आयोग की लापरवाही और लचर व्यवस्था के कारण उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से एक महत्वपूर्ण परीक्षा संदेह के घेरे में आ चुकी है!
लेखपाल भर्ती परीक्षा में जिस तरह से अव्यवस्थाओं और धांधली की खबरें सामने आई हैं, वह सिस्टम की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है। जिन होनहार युवाओं ने अपने जीवन के कीमती वर्ष और अपना सर्वस्व इस परीक्षा की तैयारी में न्योछावर कर दिया, आज वे सड़क पर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। गरीब माता-पिता की गाढ़ी कमाई और 3 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य को इस तरह शिक्षा और नकल माफियाओं की भेंट नहीं चढ़ने दिया जा सकता।
आयोग और राज्य सरकार से पुरजोर मांग हैं कि वे इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लें। लीपापोती करने या इसे भ्रामक बताने के बजाय, आवश्यक और सख्त कार्यवाही करते हुए एक पारदर्शी, उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जाएं।
#Lekhpal_Exam_Investigation
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मेहनती छात्रों के सपनों की हत्या हुई है। लेखपाल परीक्षा का पेपर संदेह के दायरे में है एग्जाम के घंटों बाद भी बच्चों का हाल से बाहर निकलना सिस्टम की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है! आखिर कब तक हमारे होनहार युवा और उनके गरीब माता-पिता इस भ्रष्ट तंत्र और शिक्षा माफियाओं की कीमत चुकाते रहेंगे?
हमें भूलना नहीं चाहिए कि UPPSC भर्ती के समय भी आयोग ने पहले सब कुछ सही होने का दावा किया था, लेकिन बाद में सच्चाई सामने आने पर परीक्षा लीक थी। क्या इस बार भी लीपापोती की तैयारी है?
हमारी सरकार और आयोग से स्पष्ट मांग है:
लेखपाल परीक्षा में हुई इस धांधली की तत्काल, पारदर्शी और उच्च स्तरीय जांच हो। पेपर लीक करने वाले गिरोह और उनके आकाओं को बेनकाब कर सख्त सजा दी जाए कि वह एक उदाहरण बने। छात्रों के भविष्य और उनके समय के साथ यह क्रूर मजाक अब और नहीं सहा जाएगा! झूठे आश्वासन नहीं, न्याय चाहिए!
#Lekhpal_Exam_Investigation
@myogiadityanath@myogioffice@CMOfficeUP@UPGovt@UPTakOfficial@TheNewspinch@PMOIndia
🚨 25 MAY | 11:00 AM 🚨
अब आवाज़ दबेगी नहीं! ✊
मेहनत हमारी, न्याय भी हमारा!
युवाओं की आवाज़ बुलंद करें।
#LekhpalExamInvestigation#JusticeForStudents
एक ट्वीट नहीं, लाखों युवाओं की पुकार है! 🔥
#UPSSSC_LEKHPAL_PAPER_LEAK को लेकर गंभीर आरोप लग रहे हैं।
लगातार भर्ती परीक्षाओं में loopholes, कमजोर सिस्टम और धांधलेबाजों पर सख्त कार्रवाई न होने का ही परिणाम है कि आज कोई भी परीक्षा बिना संदेह और विवाद के पूरी नहीं हो पा रही।
लाखों मेहनती छात्रों का भरोसा टूटता जा रहा है। @UPGovt
निरंतर पतन को उन्मुख भारतीय लोकतंत्र के हवनकुंड में देश के मुख्य न्यायाधीश ने एक और आहुति डाली है. अपने ही नागरिकों को काक्रोच और परजीवी कहने के लिए बहुत मोटी चमड़ी चाहिए मीलार्ड. देश किसी एक से नहीं उन सबसे बनता है जो आपको काक्रोच और परजीवी लगते है. सीजेआई को माफ़ी माँगनी चाहिए
In all humility and with complete respect for judiciary, I have written the following letter to Justice Swarna Kanta Sharma, informing her that pursuing Gandhian principles of Satyagraha, it won’t be possible for me to pursue this case in her court, either in person or through a counsel.
I have taken this difficult decision after coming to the clear conclusion that the proceedings being conducted in her court do not, in any manner, satisfy the fundamental principle that ‘justice must not only be done but must also be seen to be done’. My participation in these proceedings, either myself or through a counsel will not achieve anything meaningful.
यही आज का सबसे बड़ा मुद्दा है! वाह वाह ||
इतनी बार बेरीगारो ने आंदोलन किये - कभी नहीं लिखा! इससे पहले up कांस्टेबल आंदोलन मैं लाठी चार्ज तक क़ी नौबत थी | मगर कोई किसी का supoort tweet नहीं आता |
Option में पंडित है answer में नहीं!
