@narendramodi झारखंड में भा जा पा सरकार के समय पंचायत स्वयं सेवकों की नियुक्ति की गई थी, पंचायत राज विभाग के अंतर्गत।
वेतन के नाम पर सिर्फ प्रोस्ताहन राशि पर काम किए
अब हमारी स्थिति अति दयनीय हो गई है, ।
देश के युवा धन का इस तरह दुरुपयोग मत किजिए।
झारखंड राज्य के “पंचायत स्वयं सेवक” अब बनेंगे “हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर” - साथ ही इन्हें अब “पंचायत सहायक” के नाम से जाना जाएगा
इन्हें शुभकामनाएँ 💐🙏🏽
कैबिनेट की मुहर लगने के बाद, पंचायतों को मिलेंगे नव मानवबल
१.पंचायत भवन में कार्य करेंगे- लोगों को योजनाओं की जानकारी तथा सहयोग देंगे
२.मुखिया और पंचायत सचिव के कार्य निष्पादन में सहयोग
३. कई सरकारी सुविधाएँ यथा पंजीकरण, दस्तावेज़ीकरण, डिजिटल करण, etc
४. सरकारी विभागों के बीच पंचायत स्तर पर समन्वय
५. क्षमता विकास कार्यक्रम में सहयोग
पंचायत विभाग के नयी योजनाओं तहत कार्य में तेज़ी से विस्तार हो रहा है - ऐसे में पंचायत सहायक सरकार के लक्ष्य को पूरा करने में सहयोग करेंगे
झारखंड के युवाओं के लिए यथाशीघ्र सही निर्णय लिया जाए और उनके हित में काम हो इसके लिए तैयार रहें |
ट्विटर(X) महाअभियान
तारीख : 29 फरवरी समय 10 AM से
Target :- 1 Million Tweets 🎯
दो हैशटैग 👇
#conduct_jssc_fair_exams#नौकरी_नही_तो_बदलेंगे_झारखण्ड_सरकार
#नौकरी_नही_तो_बदलेंगे_झारखण्ड_सरकार
झारखंड में पेट्रोल छोड़ कर सब खनिज पदार्थ हैं, फिर भी यहां उद्योग धंधे अस्त व्यस्त हैं, झारखंडी की स्थिति अन्य राज्यों के निवासियों से काफी निम्न स्तर की है।
“ Our agricultural lands have been occupied, houses burnt, we have to spend the night in the fields. We live in fear, our daughters, when they go to school, are not safe, police asks us to go and negotiate with “BHAIJAN” [aka Sheikh Siraj, brother of #SheikhShahjahan]. Didi sits in an AC room and thinks she can buy our silence with Rs 1000. We don’t want Laxmi Bhandar, we don’t want doles, we want justice.” In this is the situation, was West Bengal DG Rajeev Kumar on a picnic to #Sandeshkhali, did he have instructions to protect “BHAIJAN” as well? #SandeshkaliHorror
आभार रेणुका जी! मैं इसका क्रेडिट नहीं ले सकता क्योंकि कई बार लोगों को पता नहीं होता। एक बार कोई बात कर दे, तो सारे मिल कर स्वर उठाते हैं।
मैंने @smritiirani जी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस देखी और मुझसे यह सब सुन कर रहा नहीं गया। इसी कारण से मैंने अपने सारे ट्विटर के मित्रों से प्रार्थना की कि वो इस पर बोलें।
पुलिस और सत्ता दोनों के प्रपंच सामने आ गए। मेनस्ट्रीम मीडिया जो किसान आंदोलन के लाइव टेलिकास्ट की नौटंकी बार-बार दिखा रही थी, वो अब संदेशखाली पहुँच रही है। मेरा यही उद्देश्य था कि इस पर गहन चर्चा हो, और उसी टोन में हो जिसमें उनके साथ हुई नृशंसता के प्रति संवेदना दिखे।
इसी कारण हमें अपने एक-एक ट्वीट की शक्ति पहचाननी चाहिए।