@SurajKrBauddh शस्त्रों का लाइसेंस या तो सभी को मिलना चाहिए या फिर किसी को नहीं मिलना चाहिए क्योंकि जिसके पास होता है वह दूसरों को डराने के काम में ही इसका उपयोग करता है। यहां समान रूप से कानून लागू नहीं है
@SushantBSinha भाई तुझे अकल बकल है कि नहीं बैंकर्स 10:30 बजे से 5:00 तक ही रहते हैं AC कमरों में बैठकर नौकरी करते हैं पुलिस और आर्मी वाले 24 घंटे ड्यूटी पर रहते हैं फिर भी उन्होंने छुट्टी की मांग नहीं की कोई भी विभाग के कर्मचारी यह अटपटी मांग नहीं कर रहे हफ्ते में 5 दिन नौकरी करें।
@tarunjatav50@grok मोबाइल के साथ एग्जाम हॉल में कैसे गया।क्या एग्जाम में मोबाइल ले जाना अलाउ था अगर नहीं था तो एग्जामिनर के साथ परीक्षा केंद्र अध्यक्ष दोषी है
@TheOfficialSBI यहां तो गजब ही चल रहा AC कमरों में बैठकर नौकरी करनी है और हफ्ते में 5 दिन लोग 8 10 घंटे काम कर रहे 8 ₹10000 में लेकिन ऐसी बेतुकी की मांग कोई भी विभाग के कर्मचारी नहीं कर रहे।
@RitikaChandola जब से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से पे आउट आने लगा है। तब से कोई कुछ भी बकने लगता है सभी प्रकार का पे आउट बंद होना चाहिए सोशल मीडिया पर बकने का चार्ज लगना चाहिए।
मध्यप्रदेश में युवाओं और कर्मचारियों के हिस्से में फिलहाल एक ही चीज दिखाई दे रही है—इंतजार। 27% ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले में 13% पदों का फैसला 5 अगस्त से हाईकोर्ट में रिजर्व है और 48 दिन बाद भी आदेश का इंतजार है। जानकारों के मुताबिक फैसला किसी भी पक्ष के लिए आने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना से मामला और लंबा खिंच सकता है।दूसरी तरफ कर्मचारियों का 100% वेतन का मामला भी अदालत में है। हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब पीएससी से चयनित कर्मचारियों को पूरा वेतन मिलता है तो ईएसबी से चयनित कर्मचारियों के साथ अलग व्यवहार क्यों? पूरा काम लिया जाता है तो पूरा वेतन क्यों नहीं लेकिन सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार का तर्क है कि 100% वेतन और पिछला एरियर देने से वित्तीय बोझ बढ़ेगा और प्रोबेशन में चरणबद्ध भुगतान सेवा नियमों के तहत है। विडंबना देखिए—भर्ती के लिए युवा सालों इंतजार करें, आरक्षण के 13% पद फैसले का इंतजार करें और नौकरी मिलने के बाद पूरा वेतन पाने के लिए कर्मचारी अदालत के फैसले का इंतजार करें। 2023 चुनाव के समय पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 100% वेतन का भरोसा दिया था, लेकिन उसे लागू करने की बारी आए तो वित्तीय बोझ सामने आ जाता है। सवाल किसी एक सरकार का नहीं, उस व्यवस्था का है जिसमें वादा पहले होता है और उसका हिसाब अदालत में बाद में। @INCIndia@INCMP@RahulGandhi@Pawankhera
तीन साल तक कर्मचारियों से 100% काम लिया गया, लेकिन वेतन में कटौती कर उनके आर्थिक अधिकारों पर चोट की गई। बताया जा रहा है कि इससे कर्मचारियों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ।
मेहनत का सम्मान कीजिए, कर्मचारियों का हक़ मत काटिए।
#मध्यप्रदेश_सौ_फीसदी_वेतन_दो#70_80_90_वेतन_नियम_रद्द_करो
सरकार कर्मचारियों से 100% काम लेती है, लेकिन प्रोबेशन में पूरा वेतन देने से पीछे हट रही है।
जब कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, तो उनके वेतन पर कटौती क्यों? मेहनत पूरी, तो वेतन भी पूरा होना चाहिए।
#मध्यप्रदेश_सौ_फीसदी_वेतन_दो#70_80_90_वेतन_नियम_रद्द_करो
2018 की भर्ती 4 साल बाद 2022 में पूरी हुई और फिर 4 साल बाद पहला इंक्रीमेंट लगा। इस तरह 8 साल लगे पहले इंक्रीमेंट तक पहुंचने में कर्मचारियों को। सरकार के फैसले को हाई कोर्ट दो बार रद्द कर चुका परंतु सरकार बार-बार कोर्ट जा रही।
@DrMohanYadav51@DainikBhaskar@GADdeptmp
2018 की भर्ती 4 साल बाद 2022 में पूरी हुई और फिर 4 साल बाद पहला इंक्रीमेंट लगा। इस तरह 8 साल लगे पहले इंक्रीमेंट तक पहुंचने में कर्मचारियों को। सरकार के फैसले को हाई कोर्ट दो बार रद्द कर चुका परंतु सरकार बार-बार कोर्ट जा रही।
@DrMohanYadav51@DainikBhaskar@GADdeptmp
मध्यप्रदेश में प्रोबेशन अवधि के दौरान 70%, 80% और 90% वेतन देने की व्यवस्था को हाई कोर्ट ने निरस्त करते हुए नियुक्ति की तारीख से कर्मचारियों को 100% वेतन देने का आदेश दिया। अब राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है और उसका प्रमुख तर्क है कि 2019 से अब तक का एरियर देने से राज्य पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ेगा।
सरकार का यह भी कहना है कि प्रोबेशन में वेतन की शर्तें तय करना राज्य का अधिकार है और यह व्यवस्था वित्त एवं सामान्य प्रशासन विभाग की सहमति के बाद लागू की गई थी।
लेकिन सवाल यह है कि जब कर्मचारियों से प्रोबेशन के दौरान पूरा काम लिया गया, तो उन्हें पूरा वेतन देने में वित्तीय बोझ क्यों याद आ रहा है?
2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान कर्मचारियों को 100% वेतन देने का वादा किया गया था। आज वही कर्मचारी अपने हक के लिए अदालत की लड़ाई लड़ रहे हैं और सरकार हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है।
कर्मचारियों का सवाल सिर्फ एरियर का नहीं है, बल्कि बराबर काम के लिए बराबर वेतन और किए गए वादे को निभाने का है। @INCIndia@INCMP@RahulGandhi@jitupatwari@OfficeOfKNath
जिन लोगों से SC ST और पिछड़ी का कटऑफ़ भी कभी जीवन मे पार नहीँ होता वो व्यक्ति सबसे ज्यादा आरक्षण का विरोधी होगा ।
अब आइये नौकरीयों मे कट ऑफ़ की बात कर लेते है |
सवर्ण लोगो को ये भ्रम रहता है की जनरल वर्ग का चयनित नहीँ हुआ छात्र SC वर्ग के चयनित सभी वर्ग के छात्रों से काबिल रहता है, जबकि ऐसा नहीँ है । SC वर्ग का चयनित छात्र भी 90% बाकी छात्रों से तेज रहता है काबिल रहता है ।
उदाहरण के लिए अभी UPSI का फाइनल रिजल्ट आया था, करीब 15 लाख लड़को ने फार्म डाला था जिसमे 4500 बच्चे चयनित हुए । 15 लाख का 4500 होता है 0.30%, मतलब आधे प्रतिशत से भी कम । 99.70% बच्चे जिन्होंने फार्म डाला था वो चयनित नहीँ हुए ।
अब आते है फाइनल कट ऑफ़ पर, फाइनल कट ऑफ़ जनरल का 93%, ओबीसी और EWS दोनी का 92% करीब और SC का कट ऑफ़ 89% गया था । जनरल और SC मे सिर्फ 4% का अंतर है ।
अब फैक्ट ये है की 95% लोगों का 88% नम्बर नहीँ आया रहा होगा, यानी SC का जो चयनित बच्चा है वो बाकी ( 95 % अचयनित जिसमे जनरल ओबीसी SC सभी है ) से बेहतर है ।
इसी तरह UPSC मे हर साल 10-12 लाख फार्म पड़ते है, प्री मैंस इंटरव्यू के बाद फ़ाइनल रिजल्ट आता है, उसमे 95% लोग तो प्री मे ही बाहर हो जाते है बाकी लोग मैंस मे, फिर इंटरव्यू मे ।
पिछले साल UPSC मे जनरल का कट ऑफ़ 963, ओबीसी का 932, EWS का 926, और SC का 905 कट ऑफ़ था ।
हा ये बात सच है की SC का कट ऑफ़ जनरल से कम है और उसे कम रैंक पर भी अच्छी पोस्ट मिलेगी, लेकिन एक सच तो ये है की SC से चयनित बच्चा बाकी 95 % लोगों से बेहतर था, वरना बताइए 905 नम्बर लाना क्या आसान काम है? 95 % लोग तो 800 भी पार नहीँ हो पाते है ।
