जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुए लाठीचार्ज की मैं कड़ी निंदा करता हूँ। तानाशाही पर आमादा मोदी सरकार यह समझ ले कि लाठियों के बल पर न सच को दबाया जा सकता है और न ही न्याय की गूंज को।
आज युवा भी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं क्योंकि एक समय पर युवाओं ने बड़ी संख्या में भाजपा के झूठे प्रचार के जाल में फंसकर श्री नरेन्द्र मोदी के पक्ष में वोट किया परन्तु प्रधानमंत्री मोदी ने इनकी आवाज को दबाया है।
अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे युवाओं की आवाज़ को कुचलना लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है। यह देश बाबासाहेब के संविधान और पंडित नेहरू के लोकतांत्रिक मूल्यों से चलेगा, न कि भाजपा की तानाशाही से!
देश की राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हजारों छात्रों पर पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्ण लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोले दागना लोकतांत्रिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है।सरकार के इशारे पर किया गया यह कृत्य बेहद निंदनीय है।
पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर सरकार को छात्रों की आवाज़ को बल प्रयोग दबाने के बजाय उनकी बात सुनकर ठोस समाधान निकालना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी लगातार छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की माँग उठाते रहे हैं।
अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह तानाशाही करने के बजाय छात्रों से संवाद कर उनके हित में कदम उठाए।
इस समय देश की परीक्षा प्रणालियों में आमूलचूल सुरक्षात्मक बदलाव लाने की पहल करनी चाहिए।
@RahulGandhi@INCIndia
#DharmendraPradhanResign #संसद_मार्च
#NirmalChoudhary
वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक,मोदी सरकार के कार्यकाल में बड़े उद्योगपतियों के ₹7.75 लाख करोड़ के ऋण बट्टे खाते में डाले गए मगर सरकार जनता को उन कॉर्पोरेट घरानों के नाम तक बताने को तैयार नहीं है, आज लोक सभा में मेरे एक प्रश्न का लिखित जवाब देते हुए भारत सरकार के वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने यह स्वीकार किया है कि वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने बड़े उद्योगों एवं सेवा क्षेत्र से जुड़े उधारकर्ताओं के ₹7.75 लाख करोड़ से अधिक ऋण बट्टे खाते (राइट-ऑफ) में डाल दिए हैं, जबकि इसी अवधि में मात्र लगभग ₹3.10 लाख करोड़ की राशि वसूली हो सकी है। यह आंकड़ा देश की बैंकिंग व्यवस्था और सरकार की आर्थिक नीतियों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। एक तरफ किसान, युवा, छोटे व्यापारी और मध्यम वर्ग कुछ हजार या लाख रुपये के ऋण के लिए बैंक नोटिस, कुर्की और कानूनी कार्रवाई का सामना करते हैं, वहीं दूसरी ओर बड़े कॉरपोरेट घरानों के लाखों करोड़ रुपये के ऋण बट्टे खाते में डाल दिए जाते हैं |
सरकार ने सदन में यह भी स्वीकार किया है कि 31 मार्च 2026 तक ₹100 करोड़ या उससे अधिक के बट्टे खाते वाले 1,249 बड़े उधारकर्ता हैं, जिनसे संबंधित कुल राशि ₹4.19 लाख करोड़ है। इसके बावजूद सरकार इन उधारकर्ताओं और कंपनियों के नाम सार्वजनिक करने को तैयार नहीं है |
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन बैंकों में देश की जनता अपनी मेहनत की कमाई जमा करती है, उन्हीं बैंकों के हजारों करोड़ रुपये डूबने के बावजूद सरकार पारदर्शिता बरतने को तैयार नहीं है। सरकार ने संसद में स्पष्ट रूप से इन कंपनियों के नाम बताने से इनकार कर दिया और गोपनीयता का हवाला देकर मामले को छिपाने का प्रयास किया।
यदि कोई किसान फसल खराब होने पर अपना ऋण नहीं चुका पाता तो उसे डिफॉल्टर घोषित कर दिया जाता है, लेकिन हजारों करोड़ रुपये के कॉरपोरेट ऋणों के मामले में सरकार और बैंक नरम रुख अपनाते दिखाई देते हैं। यह आर्थिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के विपरीत है ।
देश की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि आखिर किन बड़े उद्योगपतियों और कंपनियों के लाखों करोड़ रुपये बैंकों के बट्टे खाते में डाले गए हैं।
मेरा सरकार से प्रश्न है कि जब किसानों, युवाओं और आम नागरिकों के मामलों में पूरी पारदर्शिता दिखाई जाती है तो बड़े कॉरपोरेट ऋणों के मामले में गोपनीयता का पर्दा क्यों डाला जा रहा है?
#ParliamentSession #MPNagaur #RLP
ये जो डरपोक प्रधानमंत्री पुलिस के द्वारा स्टूडेंट को मरवा रहा है, यदि भीड़ के द्वारा वापसी कार्रवाई की गई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा ?
-Gulzaar chhaniwala
ये जो डरपोक प्रधानमंत्री पुलिस के द्वारा स्टूडेंट को मरवा रहा है, यदि भीड़ के द्वारा वापसी कार्रवाई की गई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा ?
-Gulzaar chhaniwala