#GodMorningSunday
कबीर साहेब माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते। वे सन् 1398, व���क्रमी संवत् 1455 में, काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में खिले कमल के पुष्प पर शिशु रूप में सशरीर प्रकट हुए थे। यह कोई सामान्य जन्म नहीं, बल्कि साक्षात् परमात्मा का प्राकट्य था।
@SaintRampalJiM
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
अजन्मा परमेश्वर, ** जन्म-मृत्यु से परे कबीर साहेब
न कोई माता-पिता हैं, न उनका जन्म-मृत्यु का कोई बंधन है। वे अविनाशी और सर्वशक्तिमान पूर्ण परमात्मा हैं, जो हर युग में जीवों के उद्धार हेतु सशरीर धरती पर प्रकट होते हैं।
ना मेरा जन्म, ना गर्भ बसेरा, बालक
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं।
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2Days Left Kabir Prakat Diwas
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण,
वह है कबीर भगवान
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी ��ें विद्यमान हैं।
#GodMorningSunday
#GodMorningSunday
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जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण, वह है कबीर भगवान
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान हैं।
#सत_भक्ति_संदेश
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
"कबीर साहेब प��रकट दिवस"
वह पावन दिन है, जब सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर, हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्त्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया।
#GodMorningSunday
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
The Unborn Almighty: Kabir Sahib
transcends birth and mortality. Free from the shackles of birth and death, Kabir Sahib Has no earthly parents. He is the indestructible and sovereign Su-preme Lord, who manifests bodily
1Day Left Kabir Prakat Diwas
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
संत गरीबदास जी महाराज ने भी अपनी अमरवाणी में स्पष्ट किया है कि जिसके जन्मदाता कोई माता-पिता नहीं हैं और जिसके जन्म का कोई प्रमाण नहीं है वह केवल पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब है।
गरीब, मात पिता जाके नहीं, नहीं जन्म प्रमाण।
2Days Left Kabir Prakat Diwas
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
"कबीर साहेब प्रकट दिवस"वह पावन दिन हैजब सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर,हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्त्व की देह ना मेरी,ना कोई माता जाया।
जीव उदारन तुम को तारन, सीधा जग मे आया
#सत_भक्ति_संदेश
बिरला संत
गरीब, महिमा अविगत नाम की, जानत बिरले संत।
आठ प्रहर धुनी ध्यान है, मुनि जन रटै अनंत।।
उस परमात्मा को प्राप्त करने के लिए
अनंत मुनिजन मनमाने नामों की रटन लगा रहे है (जाप कर रहे है) परंतु अविगत नामो (दिव्य मंत्र)
#GodMorningSaturday#santrampalji
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
600 साल पुराना रहस्य, आज भी काशी की धरती गवाह है!
कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं। कलियुग में वे काशी के लहरतारा तालाब में, कमल के फूल पर, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ज्येष्ठ पूर्णिमा को
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर शिशु रूप में प्रकट हुए।
1Day Left Kabir Prakat Diwas
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण,
वह है कबीर भगवान
संत रामपाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में 629 वां कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस, 29 जून 2026
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था।
#न_मेरा_जन्म_न_गर्भ_बसेरा#noidagbnup16
600 साल पुराना रहस्य, आज भी काशी की धरती गवाह है!
कबीर साहेब वह अविनाशी परमा��्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं। कलियुग में वे काशी के लहरतारा तालाब में, कमल के फूल पर, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ज्येष्ठ
#GodMorningSunday
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#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
कबीर साहेब के न कोई माता-पिता हैं, न उनका जन्म-मृत्यु का कोई बंधन है। वे अविनाशी और सर्वशक्तिमान पूर्ण परमात्मा हैं, जो हर युग में जीवों के उद्धार हेतु सशरीर धरती पर प्रकट होते हैं।🙏
1Days Left Kabir Prakat Diwas
#GodMorningSunday
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
कबीर साहेब माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते। वे सन् 1398, विक्रमी संवत् 1455 में, काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में खिले कमल के पुष्प पर शिशु रूप में सशरीर प्रकट हुए थे। यह कोई सामान्य जन्म नहीं, बल्कि साक्षात् परमात्मा का प्राकट्य था��