ठीक मुद्दे उठाया करो जिनसे सच में जनता का युवाओं का किसानो का काटा जा रहा है |
कुमार विश्वास ख़ुद को “अभागा सवर्ण” कह रहे हैं। अब सबके UGC पर बोल निकल रहे हैं लेकिन तब नहीं बोले कि विश्वविद्यालयों के सभी कुलपति केवल इनकी जातियों के क्यों हैं? सभी जज यही लोग क्यों बनते हैं? क्यों सभी उद्योगपति इन्हीं वर्गों से आते हैं। क्यों शहर की अमीर कालोनियाँ में सिर्फ़ इनके घर हैं? ये बातें क्यों आपको कभी असहज नहीं कीं?
सच ये है कि कथित उच्च वर्ग का 99% समाज, जातिवाद पर कभी बोला ही नहीं। जब आपने जातिवाद के ख़िलाफ़ कभी कोई गंभीर सवाल उठाया ही नहीं तो उसके उपचार पर सवाल करने का हक़ आपको कैसे बचा?
एक हकीकत तो ये भी है कि कथित उच्च वर्ग परंपरागत जातिवाद में इतना अंधा हुआ बैठा है, इतना प्रिविलेज्ड है कि उसे ये अहसास भी नहीं है कि वो कितना जातिवादी है। उनमें से बहुतों को ये अब तक मालूम भी नहीं हुआ कि उनकी बातों में ही कितनी बार जातीय अपमानजनक शब्द निकलें हैं।
सच ये है कि दलितों का अपमान उनके जीवन का सामान्य रेगुलर हिस्सा है।
बेहतर हो कि कथित उच्च वर्ग अपने अंदर झांकें, ख़ुद के बच्चों को जाति को लेकर सेंसिटिव करे। इससे एक दिन वे और बेहतर इंसान बनेंगे।
UGC का विरोध ना करें। अपने दिल को बड़ा करें। और ख़ुद सुनिश्चित करें कि अगर कोई भी व्यक्ति जातीय हिंसा, या अपमानजनक शब्द कहे तो उसे सजा मिले। वो Unchallenged ना जाए जैसा अब तक जाते रहें हैं।
ऐसा समाज बनाने में समाज के लोग ख़ुद आगे आकर मदद करें।
इससे आपके हृदय में मानवता का भाग बढ़ेगा और पिछड़ों-दलितों के लिए जीवन थोड़ा और सहज होगा। ऐसा भारत ही एक दिन समानता को चख सकेगा।
अभागा सवर्ण जैसी कविताओं में ख़ुद को ना छुपाएँ। वो वर्ग कैसे अभागा हो सकता है जिसका संसाधनों और बड़ी नौकरियों पर अब भी इकतरफ़ा कब्जा हो?
आज अभिनेता से लेकर बड़े बड़े दिगज़्ज़ खिलाड़ी आज देश मैं हो रहे अन्याय और अत्याचार के ख़िलाफ़ बोलना छोड़िये लिख नहीं पा रहे है, 2014 से पहले भले ही सब कुछ ख़राब रहा हो मगर ये आज़ादी ज़रूर थी कि सब बोलते थे आवाज़ उठाते थे सरकारो से सवाल पूछते थे और सरकारें दबाब भी महसूस करती थी और जवाब भी देती थी । आजकी सरकारो के लिए जनता सिर्फ़ वोट लेने की मशीन और tax कमाने जा ज़रिया मात्र है । याद रखना दोस्तों -
जब न्याय सत्ता की जेब में चला जाये
तो अकेला कोई बलात्कारी ही सिर्फ अपराधी नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की उसमे साझेदारी है ।।
अच्छा राम राज्य है - जहाँ एक rape पीड़िता को न्याय के लिए सड़को पे उतरकर सुरक्षा के लिए बनी police से ही भिड़ना पड़ रहा है और तमाम intellectual वर्ग मूक बनकर बैठा है ।।
bulldozer क्या बस ग़रीब की छत पे चलने के लिए है , बड़े गुनहगार के घर पहुचते ही तो डीजल खत्म ।।
@narendramodi साहब कुछ रहम कीजिये 🙏
#JusticeForUnnaoVictim
● जवाहरलाल नेहरू- बाल दिवस
● चौधरी चरण सिंह - किसान दिवस
● डॉ. भीमराव अंबेडकर - समानता दिवस
● मौलाना अब्दुल कलाम आजाद - शिक्षा दिवस
● डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम - छात्र दिवस
● नरेंद्र मोदी - बेरोजगार दिवस
"अपने अपने कर्मों का फल हैं।"
#राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस