नए आंदोलन का आगाज़ हो चुका है…
कल तक हमारे आधिकारिक अकाउंट पर 54 हज़ार फ़ॉलोअर्स थे, और आज हम 1 मिलियन फ़ॉलोअर्स के बेहद करीब हैं।
#Reservation_hatao_andolan
हम तो आँधियों में भी चराग़ों को जलाते रहे,
लोग महफ़िल में रहे, हम घर बचाते रहे।
वार जितने भी हुए, सीने पे खाते ही गए,
मुस्कुराकर हर दफ़ा इल्ज़ाम उठाते रहे।
🙏🙏🙏🙏
"नहीं नगरी में न्याय,रोही आछी राजिया --!"
जिस व्यक्तित्व को मतदाताओं ने अपार समर्थन देकर विजयी बनाया, संगठन एवं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने राजस्थान की वर्तमान सरकार का मुखिया रूप में स्वीकार किया विशेष दायित्व के साथ जो गरीमामयी पद से सुशोभित वर्तमान में "सम्माननीय मुख्यमंत्री राजस्थान" है उस व्यक्तित्व के लिए इस कदर की ब्यान बाजी क्या शोभनीय है। प्रतिक्रिया मर्यादित भाषा में भी की जा सकती है न तो फिर यह अमर्यादित वाग्विलास क्यों --?
क्या राजस्थान सरकार इस पर कोई संज्ञान लेगी --?
दूसरी तरफ हमारे यहां एक संविदा कर्मी जो कि मात्र 15000/ मासिक वेतन लेने वाले ने एक दिन किसी व्हाट्सएप समुह में एक विनोद रूपी पोस्ट कर दी कि " एक शंख को लेकर जो किसी प्रसंग वश मुख्यमंत्री जी ने शायद प्रधानमंत्री जी को भेंट किया होगा और वह न्युज अथवा चित्र देखकर उक्त संविदा कार्मिक ने एक हास्यास्यात्मक टिपण्णी कर दी कि वह बात ठेट शिक्षामंत्री जी तक पहुंची और तत्काल उस कार्मिक के लिए शासन सचिव कार्यालय से निलंबन का आदेश हुआ जो कि अब निलंबित है।
संविदा कार्मिक ने अपनी और से प्रयास किये माफी मांगी, अनुनय-विनय किया मगर परिणाम शून्य --?
जवाब एक ही था कि माननीय मुख्यमंत्री जी व प्रधानमंत्री जी के लिए अशोभनीय टिप्पणी अक्षम्य है अतः सदैव निलंबन ही रहेगा । खैर --!
अब पुनः उसी बात पर आते हैं कि एक अल्पज्ञ का अपराध यदि इस कदर दंडनीय है तो इन नेताजी ने भी कोई बिरूद बखान तो नहीं किये है। कोई संज्ञान लिया जाएगा क्या --?
मेरा यह प्रश्न हैं --?
या फिर "समर्थ को नहीं दोष गुसांई"
मेरा किसी से कोई द्वेष नहीं है पर प्रश्न तो भ्रम उत्पन्न कर रहा है यदि कोई समाधान करें तो।
सियावर रामचंद्र की जय----
राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा में शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी का जलवा,
उत्तर हो या दक्षिण पुर्व हो चाहे पश्चिम....?
दशो दिशाओं में भाटी के शुभचिंतक हमेशा अपने नेता के लिए पलक पांवड़े बिछाकर घंटों तक बेसब्री इंतजार करते रहते हैं यह हैं जनता का प्यार
अद्भुत आदित्य, अविस्मरणीय जनसमर्थन!
आज बांसवाड़ा की धरती पर जननायक रविन्द्र सिंह भाटी के प्रति उमड़ा जनसैलाब यह स्पष्ट संदेश दे गया कि जनता का विश्वास और स्नेह किसी भी राजनीतिक शक्ति से बड़ा होता है। जिस प्रकार हजारों लोगों ने अपने प्रिय नेता के स्वागत में सहभागिता निभाई, वह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि जनभावनाओं का विराट प्रदर्शन था।
धन, वैभव और सत्ता तो समय के साथ प्राप्त हो जाते हैं, किंतु जनता का निस्वार्थ प्रेम, आशीर्वाद और विश्वास विरले ही नेताओं को मिलता है। रविन्द्र सिंह भाटी ने अपने संघर्ष, सरलता और जनसेवा के माध्यम से जो स्थान लोगों के हृदय में बनाया है, उसका प्रमाण आज बांसवाड़ा में देखने को मिला।
यह अभूतपूर्व जनसमर्थन आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित करेगा। निस्संदेह, जनता के इस अपार प्रेम ने पक्ष और विपक्ष दोनों की बेचैनी बढ़ा दी है। यह केवल भीड़ नहीं, बल्कि परिवर्तन, विश्वास और नेतृत्व के प्रति जनता की अटूट आस्था का प्रतीक है।
कुछ लोग कहते हैं कि "रविन्द्र सिंह भाटी की नहीं चलती।"
उन्हें शायद जनता के बीच जाकर हकीकत देखने की जरूरत है।
आज भी ऐसे कई मामले सामने आते हैं जहाँ बड़े-बड़े नेताओं और मंत्रियों के रेफरेंस के बावजूद लोगों को अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। लेकिन जब बात रविन्द्र सिंह भाटी की आती है, तो उनका एक नाम ही कई जरूरतमंदों के लिए उम्मीद बन जाता है। एम्स जैसे अस्पताल में तुरंत भर्ती से लेकर उपचार और आवश्यकता पड़ने पर रक्त की व्यवस्था तक, लोग स्वयं इसका अनुभव कर चुके हैं।
राजनीति में असली ताकत पद की नहीं, जनता के विश्वास की होती है।
कुर्सी से अधिकार मिल सकता है, लेकिन लोगों के दिलों में जगह केवल सेवा और संघर्ष से बनती है।
आपका स्नेह और विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है।
जालौर प्रवास के दौरान जब मैं विभिन्न कार्यक्रमों में व्यस्त था, तब जानकी निवासी श्री मदन जी सैन ने बड़े स्नेह और आत्मीयता के साथ अपनी दुकान पर पधारने का आग्रह किया। मन तो था कि उनके आग्रह को स्वीकार कर उनसे अवश्य मिलूं, लेकिन लगातार कार्यक्रमों और समयाभाव के कारण वहां पहुंच पाना संभव नहीं हो सका।
दिनभर की व्यस्तताओं के बाद जब रात गहराती गई और घड़ी ने 01:29 बजे का समय बताया, तब भी मदन जी उसी आत्मीयता और उत्साह के साथ एक मुलाकात के लिए सायला में अपने प्रतिष्ठान पर प्रतीक्षा कर रहे थे।
ऐसे क्षण थकान का एहसास नहीं होने देते। बल्कि यह महसूस कराते हैं कि लोगों का यह प्रेम, विश्वास और अपेक्षाएं ही जनसेवा की सबसे बड़ी पूंजी हैं। जब कोई व्यक्ति रात के अंतिम पहर तक भी सिर्फ एक मुलाकात के लिए प्रतीक्षा करता है, तो यह जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है कि उसके विश्वास पर हमेशा खरा उतरा जाए।
मदन जी का यह स्नेह और आत्मीयता मेरे लिए अविस्मरणीय है। जनता का यही प्रेम और विश्वास जनसेवा के प्रति मेरे संकल्प को हर दिन और अधिक मजबूत करता है तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति के सुख-दुख में साथ खड़े रहने की प्रेरणा देता है।