ये ख़ाक-ए-बदन जिसके सहारे पे खड़ी है,
उस जिस्म की अब कोई भी बुनियाद नहीं है।
किरदार कोई और है इस वक़्त की ज़द में,
इस बार ऐ शीरीं तेरा फ़रहाद नहीं है।
- राव नासिर
सर पे सूरज खड़ा है चल उठ जा
काम बाक़ी पड़ा है चल उठ जा
तुझ को दुनिया भी फ़त्ह करनी है
ये तक़ाज़ा बड़ा है चल उठ जा !
~ राव नासिर
#जन्मदिन मुबारक 🌺
@RAONASIIR