जब बैठोगे मेरी बज्म में तो खुद जान जाओगे मुझे। मैं, तुम, कुछ अपनी बातें, शिकायतें, कुछ सफाई, शरारतें..और दो प्याले ब्लैक कॉफी ☕☕
follow back possible 🤝
@AnumaVidisha नेहरू खानदान का भी इरादा था। जब नहीं हो पा रहा है तो राहुल विक्षिप्त सा हुआ घूम रहा है। गली, मोहल्ले, बाग, सड़क, स्कूल, कॉलेज... सब पर इनके ही नाम अंकित किये जा रहे हैं। अब पागलखाने से फरार मरीज सा घूम रहा है। 😄
@aajtak राहुल का इंदिरा का पोता और अभिषेक आ ममता का भतीजा होने के अलावा उपलब्धि क्या है? गुलामों से घिरे इन मानसिक कुपोषण के शिकार जातकों का अय्यासी के सिवा राजनीति में क्या काम है?
@Sid1_Sarkar@AadeshRawal किसके लिए जागना है, भाई?
8 घंटे दिन और रात की बिजली के सप्ताहों के लिए? गुंडई के लिए? अवैध कब्जों के लिए? सैफई में मुजरों के लिए? सुबह चार बजे रेलगाड़ी से उतरने के बाद भी घर जाने के लिए सूर्योदय का इन्तजार करने के लिए ताकि लुटने से बच सको? पुलिस में एक ही जाति की भर्ती के लिए?😊
@VinodAgnihotri7 देश के विभाजन के दोषी अद्वितीय तो हो सकते हैं लेकिन खास नहीं। सत्ता लोलुपता और अय्यासी के नायाब नमूना हो सकते हैं, देश पर परिवार को लाद���ा कोई प्रसंशा का काम नहीं है। इतिहास तो इतिहास होता है चाहे वह दीमकों का हो। इसे खास वही मान सकते हैं जिन्हें जूठन खाने को मिली हो।
@ajitanjum सही कहा। देश का विभाजन करना, परिवार को देश पर थोपना और देश को बपौती समझकर अय्यासी करना....ये सब रिकॉर्ड नहीं तोड़े जा सकते हैं। कुछ सड़ी और गुलामी मानसिकता वाले पत्रकार उसी का गीत गाते रहेंगे।
@akhileshsharma1 मुफ्त अनाज और अयोग्य लोगों को आरक्षण की बदौलत सरकारी नौकरी देते रहो यह तथाकथित विविधता दिखती रहेगी। मक्कार और नक्कारे लोग यही पसंद करते हैं।