यमुना जल समझौते को लेकर राज्य सरकार ने आज हरियाणा के साथ नया MOA किया है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। राजस्थान की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके हितों से जुड़े इस समझौते में किन शर्तों पर सहमति बनी है।
करीब ढाई वर्ष पूर्व (17 फरवरी 2024) किए गए MoU को भी लोकसभा चुनावों तक छिपाकर रखा गया था। बाद में सामने आया कि उसमें पहले हरियाणा को 24,000 क्यूसेक पानी देने और शेष पानी राजस्थान को मिलने की शर्त थी।
यदि नए MOA में भी ऐसा है, तो यह 1994 के मूल समझौते की भावना के विपरीत है, जिसमें स्पष्ट प्रावधान है कि यमुना जल का वितरण सभी राज्यों को 'Pro Rata Basis' (उपलब्ध जल के अनुपात) में होगा। किसी एक राज्य को प्राथमिकता या एकतरफा अधिकार नहीं है।
मेरी मांग है कि आज हस्ताक्षरित नए MOA की प्रति तत्काल सार्वजनिक की जाए। जनता से ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ छिपाना लोकतांत्रिक पारदर्शिता के विरुद्ध है। राजस्थान के हित सर्वोपरि हैं और हमारे जल अधिकारों से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
करौली जिले के टोडाभीम थाना क्षेत्र के 11 केवी के टूटे हुए तार में उलझ कर गिरने के बाद करंट की चपेट में आने से 3 लोगों के जिंदा जल जाने की खबर बेहद हृदयविदारक है।
इस घटना की पूरी जांच की जानी चाहिए एवं जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जिनकी लापरवाही के कारण इन निर्दोष लोगों की जान गई। शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।
जयपुर के चंदवाजी थाना क्षेत्र में निर्माणधीन इमारत की दीवार गिरने से 3 श्रमिकों की मृत्यु अत्यंत दुखद है।
मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं, ईश्वर उन्हें इस कठिन समय में संबल दें एवं दिवंगतों की आत्मा को शांति प्रदान करें। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष परम आदरणीय श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी लगभग 50 बरसों से देश की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने एक आम कार्यकर्ता के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और आज पार्टी के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी संभालते हुए, कांग्रेस की विचारधारा और देश के लोकतंत्र को मजबूत करने में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। उनका दशकों पुराना अनुभव, उनकी दूरदर्शिता और बेमिसाल जीवटता हम सब के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
आदरणीय श्री खरगे जी ने आज एक बार फिर से राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली है। उन्हें हार्दिक बधाई एवं बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
@kharge
मोदी सरकार में भ्रष्टाचार के नए मॉडल और 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) का एक और बड़ा उदाहरण देश के सामने आया है जिसमें केन्द्रीय मंत्री और केन्द्र सरकार में पदस्थ IAS अधिकारी पर आरोप लग रहे हैं।
जब देश के कृषि राज्य मंत्री ही अपने मंत्रालय की योजना से अपने खेत के लिए करीब एक करोड़ रुपये की सब्सिडी मंजूर करवा ले, तो इसे आप क्या कहेंगे? एक तरफ आम किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर थक जाता है, और दूसरी तरफ भाजपा के मंत्रियों और चहेते अफसरों के परिवारों पर करोड़ों की सरकारी मेहरबानी हो रही है।
चाहे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से जुड़े मामले हों या केंद्रीय मंत्रियों के ये कारनामे, भ्रष्टाचार के इन नए और संस्थागत तरीकों पर प्रधानमंत्री जी की 'रहस्यमयी चुप्पी' आखिर क्या दर्शाती है?
"ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा" का नारा देने वाले आज अपने ही मंत्रियों के इस खुले 'कदाचार' पर मौन क्यों हैं? देश की जनता इस दोहरे मापदंड को देख रही है।
मोदी सरकार में भ्रष्टाचार के नए मॉडल और 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) का एक और बड़ा उदाहरण देश के सामने आया है जिसमें केन्द्रीय मंत्री और केन्द्र सरकार में पदस्थ IAS अधिकारी पर आरोप लग रहे हैं।
जब देश के कृषि राज्य मंत्री ही अपने मंत्रालय की योजना से अपने खेत के लिए करीब एक करोड़ रुपये की सब्सिडी मंजूर करवा ले, तो इसे आप क्या कहेंगे? एक तरफ आम किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर थक जाता है, और दूसरी तरफ भाजपा के मंत्रियों और चहेते अफसरों के परिवारों पर करोड़ों की सरकारी मेहरबानी हो रही है।
चाहे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से जुड़े मामले हों या केंद्रीय मंत्रियों के ये कारनामे, भ्रष्टाचार के इन नए और संस्थागत तरीकों पर प्रधानमंत्री जी की 'रहस्यमयी चुप्पी' आखिर क्या दर्शाती है?
"ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा" का नारा देने वाले आज अपने ही मंत्रियों के इस खुले 'कदाचार' पर मौन क्यों हैं? देश की जनता इस दोहरे मापदंड को देख रही है।
उदयपुर के कन्हैयालाल जी की नृशंस हत्या को 4 वर्ष होने जा रहे हैं, लेकिन भाजपा की "डबल इंजन" सरकार में न्याय की उम्मीद आज भी अधूरी है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है क्योंकि अपराधी भाजपा के कार्यकर्ता थे।
जांच NIA के पास है, सुनवाई NIA की विशेष अदालत में चल रही है और केंद्र-राज्य दोनों जगह भाजपा सरकारें हैं। फिर भी 180 में से मात्र 21 लोगों की गवाही हो पाई है। चुनाव जीतने के लिए "5 लाख बनाम 50 लाख" का झूठ फैलाने वाली भाजपा की मंशा कभी न्याय दिलाने की थी ही नहीं।
राजनीतिक रोटियां सेकने के बाद अब पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह राजस्थान आकर कन्हैयालाल जी का नाम तक नहीं लेते, सजा की बात तो छोड़िए। प्रदेशवासी भाजपा के इस असली चरित्र को पहचानें, जिसने केवल आपकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है।
Heartiest congratulations to Shri B.V. Srinivas Ji on being appointed as the Chief Organiser of the Congress Seva Dal.
My best wishes to Shri Sanjay Dutt Ji (In-charge, Haryana), Shri Lalji Desai Ji (In-charge, Odisha), and Shri Rajendra Pal Gautam Ji (In-charge, Uttar Pradesh) on their new responsibilities as AICC In-charges.
I am confident that under your leadership and dedication, the party organization will be further strengthened in these states and across the nation.
Wish you all a successful tenure ahead.
@srinivasiyc@AdvRajendraPal@SanjaySDutt@LaljiDesaiG
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My best wishes to Shri Sanjay Dutt Ji (In-charge, Haryana), Shri Lalji Desai Ji (In-charge, Odisha), and Shri Rajendra Pal Gautam Ji (In-charge, Uttar Pradesh) on their new responsibilities as AICC In-charges.
I am confident that under your leadership and dedication, the party organization will be further strengthened in these states and across the nation.
Wish you all a successful tenure ahead.
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पत्रकार का सवाल: श्री राहुल गांधी जी के नेता प्रतिपक्ष के रूप में आज दो साल पूरे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने करीब 24 राज्यों का दौरा किया है, कई जनसभाएं की हैं और पार्टी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है। आप इन दो वर्षों के कार्यकाल को कैसे देखते हैं?
