मस्त Music सुनो, कम से कम 1 घंटा पूरी एकाग्रता के साथ। दिमाग़ 99% लोगों से अलग तरीके से काम करने लगेगा।
कम से कम 90 दिन practice करके देख लो, ठाकुर।
लेकिन इसे सिर्फ सुनना नहीं है—हर एक rhythm को ध्यान से observe करना है।
जब तुम हर beat और rhythm को consciously महसूस करने लगोगे, तब concentration और focus में फर्क महसूस हो सकता है।
— जय केदार 🎧🧠🔥
दिव्या मित्तल ने #IAS की नौकरी से त्यागपत्र के बाद अब राजनीति करना ही तय किया है। यही प्रत्याशित भी था। दिव्या ने भाषण अच्छा दिया है। दिव्या प्रतिभाशाली हैं। सर्वगुणसम्पन्न हैं और साधन सम्पन्न भी। कह रही हैं कि, किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ेंगी, यह कहने से बचना था। राजनीतिक दल से लड़ीं तो पहले ही विश्वास कम हो जाएगा। बाकी दिव्या मित्तल को शुभकामनाएँ
जब हिंदू धर्म और देवी देवताओं को गालियां दी जाती हैं, तब हिंदू एकता कमज़ोर नहीं होती?
जब हर सरकारी नीति से सामान्य वर्ग को बाहर कर दिया जाता है, तब हिंदू एकता कमज़ोर नहीं होती?
जब ब्राह्मण बनिया भारत छोड़ो के नारे लगते हैं, तब हिंदू एकता कमज़ोर नहीं होती?
लेकिन जैसे ही सामान्य वर्ग के लोग इन सबके खिलाफ आवाज़ उठाएं, तो हिंदू एकता कमज़ोर पड़ने लगती है?
तो ये कैसी हिंदू एकता जिसका मतलब है कि सामान्य वर्ग खुदपर अत्याचार सहे, देवी देवताओं पर गलत टिप्पणियां सहे और कभी भी आवाज़ ना उठाये?
इस एकता की ज़िम्मेदारी सिर्फ सामान्य वर्ग के ऊपर ही है क्या,,,उनके ऊपर नहीं जो दिनरात जातिवादी नीतियों की मांग करते हैं, आरक्षण 70-80% की मांग करते हैं, सवर्णों को अपशब्द कहते हैं?
यह एक्सप्लेनर वीडियो खूब चर्चित हो रहा है, क्यूंकि लाग लपेट छोड़कर यह वीडियो तथ्यात्मक और सिलसिलेवार तरीके से बतलाता है कि कैसे एससी एसटी एट्रोसिटी एक्ट भाजपा और मोदी का शाह-बानो मोमेंट है। इसे स्वीकारने में समर्थकों को तकलीफ़ ज़रूर होगी, परंतु आँखें बंद कर लेने से सूरज अस्त नहीं होता।
Video of the day for me
What a Perfect reply 👏 👌
By none other than @AnupamPKher Sir ji ..
Its Must watch for all
Don't miss this one..
