हे दुनिया वालो ऐसा ज्ञान ऐसा प्रमाण फिर ना मानो तो अाप की गलती! जैसे -
मोती मुक्ता दर्शत नाही ये जग ऐसा अंध रे !
देखत के दो नैन जिस्म है फिरा मोतिया बिन्दु रे !!
जब राधास्वामी वाले स्वंय स्वीकार करते कि शिवदयाल जी बुक्की मे बोलते है तो उनके अगुवा की जब यहॉ हाल है कि भूत योनि मिली ऐसी साधना से, तो चेलो का क्या हाल होगा - -
गुरू के बिन कोई न होम ,न यज्ञ करना चाहिए क्योकि गुरू समर्थ होता है सभी कार्यो मे गुरू की आज्ञा होनी चाहिए !
शिवदयाल जी कोई गुरू नही था उन्हो ने मनमाना आचरण किया जिससे उन्हे भूत की योनी मिली !
सच्चा सुख परमपिता परमेश्वर के चरणो मे मिलता है अर्थात मूल की पूजा करनी चाहिए इसलिए कबीर साहेब कहते है - -
कर्म भरम भारी लगे संसा सूल बाबूल
डाली पानी डोलत परसत नाही मूल. !!
बिना ज्ञान के बुराई पर हम विजय नही पा सकते है !
जब हमे ऊँच नीच का या लाभ हानि का ज्ञान होगा तब हम गलती नही करेगे और अधिक जानकारी के लिए जगत गुरू रामपाल जी महराज का सत्संग सुने
साधना चैनल पर शाम को ७:३०-८:३० तक !
गीता जी अध्याय 18 ,श्लोक62मे भगवान कहते है कि उस परम पिता शारण मे जा जहॉ जाने से तुझे सतलोक
मिलेगा !
जहॉ पर दिवाली और होली रोज हुआ करती है ! यहॉ पर काल जाल है ! भकि्त करके सतलोक चलो जहॉ पर होली दिवाली रोज हुआ करती है !