मेरा जवाब: इन दो सालों में राहुल गांधी जी ने देश की राजनीति पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है। जिस प्रकार उन्होंने सदन में अपनी शुरुआत की थी, तब आप सबने देखा होगा कि इतिहास में पहली बार खुद प्रधानमंत्री जी, गृह मंत्री जी और चार-पांच वरिष्ठ मंत्रियों को उनकी स्पीच के बीच में खड़े होकर अपनी बात कहनी पड़ी थी। वे लगातार किसानों, मजदूरों, गरीबों के हक और देश के समग्र विकास की बात कर रहे हैं। सरकार की जो भी नीतियां और कमियां होती हैं, उन्हें वे लगातार पुरजोर तरीके से उठाते रहते हैं।
राहुल जी देश की आवाज को सदन के अंदर भी और सदन के बाहर भी मजबूती से बुलंद कर रहे हैं। संसद के बाहर भी आप देखते हैं कि 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के लोग जनता के मुद्दों पर लगातार धरने और प्रदर्शन करते हैं। विपक्ष का असली दायित्व ही यही होता है कि देश और प्रदेश की आम जनता क्या सोच रही है, उनकी क्या भावनाएं हैं, विपक्ष सत्ता पक्ष के सामने उसका प्रतिनिधित्व (Represent) करे। राहुल गांधी जी इस जिम्मेदारी को निभाने में बेहद कामयाब रहे हैं। अभी हाल ही में नीट (NEET) परीक्षा के मुद्दे को लेकर भी उन्होंने पूरे देश में एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया है। इसलिए राहुल गांधी जी की परफॉर्मेंस को लेकर मैं यही कहना चाहूंगा कि उनका यह दो साल का कार्यकाल बेहद शानदार और ऐतिहासिक रहा है।
पत्रकार का सवाल: प्रधानमंत्री जी एक बार फिर राजस्थान के दौरे पर आ रहे हैं, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
मेरा जवाब: मैंने आज ही अखबारों में पढ़ा कि वे इस बार बाड़मेर रिफाइनरी के भीतर ही बैठक करेंगे और पहले की तरह कोई बड़ी आम सभा नहीं करेंगे। मेरा मानना है कि उन्हें बाकायदा एक बड़ी आम सभा करनी चाहिए, क्योंकि यह राजस्थान के विकास से जुड़ा एक बहुत बड़ा काम हुआ है। जब वहां तेल निकल गया था, तब हमने केंद्र सरकार से बहुत अनुनय-विनय की और सालों तक लगातार प्रयास किए। आदरणीय डॉ. मनमोहन सिंह जी और श्रीमती सोनिया गांधी जी ने एचपीसीएल (HPCL) से बात करके राजस्थान सरकार के साथ मिलकर इस रिफाइनरी कंपनी का गठन करवाया था। एचपीसीएल और राजस्थान सरकार की सहभागिता से बनी यह एक साझा कंपनी है।
अब यह प्रधानमंत्री जी के ऊपर है कि वे इसका उद्घाटन किस प्रकार करते हैं। लेकिन मैं आज फिर एक सवाल बार-बार पूछता हूं कि आखिर भाजपा ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान इस रिफाइनरी के काम को पांच साल तक क्यों रोके रखा? इसका जवाब खुद प्रधानमंत्री जी और एनडीए सरकार को देना चाहिए। उन पांच सालों में काम रोकने की वजह से जो आर्थिक बर्बादी हुई, जिसके कारण यह ₹37,000 करोड़ का रिफाइनरी प्रोजेक्ट आज बढ़कर ₹80,000 करोड़ से अधिक का हो गया है, इसका जवाब जनता को आज तक नहीं मिला है।
पत्रकार का सवाल: डॉ. किरोड़ी लाल मीणा द्वारा लगातार जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
मेरा जवाब: देखिए, इस विषय पर मैं पहले भी अपने 'एक्स' (पहले ट्विटर) हैंडल के माध्यम से स्पष्ट कह चुका हूं। किरोड़ी लाल मीणा जी उस पार्टी के एक बहुत सीनियर नेता हैं और आरएसएस (RSS) कैडर से भी आते हैं। उन्होंने कई बार अपनी पार्टी छोड़ी और वापस जॉइन की, वह उनका व्यक्तिगत निर्णय है; लेकिन वे सरकार बनने के पहले से ही हर किसी पर बेबुनियाद आरोप लगाते आ रहे हैं। जब मैंने उनसे कहा कि यदि आपके पास कोई प्रमाण हैं तो तथ्य प्रस्तुत कीजिए, तो उनका तर्क बड़ा ही बेतुका और अजीब आया कि 'तथ्यों की जरूरत ही क्या है?' अब भला आप खुद सोचिए, यदि आप किसी पर कोई आरोप लगाते हैं, तो आपको बताना पड़ेगा कि यह आरोप किस आधार पर है और इसके पीछे क्या फैक्ट्स एंड फिगर्स (तथ्य और आंकड़े) हैं। वे कोई तथ्य नहीं बताएंगे।
गोविंद सिंह डोटासरा जी हमारी पार्टी के सम्मानित प्रदेश अध्यक्ष हैं, राज्य के मंत्री रहे हैं। उन्हें इस प्रकार बिना किसी आधार के घेरना अपने आप में एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है। डोटासरा जी के बहाने पूरी कांग्रेस पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने का यह भाजपा का एक सुनियोजित षड्यंत्र है, और ऐसा लगता है कि इनके दिल्ली बैठे हाईकमान से लेकर नीचे तक के सभी नेताओं ने मिलकर यह तय कर रखा है। इन्हें समझना होगा कि पूरे उत्तर भारत के अंदर कांग्रेस का सबसे मजबूत और सक्रिय संगठन आज राजस्थान में है। आज भी राजस्थान के गांव-गांव और गली-गली में लोग कांग्रेस को याद करते हैं और हमारी जनकल्याणकारी योजनाओं की सराहना करते हैं।
बाकी, लोग इस वर्तमान सरकार के बारे में क्या टिप्पणियां कर रहे हैं, यह मैं आप मीडिया के साथियों पर ही छोड़ता हूं। मैंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में आज तक ऐसा कभी नहीं देखा, जहां इतने कम समय के भीतर ही सरकार के कुप्रबंधन, ठप पड़े विकास कार्यों और बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर आम जनता का गुस्सा इस कदर फूट पड़ा हो। अस्पताल की बिल्डिंगें खड़ी हैं, लेकिन न वहां डॉक्टर हैं और न ही जरूरी उपकरण। ऐसा कुशासन राजस्थान में पहले कभी नहीं देखा गया, जो आज धरातल पर चल रहा है।
पत्रकार का सवाल: सर, कल दिल्ली में 10 जनपथ पर जो आपकी मुलाकात हुई थी, क्या वह राजस्थान कांग्रेस के संगठन से जुड़े मुद्दों को लेकर थी? उस यात्रा के क्या मायने हैं?
मेरा जवाब: 10 जनपथ की उस बैठक के भीतर मीडिया के साथियों को कोई बहुत बड़ा राजनीतिक गुणा-भाग या नया राजनीतिक परिदृश्य ढूंढने की आवश्यकता नहीं है। दरअसल, 'राजीव गांधी नेशनल रिलीफ एंड वेलफेयर सोसाइटी' का जो ट्रस्ट बना हुआ है, कल उसकी एक नियमित बैठक थी जिसमें सभी ट्रस्टियों को आमंत्रित किया गया था। यह पूरी तरह से एक गैर-राजनीतिक और संस्थागत बैठक थी, इसलिए इसे किसी राजनीतिक कयासबाजी से जोड़कर देखने की कोई जरूरत नहीं है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आज दो साल पूरे हुए।
इन दो सालों का हर दिन एक ही काम रहा - हर भारतीय की आवाज़ को सत्ता तक पहुँचाना।
NEET के छात्रों की लड़ाई हो, वोट चोरी का पर्दाफाश हो या संविधान की रक्षा, हर मोर्चे पर आपके साथ खड़ा रहा, आज भी हूं, हमेशा रहूंगा।
सड़क से संसद तक, आपका भरोसा ही मेरी सबसे बड़ी ताक़त है। सफ़र लंबा है, पर संकल्प वही, आपके लिए हर लड़ाई लड़ता रहूँगा।
जय हिंद। जय संविधान। 🇮🇳
विस्तार में पढ़ें: https://t.co/vyj9WhFIhO
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजस्थान में विकास ठप है और ठेकेदारों को अपने ही भुगतान के लिए अखबारों में विज्ञापन देने पड़ रहे हैं। प्रदेश के इतिहास में ऐसा वित्तीय कुप्रबंधन पहले कभी नहीं देखा गया।
भुगतान अटकने से सड़कों और पेयजल जैसी जरूरी योजनाएं अधर में हैं और हजारों श्रमिकों की आजीविका पर संकट है। मुख्यमंत्री जी तुरंत संज्ञान लें और लंबित भुगतान सुनिश्चित करें ताकि प्रदेश का विकास न रुके।
@RajCMO
प्रदेश की भाजपा सरकार ने 'राइजिंग राजस्थान' के नाम पर सिर्फ इवेंटबाजी की। यहां तक कि गृह मंत्री श्री अमित शाह से भी बड़े-बड़े दावे करवाए गए, लेकिन हकीकत यह है कि 83% निवेश परियोजनाएं आज भी लंबित हैं और कई एमओयू रद्द होने की कगार पर हैं।
सरकार का आधा कार्यकाल बीतने को है, लेकिन धरातल पर काम कोसों दूर है। हमारी मांग है कि राज्य सरकार 'राइजिंग राजस्थान' की वास्तविक स्थिति पर तुरंत 'श्वेत पत्र' (White Paper) जारी करे और प्रदेशवासियों को सच बताए कि क्या 20% एमओयू भी पूरे होने की स्थिति में हैं?
