आज फूलबाग ऑफिस, अलवर में आगामी नगर निकाय एवं पंचायती राज चुनावों के संदर्भ में अलवर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सहित जिले के वरिष्ठ पार्टी पदाधिकारियों के साथ चुनाव की रूपरेखा तैयार की।
#Alwar
अलवर जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में शांतिपूर्ण तरीके से धरना देकर विरोध जता रहे कांग्रेस, NSUI, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और नेताओं को पुलिस द्वारा गिरफ्तार करना लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है।
आज केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह अलवर आए हैं और हम सिर्फ इतना पूछ रहे हैं कि जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई बर्बरतापूर्ण घटना की जिम्मेदारी किसकी है?
क्या सवाल पूछना अपराध हो गया है? क्या शांतिपूर्ण विरोध करना गुनाह है? आवाज उठाने वालों को हिरासत में लेकर सरकार सच से नहीं बच सकती।
गिरफ्तारियां कांग्रेस कार्यकर्ताओं की आवाज को दबा नहीं सकतीं। सरकार जितना दमन करेगी, हम उतनी ही मजबूती से जनता और छात्रों के हक में आवाज उठाएंगे। @RajCMO@BhajanlalBjp@INCRajasthan
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी आज अलवर आ रहे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री भी होंगे, केंद्रीय मंत्री और यहां के सांसद भी होंगे। अलवर में आपका स्वागत है।
पिछले कुछ वर्षों से अलवर की जो दुर्दशा आपकी सरकारों ने कर रखी है, जिस तरह लगातार अपराध बढ़ रहा है, दिनदहाड़े हत्याएं हो रही हैं, मकानों में डाके डाले जा रहे हैं, बहन - बेटियों - बुजुर्गों की सुरक्षा तक सवालों के घेरे में आ गई है, अलवर का युवा बाहर जाकर छोटी - मोटी नौकरी करने को मजबूर है, अलवर में इंडस्ट्रीज से लेकर सर्विस सेक्टर का कोई विकास नहीं हो पाया; ऐसे तमाम मुद्दे हैं, जिनकी सीधी जवाबदेही केंद्र और राज्य की सरकारों पर बनती है।
अलवर के लोग चाहते हैं कि गृह मंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री और यहां के सांसद व मंत्री अलवर की इस बदहाली पर ज़रूर बोलें।
आख़िर, क्या कारण है कि अलवर को पिछले कुछ वर्षों में काफ़ी पीछे धकेल दिया गया है ? अलवर वासी यह जानना चाहते हैं।
इसी के साथ गृह मंत्री @AmitShah जी से महत्वपूर्ण प्रश्न -
करीब महीनेभर पहले राजधानी दिल्ली में निर्दोष छात्रों, युवाओं और GenZ पर भयानक हिंसा किसके इशारे पर की गई थी ? बच्चों पर पैलेट गन का इस्तेमाल क्यों किया गया ? आँसू गैस के गोले क्यों छोड़े गए, किसके निर्देशों पर यह सब हुआ ?
इन सवालों से बचने के लिए खुद गृह मंत्री क्यों 20 दिनों तक संसद से गायब रहे, और क्यों संसद का पूरा monsoon session ठप किया गया, देश की आम - साधारण जनता के पैसों की बर्बादी क्यों की गई ?
UPA सरकार के दौरान मैं स्वयं केंद्र में गृह राज्य मंत्री रहा हूँ। विषय की गंभीरता को समझते हुए अमित शाह जी से ये कुछ सवाल पूछे हैं। हालांकि मुझे मालूम है कि इन सवालों का जवाब देने की हिम्मत इनमें नहीं।
The Hindu में प्रकाशित इस खबर में जिस तरह नागरिक अधिकार समूहों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त अरावली समिति की जनसुनवाई प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, वह गंभीर चिंता का विषय है।
जिस समिति को अरावली पर रिपोर्ट बनाने की जिम्मेदारी दी गई है, यदि उसमें अलवर के लोगों की तरफ़ से real feedback नहीं होगा, तो अरावली जैसे संवेदनशील क्षेत्र के भविष्य का आकलन कितना समावेशी होगा?
खबर में यह भी सामने आया है कि अलवर और अजमेर में हुई सुनवाइयों में mining lobby के प्रभाव और स्थानीय लोगों की पर्याप्त भागीदारी न होने की शिकायतें उठी हैं। ग्रामीण समुदायों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुँचना और टिप्पणियाँ देने के लिए पर्याप्त समय न मिलना जनभागीदारी की भावना के विपरीत है।
सरकार और प्रशासन को समझना होगा कि अरावली का भविष्य केवल फाइलों और औपचारिक सुनवाइयों से तय नहीं किया जा सकता। जिन लोगों का जीवन, रोजगार, पानी और पर्यावरण सीधे अरावली से जुड़ा है, उनकी आवाज़ को केंद्र में रखना होगा।
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After Kota and Dehradun, Chhatron Ki Goonj is now coming to Prayagraj, Uttar Pradesh.
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पूर्व केंद्रीय मंत्री CWC सदस्य अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी महासचिव असम प्रभारी आदरणीय भंवर जितेंद्र सिंह जी को जन्म दिवस की बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं