ग्रीष्म अवकाश में सरकार से बात नहीं करते,
तो जो साथी माननीय न्यायलय जाने के लिए तैयार हैं उनका समर्थन करना चाहिए।
अब निर्णय का समय है। ✍️ यह सस्पेंस हमेशा के लिए तो नहीं चल सकता ✍️
#ComputerAnudeshak@RCTA_official@RCTASirohiJalor
प्रत्येक नेताजी को 5-7 लाख का एक लेपटॉप चाहिए, मतलब इस एक लेपटॉप के बदले एक स्कूल में एक कंप्यूटर लैब तैयार हो सकती है, यानि 200 लैपटॉप के बदले 200 स्कूल में कंप्यूटर लैब तैयार हो सकती है 🙏✍️
कंप्यूटर लैब में हम पढ़ाने को तरस रहें है और बच्चें पढ़ने को 🙏
@vinodmittal9@pantlp
अगर यह खबर सच साबित होती है, तो यह कंप्यूटर अनुदेशक और कंप्यूटर विषय के लिए एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक निर्णय साबित होगा। 🔥
और यदि कक्षा 9वीं और 10वीं में कंप्यूटर विषय को अनिवार्य कर दिया जाता है तथा बोर्ड में सत्रांक (Internal Marks) भी भेजे जाते हैं, तो यकीन मानिए यह कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होगी। 💥
इससे न केवल विद्यार्थियों में डिजिटल शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, बल्कि कंप्यूटर अनुदेशक पद की उपयोगिता और महत्व भी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगा।
#कंप्यूटर_अनुदेशक
@BhajanlalBjp@RajCMO
कक्षा 6-10 में कंप्यूटर विज्ञान को अनिवार्य विषय बनाकर उसके अंक अंकतालिका में जोड़ने के सवाल पर सरकार का उत्तर है:- "वर्तमान में ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।"
चिंता की बात यह है कि जब दुनिया AI, कोडिंग और डिजिटल स्किल्स को भविष्य की नींव बना रही है, तब हम अभी तक कंप्यूटर को मुख्य विषय तक नहीं बना पाए। जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और डिजिटल इकोनॉमी की ओर तेज़ी से बढ़ रही है, तब हमारे विद्यार्थियों को बुनियादी डिजिटल शिक्षा से भी वंचित रखना भविष्य की तैयारी को कमजोर करना है।
शिक्षा सिर्फ पाठ्यक्रम नहीं होती, वह राष्ट्र की दिशा तय करती है और डिजिटल युग में कंप्यूटर शिक्षा विकल्प नहीं, अनिवार्यता है।
@PMOIndia@narendramodi@EduMinOfIndia@RajCMO@BhajanlalBjp@madandilawar@rajeduofficial
कंप्यूटर शिक्षा और कंप्यूटर अनुदेशकों पर विधानसभा मे शिक्षा विभाग ने घुमाफिराकर वही जवाब दिया है जो मई 2021 में हाइकोर्ट में दिया था।
समझ से बाहर है शिक्षा विभाग कौनसी शिक्षण विधियों की गाथा गा रहा है जबकि कंप्यूटर विषय अपने आप मे शैक्षणिक+प्रायोगिक है और आज के युग की अनिवार्यता।
@rajeduofficial सर बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा की बेसिक ज्ञान
बच्चें कीबोर्ड माउस मोनीटर तक नहीं जानते हैं आप आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस कैसे बताओगे
पहले कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य विषय बनाएं
कंप्यूटर के रेगुलर कालांश शुरू करवायें
कंप्यूटर की किताबें भेजिए
कंप्यूटर लैब का हाल तो यह है वर्तमान में
आज श्री प्रदीप जी पूनिया द्वारा रायराकला स्थित देवनारायण बालक राजकीय आवासीय विद्यालय के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम के अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री @AvinashGehlot_ जी को कंप्यूटर अनुदेशकों के कैडर संशोधन एवं विस्तार तथा वेतन विसंगति के समाधान संबंधी ज्ञापन सौंपा गया
शिक्षा विभाग,राजस्थान में कार्यरत बेसिक एवं सीनियर कंप्यूटर अनुदेशक अन्य विषय अध्यापकों के समान शैक्षणिक योग्यता व दायित्व निभा रहे हैं,फिर भी कैडर, वेतनमान और पदोन्नति से वंचित हैं।
जिसका जल्द समाधान नितांत आवश्यक है।
@svoruganti1466@BhajanlalBjp@madandilawar@rajeduofficial
राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षक कैडर का पुनर्गठन कर अन्य शिक्षकों के भांति इसका निर्माण किया जाए।
इसके साथ AI ओर कंप्यूटर शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए नही तो भविष्य में पढ़े लिखे लोग इस से अनजान अनपढ़ ही कहलायेंगे ओर फिर से साक्षरता 0% हो जायेगी।
राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षक कैडर का पुनर्गठन कर अन्य शिक्षकों के भांति इसका निर्माण किया जाए।
इसके साथ AI ओर कंप्यूटर शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए नही तो भविष्य में पढ़े लिखे लोग इस से अनजान अनपढ़ ही कहलायेंगे ओर फिर से साक्षरता 0% हो जायेगी।