जयपुर के सबसे बड़े SMS अस्पताल से आई यह खबर बेहद विचलित करने वाली और दुर्भाग्यपूर्ण है। नेफ्रोलॉजी यूनिट के हेड के रिटायर होने के बाद एक महीने से कमरे पर ताला लटका है, जिसके कारण किडनी ट्रांसप्लांट की 11 मरीजों की फाइलें अंदर कैद हैं।
मरीज जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं, डायलिसिस के कारण उनका वजन लगातार घट रहा है, लेकिन संवेदनहीन अस्पताल प्रशासन एक ताला तक नहीं खोल पा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं को इस तरह लावारिस छोड़ना मरीजों के जीवन के साथ सरेआम खिलवाड़ है।
मेरी मुख्यमंत्री जी और स्वास्थ्य मंत्री जी से मांग है कि इस मामले में तुरंत दखल देकर ताला खुलवाया जाए, फाइलों को मुक्त कर मरीजों का ट्रांसप्लांट सुनिश्चित किया जाए और इस घोर लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। SMS के प्रिंसिपल को अविलंब इस विषय को देखना चाहिए। मरीजों का एक-एक दिन कीमती है!
@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar
मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp ने सरकार बनते ही घोषणा की थी कि वे लाल बत्ती पर रुकेंगे और उनके लिए रूट लाइनिंग लगाकर ट्रैफिक को बाधित नहीं किया जाएगा, परन्तु यह घोषणा हवा-हवाई साबित हुई। हालांकि, मैंने तब भी इस घोषणा का समर्थन नहीं किया था क्योंकि सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह उचित नहीं था। कुछ दिनों पहले पेट्रोल-डीजल के संकट को देखते हुए उन्होंने अपने काफिले में भारी कटौती की घोषणा भी की थी, परन्तु वह भी लागू नहीं हुई।
इसके विपरीत, मुख्यमंत्री के काफिले को निकालने के लिए जगतपुरा के रामनगरिया में स्टॉल लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाली युवती सुश्री रेशु गुप्ता के ऊपर पुलिसकर्मियों द्वारा धक्का दिए जाने से गर्म पानी गिर गया, जो कि अत्यंत दुखद और निंदनीय है। सरकार के लिए शर्मनाक स्थिति यह है कि सीधे मुख्यमंत्री से जुड़ा मामला होने के बावजूद अब तक सरकार ने पीड़िता की कोई मदद नहीं की है। उल्टे, पुलिस-प्रशासन पीड़िता पर इस मामले को दबाने का दबाव डाल रहा है। मैं सरकार एवं प्रशासन के इस अमानवीय व्यवहार की कड़ी निंदा करता हूं।
यदि इस सरकार में लेशमात्र भी संवेदनशीलता बची है, तो कोविड में पिता के निधन के बाद परिवार के भरण-पोषण के लिए उत्तर प्रदेश से राजस्थान आई इस युवती और उसके परिवार की अविलंब सहायता की जाए, पीड़िता का अच्छे से अच्छा इलाज करवाया जाए और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
राजस्थान समेत बीजेपी शासित अन्य राज्यों में हाहाकार मचा हुआ है :
चारों ओर हाहाकार मचा हुआ है। बीजेपी के राज्यों में जहां-जहां सरकारें इनकी है हाहाकार मचा हुआ है। ऐसी लूट कभी आज तक कभी सुनी नहीं, देखी नहीं और समझी नहीं है। हालात बड़े गंभीर हैं। एक के बाद एक घोटाले खुल रहे हैं जिसमें आपके मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम भी आया है। जवाब इनके पास कुछ नहीं है, या तो चुप रहते हैं, प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। देते हैं तो खाली फॉर्मेलिटी करते हैं।
