आप लोग शायद दिल्ली से सटे गाजियाबाद का निशा शर्मा को भूल गए होंगे!
जिस तरह पाकिस्तानी सीमा हैदर को भारतीय मीडिया ने प्रेम की देवी बना दिया हैं, ठीक उसी तरह निशा शर्मा को भी मीडिया ने रातों-रात पूरे भारत में हीरो बना दिया था। जिसने दहेज लोभी पति को दरवाजे से वापस लौटा दिया था।
हर चैनल पर मेहंदी लगाकर चुनरी ओढ़ कर निशा शर्मा इंटरव्यू देती थी उसके दरवाजे पर मीडिया के सैकड़ों ओ बी वैन खड़े रहते थे।
इस केस में जिस लड़के से निशा शर्मा की शादी तय हुई थी उसके और उसके पूरे परिवार की जिंदगी बर्बाद हो गई, लड़के की नौकरी छूट गयी, 1 साल जेल में रहा फिर 8 साल वह कोर्ट कचहरी के धक्के खाता रहा, लड़के की माँ सरकारी नौकरी में थी वह भी जेल जाने से सस्पेंड हो गई और लड़के के पिता की हार्ट अटैक से निधन हो गया।
दरअसल निशा शर्मा ने अपने बॉयफ्रेंड से शादी करने के लिए यह पूरा ड्रामा रचा था। कोर्ट ने भी अपने आदेश में यही कहा कि, निशा शर्मा ने जान-बूझकर यह नौटंकी की थी लेकिन, कोर्ट ने यह भी कहा कि वह मजबूर है कि, वह निशा शर्मा के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकते और उन्होंने उस लड़के के पूरे परिवार को बाइज्जत बरी कर दिया।
लेकिन, सोचिए दिल्ली से गाजियाबाद जाकर 8 साल तक मुकदमा लड़ना, अपने पिता का दाह संस्कार करना उस लड़के के लिए कितना मुश्किल रहा होगा?
खैर निशा शर्मा को कुदरत ने ही सजा दी, उसकी सगी भाभी मनीषा शर्मा ने अपने पूरे ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का केस किया और उस केस में अब निशा शर्मा और उसका पूरा परिवार जेल में है।
कुदरत ने उस लड़के को न्याय तो दिया लेकिन पूरे 13 साल के बाद। इसलिए, यदि भारतीय मीडिया किसी को हीरो की तरह पेश करे तब आप इमोशनल मत बनिए बल्कि शांति रखिए, क्योंकि हमारी मीडिया कई बार नकारात्मक लोगों को ही हीरो बनाने में अपनी पूरी ताकत झोंक देती है।
#TheRoyalFamilyofJaipur pays tribute to the Maharajas of Jaipur who founded, developed and nurtured our beautiful city.
Greetings on the occasion of #FathersDay
हम जब बड़े हो जाते हैं।उम्र में या रुतबे में।तो अपने छोड़े हुए घर की बहुत याद आती है। उस घर की, जहाँ हमने अपना बचपन गुज़ारा होता है। उस दिन मेरे दोस्त सनी देओल के बेटे, करण की शादी में कुछ जल्दी पहुँच गया तो धरम जी के साथ वक़्त गुज़ारने का मौक़ा मिला।धरम जी अपनी लिखी हुई नज़्म (कविता) की कुछ लाइनें गुनगुना रहे थे। जो मेरे और राज बब्बर जी के दिलों की गहराई को छू रही थी।मेरे बहुत कहने पर वो ये नज़्म रिकॉर्ड करने को राज़ी हुए।आप भी सुनिए।आपको भी अपना माज़ी, अपना बचपन, अपना घर और अपनी माँ बहुत याद आएगी। Thank you @aapkadharam ji. 😍🫶🙏 #Poem #Memories #Nostalgia #mother @iamsunnydeol
रामायण में वर्णित मुख्य स्थान....
1. तमसानदी : अयोध्या से 20 किमी दूर है तमसा नदी। यहां पर उन्होंने नाव से नदी पार की।
2. श्रृंगवेरपुरतीर्थ : प्रयागराज से 20-22 किलोमीटर दूर वे श्रृंगवेरपुर पहुंचे, जो निषादराज गुह का राज्य था। यहीं पर गंगा के तट पर उन्होंने केवट से गंगा पार करने को कहा था। श्रृंगवेरपुर को वर्तमान में सिंगरौर कहा जाता है।
3. कुरईगांव : सिंगरौर में गंगा पार कर श्रीराम कुरई में रुके थे।
4. प्रयाग: कुरई से आगे चलकर श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सहित प्रयाग पहुंचे थे। कुछ महीने पहले तक प्रयाग को इलाहाबाद कहा जाता था ।
5. चित्रकूट : प्रभु श्रीराम ने प्रयाग संगम के समीप यमुना नदी को पार किया और फिर पहुंच गए चित्रकूट। चित्रकूट वह स्थान है, जहां राम को मनाने के लिए भरत अपनी सेना के साथ पहुंचते हैं। तब जब दशरथ का देहांत हो जाता है। भारत यहां से राम की चरण पादुका ले जाकर उनकी चरण पादुका रखकर राज्य करते हैं।
6. सतना : चित्रकूट के पास ही सतना (मध्यप्रदेश) स्थित अत्रि ऋषि का आश्रम था। हालांकि अनुसूइया पति महर्षि अत्रि चित्रकूट के तपोवन में रहा करते थे, लेकिन सतना में 'रामवन' नामक स्थान पर भी श्रीराम रुके थे, जहां ऋषि अत्रि का एक ओर आश्रम था।
7. दंडकारण्य : चित्रकूट से निकलकर श्रीराम घने वन में पहुंच गए। असल में यहीं था उनका वनवास। इस वन को उस काल में दंडकारण्य कहा जाता था। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर दंडकाराण्य था। दंडकारण्य में छत्तीसगढ़, ओडिशा एवं आंध्रप्रदेश राज्यों के अधिकतर हिस्से शामिल हैं। दरअसल, उड़ीसा की महानदी के इस पास से गोदावरी तक दंडकारण्य का क्षेत्र फैला हुआ था। इसी दंडकारण्य का ही हिस्सा है आंध्रप्रदेश का एक शहर भद्राचलम। गोदावरी नदी के तट पर बसा यह शहर सीता-रामचंद्र मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर भद्रगिरि पर्वत पर है। कहा जाता है कि श्रीराम ने अपने वनवास के दौरान कुछ दिन इस भद्रगिरि पर्वत पर ही बिताए थे। स्थानीय मान्यता के मुताबिक दंडकारण्य के आकाश में ही रावण और जटायु का युद्ध हुआ था और जटायु के कुछ अंग दंडकारण्य में आ गिरे थे। ऐसा माना जाता है कि दुनियाभर में सिर्फ यहीं पर जटायु का एकमात्र मंदिर है।
8. पंचवटीनासिक : दण्डकारण्य में मुनियों के आश्रमों में रहने के बाद श्रीराम अगस्त्य मुनि के आश्रम गए। यह आश्रम नासिक के पंचवटी क्षेत्र में है जो गोदावरी नदी के किनारे बसा है। यहीं पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी। राम-लक्ष्मण ने खर व दूषण के साथ युद्ध किया था। गिद्धराज जटायु से श्रीराम की मैत्री भी यहीं हुई थी। वाल्मीकि रामायण, अरण्यकांड में पंचवटी का मनोहर वर्णन मिलता है।
9. सर्वतीर्थ : नासिक क्षेत्र में शूर्पणखा, मारीच और खर व दूषण के वध के बाद ही रावण ने सीता का हरण किया और जटायु का भी वध किया था जिसकी स्मृति नासिक से 56 किमी दूर ताकेड गांव में 'सर्वतीर्थ' नामक स्थान पर आज भी संरक्षित है। जटायु की मृत्यु सर्वतीर्थ नाम के स्थान पर हुई, जो नासिक जिले के इगतपुरी तहसील के ताकेड गांव में मौजूद है। इस स्थान को सर्वतीर्थ इसलिए कहा गया, क्योंकि यहीं पर मरणासन्न जटायु ने सीता माता के बारे में बताया। रामजी ने यहां जटायु का अंतिम संस्कार करके पिता और जटायु का श्राद्ध-तर्पण किया था। इसी तीर्थ पर लक्ष्मण रेखा थी।
10. पर्णशाला : पर्णशाला आंध्रप्रदेश में खम्माम जिले के भद्राचलम में स्थित है। रामालय से लगभग 1 घंटे की दूरी पर स्थित पर्णशाला को 'पनशाला' या 'पनसाला' भी कहते हैं। पर्णशाला गोदावरी नदी के तट पर स्थित है। मान्यता है कि यही वह स्थान है, जहां से सीताजी का हरण हुआ था। हालांकि कुछ मानते हैं कि इस स्थान पर रावण ने अपना विमान उतारा था। इस स्थल से ही रावण ने सीता को पुष्पक विमान में बिठाया था यानी सीताजी ने धरती यहां छोड़ी थी। इसी से वास्तविक हरण का स्थल यह माना जाता है। यहां पर राम-सीता का प्राचीन मंदिर है।
11. तुंगभद्रा : सर्वतीर्थ और पर्णशाला के बाद श्रीराम-लक्ष्मण सीता की खोज में तुंगभद्रा तथा कावेरी नदियों के क्षेत्र में पहुंच गए। तुंगभद्रा एवं कावेरी नदी क्षेत्रों के अनेक स्थलों पर वे सीता की खोज में गए।
12. शबरी का आश्रम : तुंगभद्रा और कावेरी नदी को पार करते हुए राम और लक्ष्मण चले सीता की खोज में। जटायु और कबंध से मिलने के पश्चात वे ऋष्यमूक पर्वत पहुंचे। रास्ते में वे पम्पा नदी के पास शबरी आश्रम भी गए, जो आजकल केरल में स्थित है। शबरी जाति से भीलनी थीं और उनका नाम था श्रमणा। 'पम्पा' तुंगभद्रा नदी का पुराना नाम है। इसी नदी के किनारे पर हम्पी बसा हुआ है।
“Character is not something that you buy; it is not a commodity that can be bartered for; it is not a quality suited for only the rich and famous; rather, character is built upon the foundational commitment of love, honesty, and compassion for others.”
Veena Manvi, Mahila Vikas Manch, Patna Bihar dropping some truth bombs on false cases by women
Says 90% cases coming to their organisation by women are found motivated and false. Asks the young journalist not to get married.
#MensCommission is dire need of modern India
आर्थिक स्थिति मजबूत नही होने के कारण परिवार के सभी लोग जम्मू जा नही सके , सिर्फ इनके पति राधे श्याम अकेले ही उन्हें ढूंढ रहे है । अतः आपसे प्रार्थना है की जल्द से जल्द एक मां को बच्चो से मिलाने की कृपा करे ।