एक दौर था जब समाजवादी आंदोलन केवल सत्ता पाने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की मशाल हुआ करता था। उस दौर के नेता संसद में भी गर्जते थे और सड़कों पर भी संघर्ष करते थे। मंडल कमीशन की सिफ़ारिशों को लागू कराने की लड़ाई हो या पिछड़ों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का सवाल - इन नेताओं ने हर कठिन मोड़ पर इतिहास में गहरी लकीर खींची।
लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव, शरद यादव, गोपीनाथ मुंड��� और नीतीश कुमार जैसे नेताओं का तेवर देखिए - उन्होंने सत्ता को लक्ष्य नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का साधन माना। कुर्सी के लिए सिद्धांत नहीं बदले, बल्कि सिद्धांतों के लिए कुर्सी तक दांव पर लगा दी। उनके लिए राजनीति अवसर नहीं, सामाजिक परिवर्तन का संकल्प थी।
लेकिन समय की धारा में पिछड़ों की आवाज़ों में से कई आवाज़ें धीमी पड़ती चली गईं। संघर्ष की जगह समझौतों ने ले ली, और विचारधारा की जगह सत्ता की र��जनीति ने। यह बदलाव केवल राजनीतिक नहीं, सामाजिक न्याय की मूल भावना के लिए भी एक गंभीर चुनौती है।
महिला आरक्षण के सवाल पर भी समाजवादी परंपरा ने साफ कहा - जब तक आरक्षण के भीतर आरक्षण नहीं होगा, तब तक प्रतिनिधित्व अधूरा रहेगा। पिछड़ी और दलित महिलाओं के लिए अलग हिस्सेदारी की मांग केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि समान भागीदारी के लोकतांत्रिक सिद्धांत का प्रश्न है।
आज भी अनेक पिछड़े और दलित संगठन सत्ता के विभिन्न खेमों में मौजूद हैं। उन्हें यह याद रखना चाहिए कि इतिहास केवल सत्ता के समीकरण नहीं देखता - वह यह भी दर्ज करता है कि किसने अपने समाज की आवाज़ बुलंद की और किसने उसे दबा दिया।
अंतरात्मा की आवाज़ कभी पूरी तरह ख़ामोश नहीं होती। सवाल केवल इतना है - क्या हम उसे सुनने का साहस रखते हैं? क्योंकि इतिहास का न्याय देर से होता ह���, पर होता ज़रूर है।
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1.सभी विभागों के BPSC चयनित राज्यकर्मियों को 7th CPC का पूरा वेतनमान दिया गया, लेकिन शिक्षक आज भी घटे हुए बेसिक पर हैं। क्या शिक्���क राज्यकर्मी नहीं? यह शिक्षा और शिक्षक विरोधी नीति है। #7thPayForBiharTeachers
अंग्रेज़ों की जेलों में 9 साल से ज़्यादा बिताने वाले नेहरू जी ने AIIMS बनाया, IIT बनाया, आधुनिक भारत की बुनियाद रखी, अमेरिका को दो-टूक जवाब दे सकने वाला विदेश संबंध संबंध दिया.
मोदी जी ने देश को जाति-धर्म का झगड़ा, दुर्घटनाएँ, घोटाला, वोटचोरी, सीजफायर और वैश्विक अपमान दिया.
ये सरकार और प्रशासन अब तानाशाही पर उतर आया है। देख रहे हो न युवाओं यहाँ जाति धर्म नहीं देखा जा रहा है, बस आपका भविष्य खाया जा रहा है।
सिविल ड्रेस में कुछ लोग मंच पर चढ़कर मारपीट की, लड़कियों से अभद्रता की।
#ssc_job_chor#SSCAandolan
आज रामलीला मैदान में चल रहे SSC अभ्यर्थियों के आंदोलन को पुलिस ने जबरन खत्म कराया, कई छात्रों को हिरासत में भी ले लिया गया।
ये ��ोकतंत्र नहीं, सीधी-सीधी तानाशाही है।
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“SSC परीक्षा में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में हज़ारों छात्र एकजुट हुए हैं।
सुधार अपने आप नहीं होंगे—इसके लिए घर से निकलकर सड़कों पर आवाज़ उठानी होगी।”
#दिल्ली_चलो#SSC_System_Sudharo