इसलिए मैंने कहा राजस्थान में भी करप्शन की हदें खत्म हो गई हैं। गाँव से लगा कर के जयपुर तक लोग दुखी हैं। मर्डर, रेप, डकैतियां अलग हो रही हैं, तो कहाँ जाए आदमी । मुख्यमंत्री खुद को समझ लेना चाहिए हालात क्या हैं और उसे ठीक करने का प्रयास करना चाहिए।
मॉरली हम उनको सपोर्ट करेंगे। हमारी कोई दुश्मनी नहीं है मुख्यमंत्री से। हम मॉरली सपोर्ट करेंगे, विपक्ष का सहयोग लें, पर स्थिति बहुत नाजुक है, उनके हाथ से निकलती जा रही है।
सत्ता के अहंकार में डूबी मोदी सरकार अब इस मुकाम पर पहुँच गई है कि अपने अधिकारों, निष्पक्ष परीक्षाओं और सुरक्षित भविष्य की मांग करने वाले छात्रों को ही शिक्षा मंत्री “आतंकवादी” कह रहे हैं।
ज़रा सोचिए - जिसकी नाकामी से इतने पेपर लीक हुए, जिसके राज में 20 बच्चों ने जान दे दी, जिसने करोड़ों युवाओं का भविष्य अंधेरे में धकेल दिया - वो आज पीड़ित बच्चों और उनकी आवाज़ उठाने वालों को “दहशतगर्द” बता रहा है।
पर यह कोई नई बात नहीं: अन्नदाता किसानों को "आंदोलनजीवी और परजीवी" कहा। सवाल पूछने वाले को “Anti-National” कहा। और अब युवाओं को “दहशतगर्द।”
जो भी सरकार से सवाल पूछे - उसे देशद्रोही बता दो, यही इनकी पूरी राजनीति है।
धर्मेंद्र प्रधान जी, देश के करोड़ों युवाओं से तुरंत माफ़ी माँगिए और अपनी नाकामियों के लिए इस्तीफ़ा दीजिए।
और रही मेरी बात - आप मुझ पर जितने चाहें हमले कर लीजिए। मैंने कोटा में कहा था, और फिर कहता हूँ: यह शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है। मैं इसे ऐसे ही नहीं रहने दूँगा।
हर बच्चे को सस्ती, अच्छी शिक्षा और निष्पक्ष परीक्षा मिले - इस आवाज़ को उठाना मैं कभी बंद नहीं करूँगा।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo
पचपदरा रिफाइनरी के काम को 5 साल क्यों रोक कर रखा इसका जवाब दें प्रधानमंत्री:
डॉक्टर मनमोहन सिंह जी प्राइम मिनिस्टर थे, वीरप्पा मोइली जी पेट्रोलियम मिनिस्टर,थे तब हमने उनसे रिक्वेस्ट करके रिफाइनरी सैंक्शन करवाई थी। काम शुरू करवा दिया, फिर बाद में 5 साल रोक के रखा है उसका जवाब प्रधानमंत्री जी को देना चाहिए, और जब वो यहाँ रहे हैं तो जवाब दें कि 5 साल क्यों काम रोका? उसके कारण 37 हजार करोड़ की रिफाइनरी 80 हजार करोड़ की बन गई है, इस देरी का ब्लेम किसके ऊपर आएगा? ये उनको सोचने की बात है।
राजस्थान में राज RSS वाले कर रहे, ये खाली मुखौटे हैं
जोधपुर में आज मीडिया से बातचीत की:
अशोक गहलोत का जवाब: देखिए राजनीति में जो है, झूठे आरोप नहीं लगाए जाते हैं। अगर आपके पास तथ्य है, तो उस पर बात करो। किरोड़ी मीणा जी जब सरकार में नहीं थे, तब भी वो लगातार आरोप लगाते थे। उनकी जो प्रकृति में है कि वो, आंदोलन करते रहते हैं लगातार, आप देखते हो उनको 15-20 साल से। तो एक अलग किस्म का प्राणी हैं वो।