Worth your 10 odd mins trust me
24 सितंबर को लेकर सवर्ण समाज से अपील
24 सितंबर को लेकर मैं सामान्य वर्ग के लोगों से एक महत्वपूर्ण अपील करना चाहता हूं। 24 सितंबर को चंद्रशेखर रावण शक्ति प्रदर्शन के लिए आ रहे हैं। मुझे आशंका है कि वे सवर्ण समाज के लोगों से टकराव चाहते हैं। पिछली बार के आंदोलन में 14 लोगों की हत्या हुई थी। इस बार भी यदि दिल्ली में सवर्ण समाज के लोग वहां आते हैं, तो टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।
आप लोग बिना तैयारी के वहां जाएंगे और पुलिस भी आपको सुरक्षा नहीं देगी। यदि पुलिस को आवश्यकता पड़ी, तो वह गोली चलाने से भी पीछे नहीं हटेगी।
इसलिए 24 सितंबर के आसपास यदि कोई रैली या प्रदर्शन करने की योजना बना रहा है, तो उस विचार को अभी त्याग देना चाहिए।
हमें किसी के उकसावे में नहीं आना है। सामान्य वर्ग और ओबीसी समाज के लोग, तथा SC/ST एक्ट, यूजीसी की नीतियों और आरक्षण व्यवस्था से प्रभावित लोग, सभी से मेरा विनम्र निवेदन है कि 24 सितंबर को चंद्रशेखर रावण और भीम आर्मी जो करना चाहते हैं, उन्हें करने दीजिए।
वे जंतर-मंतर आएं या पूरी दिल्ली में प्रदर्शन करें, लेकिन हमें उनका सामना नहीं करना है। उनके आसपास बिल्कुल नहीं जाना है। उनके एक, दो या पांच किलोमीटर के दायरे में भी नहीं दिखना है।
उन्हें सरकार के साथ अपनी लड़ाई लड़ने दीजिए। हमें इसमें नहीं पड़ना है। सरकार भी चाहती है कि लोग हिंसा करें और फिर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा सके। यदि किसी व्यक्ति का चेहरा हिंसा में दिखाई दे गया, तो उसका भविष्य बर्बाद हो सकता है।
सरकार अपने आपको बचाने के लिए अलग-अलग लोगों को सामने लाती है और फिर अपनी कार्रवाई को सही ठहराने का प्रयास करती है। हमें ऐसी किसी भी योजना का हिस्सा नहीं बनना है।
हमारे लिए हिंसा से बचना जरूरी है:
मैं बार-बार कह रहा हूँ कि हिंसा मत कीजिए। 24 सितंबर को शक्ति प्रदर्शन मत कीजिए। इसके बाद तीन-चार दिन या सात दिन तक भी ऐसे किसी कार्यक्रम से दूर रहिए। यदि शक्ति प्रदर्शन करना है, तो अक्टूबर या नवंबर में कर सकते हैं। चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी जा सकती है।
हमें अभी सड़कों पर आने की कोई आवश्यकता नहीं है। हमें सड़कों पर जाकर किसी से पिटने या लड़ने की जरूरत नहीं है। यदि टकराव हुआ, तो आप पर मोदी एक्ट, NSA और अन्य गंभीर धाराएं लगाई जा सकती हैं। आपको लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है।
इसलिए 20 से 30 सितंबर के बीच सवर्ण समाज का कोई भी समूह उनके आसपास कहीं भी दिखाई न दे। उन्हें अपना प्रदर्शन करने दीजिए। यदि वे हंगामा करते हैं या तोड़फोड़ करते हैं, तो यह दिल्ली पुलिस, सरकार और उनके बीच का मामला है। हमें इसमें नहीं पड़ना है।
हमें अपना ध्यान उत्तर प्रदेश के चुनाव पर केंद्रित रखना है। हमें अपने तीन मूल एजेंडों पर ध्यान देना है:
1. यूजीसी से संबंधित नीतियां
2. एससी-एसटी एक्ट
3. आरक्षण सुधार (12 मांगें)
यही हमारे मूल मुद्दे हैं। हमें इन्हीं पर केंद्रित रहना है। हिंसा नहीं करनी है। हमें किसी के जाल में नहीं फंसना है और शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखनी है।
अजीत भारती अग्रिम जमानत याचिका रद्द!! स्वतंत्र भारद्वाज 14 दिन के न्यायिक हिरासत में!! फूफा ताली बजा रहें और सवर्ण थाली!! निशु आजाद के घर *नकली पत्थरबाजी*..संजय आजाद का खुला चैलेंज पर कार्यवाही निल बट्टे सन्नाटा!!
SC-ST के लिए गंभीर बीमारी पर आर्थिक सहायता, क्या यह सिर्फ मदद है या वोट बैंक की राजनीति का एक और मॉडल?
जाति देखकर मुआवज़े और योजनाओं का पैमाना क्यों बदलता है?
जो कल तक बीजेपी के साथ खड़े थे, आज वही “गद्दार” बताए जा रहे हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने सवाल पूछने की हिम्मत की।
राजनीति में वफ़ादारी विचारों से होती है या सत्ता के साथ खड़े रहने से?
(पूरी चर्चा देखें, भटके हुए युवा की 70वीं कड़ी में...)