क्या अब भीड़ ही सड़कों पर न्याय करेगी?
फिर न्यायालय और संविधान किस लिए है
यूपी के अलीगढ़ में क्षत्रिय करणी सेना के जिला अध्यक्ष सचिन राघव के साथ मारपीट की गई, जुलूस निकाला, कपड़े फाड़े 'जय भीम' के नारे लगवाए। और माफ़ी मंगवाई।
अलीगढ़ में करणी सेना जिला अध्यक्ष सचिन राघव की सड़क पर पिटाई की गई, कपड़े फाड़े गए, सड़क पर परेड निकाली गई!
"जय भीम" के नारे भी सुनाई पड़ रहे हैं!
मतलब अब यहाँ लड़का राजपूत है, और मारने वाले संवैधानिक शोषित, इसलिए कुछ नहीं होगा!
हां, अगर जाति उलट होती तो अबतक SC/ST एक्ट लग गया होता!
अब ऐसे ही सवर्णों के साथ खुलेआम सामाजिक न्याय हो रहा है! हिंदू एकता बन रही है!
और हां,
Before I forget,
Happy Birthday to Priest King 💐💐
अलीगढ़ में कुछ गुंडे हमारे भाई सचिन राघव को स��़क पर “जय भीम”के नारों के साथ पिटाई करते हुए ले जा रहे थे ? क्या ऐसे असामाजिक तत्व गुंडों पर कार्रवाई करेगी पुलिस, या फिर हम...
@aligarhpolice
सवर्ण उत्पीड़न चरम पर……
करणी सेना के जिलाध्यक्ष सचिन राघव को बेल्ट से बेरहमी से मारते हुए, बीच सड़क में खुलेआम वीडियो रिकॉर्डिंग करते ले जाती जातंकवादियों की भीड़। ये कहीं से शोषित-पीड़ित-वंचित दिख रहे हैं आपको?
एक व्यक्ति की खुलेआम लिंचिग की कोशिश की गई और इस पर पूरी तरह से चुप है मीडिया, खामोश हैं नेता।
मामला UP के अलीगढ़ का।
यूपी अलीगढ़ में युवा क्षत्रिय करणी सेना के जिलाध्यक्ष सचिन राघव की सरेराह सड़क पर पिटाई की गई।
करीब 100 लोगों की भीड़ ने सड़क पर उनका जुलूस निकाला। उन्हें थप्पड़ मारे और बेल्ट से पीटा, आरोप है कि उनसे जबरन "जय भीम" के नारे भी लगवाए है।
अलीगढ़ का यह 15 सेकंड का वीडियो बेहद भयावह और चिंताजनक है।
वीडियो में करणी सेना के जिला अध्यक्ष सचिन राघव को सड़क पर भीड़ द्वारा पीटते, थप्पड़ मारते, बेल्ट से पिटाई करते और घसीटते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में ‘जय भीम’ के नारे भी सुनाई दे रहे हैं।
घंटाघर के पास चाट खाने के दौरान करीब 50 युवकों ने उन पर हमला किया और उन्हें अम्बेडकर पार्क तक घसीट कर ले गए उनसे जय भीम और अंबेडकर के सम्मान में नारे लगवाये गये। उनके भाई और एक साथी बचाने आए तो उन्हें भी पीटा गया।
इस तरह की घटना को देख कर किसको गुस्सा नहीं आयेगा।गुस्सा आना स्वाभाविक है। उसी गुस्से में अगर कोई व्यक्ति क्रिया की प्रतिक्रिया में अपशब्द बोल दे, तो उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होकर जेल भेज दिया जाता है।चूंकि गुस्सा में तो अपशब्द ही निकलता है, राम राम तो निकलेगा नहीं।
आज अजीत भारती का उदाहरण सामने है।उनकी टिप्पणी उकसावे के जवाब में थी, जाति के आधार पर अपमान करने का इरादा नहीं था।
फिर क्या! झेल रहे हैं एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा।ट्रायल कोर्ट से राहत नहीं मिली, मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया, अगर यहाँ से भी राहत नहीं मिलेगी तो सुप्रीम कोर्ट तक भी जा सकता है।
इस मामले में अब आगे क्या होगा? बहुत होगा तो गाली-गलौज मारपीट का मुकदमा दर्ज हो जाएगा, जिसमें आसानी से जमानत मिल जाएगी। क्योंकि ये तो हैं सवर्ण समाज से है, इनके संरक्षण लिए तो कोई कानून बना नहीं है।
तमाशा देखिए मोदी जी ….
आज अजीत भारती कल कोई और होगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद में अध्यादेश लाकर पलटने का ही यह नतीजा है कि आज इस काले कानून का इस्तेमाल राजनीतिक बदले और आम नागरिकों को दबाने के लिए धड़ल्ले से हो रहा है।
जब बहन-बेटियों पर घटिया टीका-टिप्पणी का विरोध करने पर भी उल्टा पीड़ित पर ही यह कानून थोप दिया जाए, तो साफ हो जाता है कि स��्ता में बैठे आकाओं को सिर्फ अपने नीले वोट बैंक की चिंता है।
I stand with Ajeet Bharti.
@ajeetbharti
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