वो पहले भी आरोप लगाते थे अब भी लगा रहे हैं, अनावश्यक है। पार्टी के जो अध्यक्ष होते हैं उनकी एक अलग प्रतिष्ठा होती है। उस पे आप बार-बार चोट कर रहे हो। आरोप लगा रहे हो बिना तथ्यों के। तो आप बताइए कि पार्टी में रिएक्शन होगा? हमारी पार्टी में रिएक्शन है। डोटासरा जी को खुद को लगता है भाई ये क्या आरोप लगा रहा है वो भी बिना तथ्यों के। हम सब को लगता है। ये किरोड़ी मीणा जी को खुद को सोचना चाहिए, वो क्या किस प्रकार की उनकी अप्रोच है काम करने की है। छापे डाल रहे हैं और छापे के साथ जो जाते हैं लोग उनके, वसूली करते हैं वो। ये तो प्रूव हो गया है। जब प्रूव हो गया है तो कहते हैं कि एसीबी भी दबाव में काम कर रही है।
तो भाई एसीबी तो दबाव में जब से डीजी साहब आए हैं, पहले मैंने कहा ये आदमी तो भला है डीजी। वो पूरी तरह सीएमओ के और सीएम के दबाव में है ये। और इनके जो नीचे अधिकारी है, वो भी इनकी बात नहीं मानते हैं। वो इनको उल्टा दबाते हैं। तो मुझे लगता है कि एसीबी का जो डीजी है, वो खुद परेशान होगा, मेरे ख्याल से जहां तक मैं समझता हूँ या जहाँ तक मेरे पास वहां से रिपोर्ट आती है। वहाँ के जो काम करने वाले अधिकारी कहते हैं ना कि भाई क्या हो रहा है हमारे यहाँ? स्थिति एसीबी की बहुत भयानक खराब है। दबाव में काम हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जी को ऑबलाइज करने के लिए फैसले हो रहे हैं। आईओ कह रहा भाई ये मुल्जिम नहीं बनता हमारा। और ऊपर से कहते हैं डीजी साहब और जो दबाव आता है उनके ऊपर, नहीं आप इनको अरेस्ट करो। ऐसा मैंने आज तक कभी देखा नहीं। तीन-तीन बार हम भी मुख्यमंत्री रहे हैं। एसीबी में कोई पंचायत नहीं करनी चाहिए किसी को भी। यहाँ पंचायतें नहीं हो रही हैं। आईओ कह रहा भाई ये अरेस्ट नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें कोई केस नहीं बनता। आप इसको अरेस्ट कीजिए। अरेस्ट हुए भी हैं, जिनमें महेश जोशी भी हैं।
आईओ ने मना किया। वो ऑलरेडी द्वारा वैसे ही केस में अरेस्ट हो चुके थे। यहाँ वापस अरेस्ट कर लिया, क्या मजाक बना रखी है? क्या मुख्यमंत्री को दिखता नहीं है कि ये क्या हो रहा है? उनका खुद का नाम आता है कि दबाव आता है। शायद आरएसएस वालों का आता होगा। आरएसएस के दबाव होने के बाद में मुख्यमंत्री हथियार डाल देते हैं। राज आरएसएस कर रहा है ये तो मुखौटे हैं खाली। मुझे लगता है कि राजस्थान के अंदर आजकल जो ये लोग राज करते हैं ये मुखौटे बने हुए हैं। राज आरएसएस वाले कर रहे हैं। ट्रांसफर, पोस्टिंग, करप्शन सब वहीं से डायरेक्शन आते हैं। हालात बड़े गंभीर हैं राजस्थान के। ऐसी इनकी स्थिति बनेगी इस बार राजस्थान की, जनता जो है वो जागरूक है। ये कुछ भी कर लें, ये मुख्यमंत्री बदल देंगे ना, तब भी कुछ नहीं होने वाला है, अगली बार सरकार बदल के रहेगी। थैंक यू।