क्या देश के किसानों को पता है कि शरद मराठे कौन है? क्या किसानों को पता ह�� कि कृषि क़ानूनों के विरोध से उन्होंने कितनी बड़ी लड़ाई जीती है? क्या किसानों को हिन्दी में यह सब पता है कि article 14 और the reporters collective ने नीति आयोग के किस खेल का भांडा फोड़ दिया है? अमरीका से शरद मराठे आता है और टास्क फ़ोर्स बनाता है और खेती कैसे बदलें सुझाता है। फिर अध्यादेश आता है। फिर क़ानून बनता है। अफ़सोस कि किसानों को ये सब हिन्दी में पता नहीं चलेगा और न ही कोई इस रिपोर्ट को हिन्दी में लिख कर व्हाट्स एप में फार्वर्ड करेगा। हिन्दी के अख़बार और चैनल इस ख़बर को पहुँचने नहीं देंगे, तो फिर किसानों तक यह बात कैसे पहुँचेगी? प्रधानमंत्री के भाषण को श्रेष्ठ और राहुल के भाषण को औसत बताने वाले पत्रकार भी इस खबर पर हाथ नहीं लगाएंगे, उन्हें पता है कि उनकी दुकान बंद हो जाएगी। नीति आयोग और कृषि मंत्री जवाब नहीं देंगे। तो इस तरह से चुप रह कर इस ख़बर की हत्या कर दी जाएगी और किसानों को पता भी नहीं चलेगा कि असल में तलवार उनकी गर्दन पर चली है।
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आज के दिन अच्छा सुना कीजिए। जो रोज़ सुनते हैं, उससे अलग हटकर। किशोरी अमोणकर जी की यह आवाज़ अंतर्मन के पास ले जाएगी। कर्कश ध्वनियों से भरे इस जगत में उनकी आवाज़ के सुर-प्रवाह में तैरते उतराते आज़ाद मन को छू लीजिए। उस कोने में पहुँच कर उनका भी ध्यान कर लीजिए, जिनके घरों को नूंह में तोड़ दिया गया। मणिपुर को याद कर लीजिए। उनके बारे में किसी ने कुछ बोला क्या? और हाँ, उसका क्या हुआ मिट्टी लेकर सेल्फी ले��े का? शपथ अब इवेंट है। केवल एलान ही तो करना है। घर जीवन है। केवल ढहा ही तो देना है। आप ‘लोग’ हैं। केवल चुप ही तो रहना है। वो वक्ता हैं। केवल बोलते ही तो रहना है। कुछ भी बोलते रहना हैं। वही सब दोहराते रहना है। अतः कुछ अच्छा सुनिए।
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