इसीलिए ये सोचना की SC से चयनित बच्चा किसी भी अचयनित जनरल वर्ग के बच्चे से कमजोर है मानसिक दिवालियापन है और कुछ नहीँ ।
आखिरी बात आरक्षण प्रतिनिधित्व का विषय है न कि आर्थिक मजबूती या नौकरी प्राप्त करने का, इसे अगर आप स्वीकार्य कर लेंगे तो बेहतर होगा, वैसे भी EWS आ जाने के बाद से आरक्षण पर बहस करना समय की बर्बादी ही है । 😊
140 करोड़ लोगों के मुल्क में क्या कोई भी नागरिक या संस्था किसी भी सरकारी स्कूल या सरकारी व्यवस्था में घुसकर बिना प्रोटोकॉल प्रक्रिया को पूरा करे ऑडिट या जांच कर सकती है? क्या इससे संस्थाओं के रिसोर्सेज पूरे किए जाने का दावा किया जा सकता है या यह एक अलग तरह की #Anarchy पैदा की जा रही है। जो तथाकथित युवा देश को ठीक करना चाहते हैं वे सिस्टम में पहुंचकर इस जिम्मेदारी को खुद क्यों नहीं उठाते? आप डॉक्टर बनो, IAS बनो, IPS बनो, CA बनो, इंजीनियर बनो, MLA और MP बनो, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बनो और देश को चुटकी बजाकर ठीक कर दो। जहां रिसोर्सेज नहीं हैं वहां स्वयं दान करके पूरा करो। हजारों लोग भी ऐसा करते ही हैं। प्रशासन खराब है तो डिपार्टमेंट के मुखिया के घर प्रदर्शन करो, उन्हें घेरो, सरकार के मुखिया को घेरो और चुनाव में सरकार गिरा दो, लेकिन, अगर खुद कुछ नहीं कर सकते तो ढोल बजाकर विद्यालयों में घुसकर अराजकता मत फैलाओ और सभी शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों को दोषी ठहराना बंद करो। अगर हर रोज लाखों लोग स्कूलों में जाकर यही सब करने लगें तो एक दिन भी पढ़ाई नहीं होगी और हिंदुस्तान भी बहुत जल्द बांग्लादेश या नेपाल बन जाएगा। सॉफ्ट कॉर्नर के नाम पर हर आदमी स्कूलों में घुसकर कोई न्याय नहीं कर रहा है बल्कि स्कूलों को खिलौना समझकर वहां पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ ही कर रहा है। इन सबके लिए #SMC हैं, लोकल बॉडीज हैं, और तमाम उपक्रम हैं, उनसे बात करो और उनको ठीक करो। आज हमारी उत्तर प्रदेश फेडरेशन ने भी इस सम्बन्ध में यूपी सरकार को पत्र लिखा है। सरकार को इस पर विचार कर कठोर नियम बनाने होंगे कि आए दिन विद्यालयों में कोई भी जांच के नाम पर घुसकर अराजकता न फैलाए। #ManjeetSinghPatel
@DrMohanYadav51 माननीय सीएम साहब से निवेदन है कि मध्य प्रदेश में सामान्य जिलों के शिक्षक जो जनजाति कार्य विभाग में पदस्थ हैं उनको भी स्कूल शिक्षा विभाग में ट्रांसफर की सुविधा मिलनी चाहिए क्या सामान्य जिलों के शिक्षक जिंदगी भर नहीं पहुंच पाएंगे अपने ग्रह जिले। उनके लिए भी तो कोई उपाय कीजिए। 🙏🙏
@DrMohanYadav51 माननीय सीएम साहब से निवेदन है कि मध्य प्रदेश में सामान्य जिलों के शिक्षक जो जनजाति कार्य विभाग में पदस्थ हैं उनको भी स्कूल शिक्षा विभाग में ट्रांसफर की सुविधा मिलनी चाहिए क्या सामान्य जिलों के शिक्षक जिंदगी भर नहीं पहुंच पाएंगे अपने ग्रह जिले। उनके लिए भी तो कोई उपाय कीजिए। 🙏🙏
@DrMohanYadav51 माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन है की स्कूल शिक्षा विभाग को अभी पूरी तरह से नियुक्ति भी नहीं मिली और उनको जिला है बदलने की सुविधा मिल गई है लेकिन जनजाति कार्य विभाग में पदस्थ हजारों शिक्षक 7- 8 साल से एक ही जगह है पदस्थ है ना उनको ट्रांसफर का लाभ मिल पा रहा।
@DrMohanYadav51@SharadKolmp माननीय मुख्यमंत्री जी ग्रुप 2 सब ग्रुप 4 की भर्ती में पंचायत समन्वयक अधिकारी की भर्ती में एक भी पद नहीं दिया गया है अनुसूचित जाति वर्ग के लिए क्या 17 पर्सेंट आबादी के लिए एक भी पद नहीं है फिर 16%आरक्षण का क्या मतलब।