@kkjourno Ek hi hai jisko nipta nhi sakte, isiliye achha yehi hoga ki sab uske pichhe khade ho jaayen, warna ye zulmi sarkar aur iske mob culture ko enjoy karne ki aadat daal lein.
Dusra koi option hai nhi Hindustaniyo ke paas.
मनमोहन सिंग २.० मध्ये ममता बॅनर्जी यांच्या TMC कडे रेल्वे खाते होते. त्यावेळी त्यांच्याच पक्षाच्या रेल्वे मंत्र्यांनी भाडेवाढ केली होती तेव्हा ममताजींनी प्रचंड विरोध करत त्या मंत्र्याचा राजीनामा घेतला व केंद्र सरकारचा देखील पाठिंबा काढून घेतला.
काँग्रेसकडे केंद्रात सत्ता होती, ED - CBI चे अस्त्र त्यांच्या हाती होते. जसे भाजपने शिवसेना, राष्ट्रवादी फोडली तसे TMC ला फोडणे काहीही कठीण नव्हते. काँग्रेस ते अगदी सहज करू शकली असती. परंतु ते त्यांनी केले नाही. बंगालमध्ये जनमत ममताजी सोबत होते याचा त्यांना कायम आदर केला आणि म्हणूनच आपल्या देशात लोकशाही टिकली, रुजली व वृद्धिंगत होत गेली.
असो मी हे जे लिहिले आहे ते समजण्याची अंधभक्तांची बौद्धिक पातळी नाही आणि ज्यांची बौद्धिक क्षमता जरी असली तरी काँग्रेस द्वेष इतका नसा नसात भिनला आहे की ते सत्य स्वीकारणार नाही.
नेता फेकू हो, चोर हो, तड़ीपार हो, बलात्कारी हो ...चलेगा
मीडिया, ED, ECI सत्ता की गोदी में हो ... चलेगा
न्यायपालिका सत्ता की चाट चाट कर राज्य सभा पहुंच जाए, तो भी चलेगा
पर विपक्ष, हमको 100% परफेक्ट ही चाहिए !
- @Ram_Guha
And, if the Govt/RSS wants to blunt the impact of @IYC’s nation wide protests, Dipke may be permitted to hold the protests.
Thereafter, RSS affiliate organisations will hold a protest to protest against Dipke.
The narrative shifts.
One can always hypothesize that the same ecosystem that manufactured its own opposition (AAP) and derailed any real chance of mass political evolution can also create controlled disruptions (CJP) when needed to protect larger interests. I'll stay cynical.
इकॉनॉमी अगर पूंजीपतियों को सौंपी जानी है तो उसके लिए जनता की नज़रों में राहुल को अयोग्य साबित करना भी ज़रूरी है और विपक्ष को पूरी तरह तहस-नहस करना भी।अभी तो सिर्फ़ शुरुआत हुई है।राहुल जैसे-जैसे मज़बूत होंगे उन पर हमले भी बढ़ते जाएँगे।श्रवण गर्ग की बातचीत : https://t.co/xcF2BhdhkQ
मालवीय नगर के होटल में लगी आग में एक विदेशी ख़ुद को बचाने के लिए छत पर खड़ा है। बचाव के इंतज़ार में है।
होटल में केवल एक एंट्री–एग्जिट गेट था। कोई फायर इक्विप्मेंट नहीं थे! लाइसेंस 6 कमरों का लेकिन होटल में कमरे थे 25!
होटल में लगी आग में 21 में से 17 विदेशी मारे गए। मोदी जी ने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
और अब इसी घोषणा के बाद पूरी दुनिया जान चुकी है, भारत में जान की क़ीमत 2 लाख रुपये है।
जवाबदेही और जिम्मेदारी तो मायने ही नहीं रखती!
@pranavpradhi1 Providing groceries and food in minutes is currently solely a private venture, while delivering emergency and rescue services quickly is the government’s responsibility (we don’t have private fire brigades). You are comparing apples to oranges.
सोना गिरवी रखने पर चंद्रशेखर की सरकार चली गई थी।
आज तक उस बदनामी से मुक्त नहीं हो पाए हैं।
अब तो सोना बेचा गया है!
क्या राहुल ने इसलिए कहा था कि मोदी सरकार चली जाएगी?