@pratapgarhpol माननीय उच्च न्यायालय में दिए गए शपथपत्र में प्रतापगढ़ DCRB थाना अंतू थाना कोतवाली नगर की पुलिस ने अभियुक्तों का आपराधिक इतिहास छिपा लिया जबकि अभियुक्त जयंती प्रसाद ओझा पूर्व में दो बार दोषसिद्ध किया जा चुका है और तमाम आपराधिक मामले लम्बित हैं।एवं अन्य अभियुक्तों का भी आपराधिक
@yadavakhilesh जहां भी तानाशाही सरकार है वहा पर पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार होता है
रूस में सरकार की बुराई करने पर पत्रकार को जेल में डाल दिया जाता है
नॉर्थ कोरिया में जान से मार दिया जाता है ........बीजेपी अगर 5 साल और रही तो यहां के पत्रकारों को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा
@yadavakhilesh बहुत बड़ा खुलासा, भूपेश बघेल से बात चित के दौरन पीड़ित पत्रकार ने बताया कि भाजपा वालों ने उसको इसलिए भी पीटा क्योंकि उनको लगा कि ये मुसलमान है, जबकी वो एक ब्राह्मण है।
@yadavakhilesh पत्रकार @RaghavTrivedi18 की हालत देखिए और यह चोट के निशान देखिए यह गृह मंत्री अमित शाह की रैली में पत्रकारिता करने की सजा है
देश सच्ची पत्रकारिता के साथ खड़ा है
हिंसा हार की निशानी होती है। भाजपा की रायबरेली की एक रैली में पैसे देकर लाए गये लोगों के बारे में जब दिल्ली के एक पत्रकार ने सच सबके सामने लाना चाहा तो भाजपाइयों ने उसके ऊपर हमला कर दिया।
यही है उप्र में क़ानून-व्यवस्था का सच। जब देश के गृहमंत्री की रैली में ये हाल है, जिनके अधीन पुलिस होती है तो फिर बाक़ी देश का कितना बुरा हाल होगा, कहने की ज़रूरत नहीं।
भाजपा हिंसक माहौल बनाकर चुनाव जीतना चाहती है।
#कभी_नहीं_चाहिए_भाजपा
4 चरणों के बाद जनता ने भाजपा के 400 के दावे के आगे से 4 गायब कर दिया है और अब डबल इंजन वालों की संभावना में बस डबल शून्य बचे हैं = भाजपा की सरकार बनाने की संभावना 00%.
आगामी तीन चरणों में भी जनता भाजपा को हराने के लिए और इंडिया गठबंधन की सरकार बनाने के लिए, चार चरणों से भी ज़्यादा उत्साह से वोट डालेगी। जनता 1 जून के अंतिम चरण तक भाजपा के ख़िलाफ़ बिना किसी बहकावे-भटकावे के बिना रुके-थमे जमकर, आख़िरी दम तक वोट करेगी।
इंडिया गठबंधन को जनता जिता रही है।
#इंडिया_की_जीत_में_देश_की_जीत
30 हज़ार फ़िलिस्तीनी शहीद हो चुके हैं, 20 लाख की आबादी में 14 लाख लोग बेघर हो गए हैं। जिनको अल्लाहﷻ ने सब कुछ दिया है वो गूंगे बन कर बैठे हैं,आप सब मासूम फ़िलिस्तीनियों के लिए दुआ करें।
‘गरीबों की सवारी’ भारतीय रेल के हर वर्ग का किराया बढ़ाया गया,
किराए में बुजुर्गों को मिलने वाली छूट तक खत्म कर दी गयी,
प्लेटफार्म टिकट के दाम बढ़ाए गए,
निजीकरण के द्वार खोल दिये गए
जनता की मेहनत की कमाई से निचोड़ा जा रहा यह पैसा क्या ‘सेल्फी स्टैंड’ बनाने के लिए था?
भारत की जनता को क्या चाहिए?
सस्ता गैस सिलेंडर एवं सुलभ रेल यात्रा?
या
‘शहंशाह के बुत’ के साथ तस्वीर?