@BhajanlalBjp@DIPRRajasthan@GajendraKhimsar
लैब टेक्नीशियन, नर्सिंग, रेडियोग्राफर आदि का स्टॉपिंग पैटर्न 18 साल पुराना 2008का है
पद बढ़ाये नहीं
यह तो सुना था कि संविदा प्रथा को खत्म कर परमानेंट होंगे
लेकिन पहली बार हो रहा है कि परमानेंट हटाकर संविदा कार्मिक लगाए जा रहे हैं
@BJP4India@npanchariyabjp चिकिविभाग के अहम अंग #लैबटेक्नीशियन, जोकि रोग निदान करते है।
वित्तीय और गैरवित्तीय सभी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं,
ग्रेडपे, भत्ते
पदनाम परिवर्तन
नियमित पदोन्नति
कैडर स्ट्रक्चर 19 वर्ष पुराना,
5000 नवीन पद स्वीकृत कीजिए
लैब टेक्नीशियन संवर्ग उपेक्षित है
@RajCMO@RajGovOfficial
@RajCMO@DIPRRajasthan@BhajanlalBjp
संस्थान पर जो डॉक्टर है ही नहीं
मरीज ने उस dr को दिखाया ही नहीं
उसकी साइन शील से स्वयं ही जांच कर रही कृष्णा लैब
मरीज की गजब चिन्ता है निजी लैब को
डॉ को दिखाया नहीं और मरीज की 24 जांच की रिपोर्ट भी प्राप्त हो गई
क्या से क्या हो गया?
विषम परिस्थिति में ( कोविड, स्वाइन फ्लू, ट्यूबरक्यूलोसिस....) अल्प मानदेय 7000 की नौकरी जो राज्य सरकार (UTB संविदा निविदा से प्रदान की गई थी )सरकार से अलग कर हटा दिया गया ,
उसे भी एक निजी हाथों में सोपा गया
मान.न्यायालय ने इसे रोक कर बेरोजगारों के साथ न्याय किया
@DIPRRajasthan
@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@DIPRRajasthan
सरकारी क्षेत्र जांचों का निजीकरण
बिना सैंपल के जांच रिपोर्ट देना
खांसी की जांच में अविवाहिता को प्रेगनेंसी रिपोर्ट पकड़ना
हेपेटाइटिस सी (लिवर कैंसर संभावना) नेगेटिव मरीज को पॉजिटिव बताना
इन सब के ऊपर विभाग की चुप्पी समझ से परे
@1stIndiaNews@DainikBhaskar@svoruganti1466@akhilarora93@RajCMO
अब तक सुनते थे की संविदा को परमानेंट करेंगे
पहली बार चिकित्सा विभाग का आदेश है कि परमानेंट को हटाकर संविदा पर लगाएंगे
पहले जांचों का निजीकरण
जांचों की गुणवत्ता?
अब परमानेंट पद खत्म
संविदा को ही परमानेंट?
@RajSampark@BhajanlalBjp@svoruganti1466 MNJY
हब स्पोक मॉडल पीपीपी मॉडल से krsna लैब कंपनी लिमिटेड द्वारा पूरे राजस्थान में FDS में जो जांचे की जा रही है वो गुणवत्तापूर्ण जांचे नहीं है
कम्पनी द्वारा लगातार टेंडर शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा है
बेहतर होगा हब स्पोक मॉडल टेंडर ख़ारिज करे ओर फर्म ब्लैकलिस्ट होना चाहिए
@1stIndiaNews@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@KumariDiya
हम सरकार के कार्मिक हैं
जनहित में,सरकारहित हित में, यूवा हित
जांचों के गुणवत्ता बनाए रखने के लिए केवल अपनी बात पहुंचा सकते हैं
विचार करना ना करना उच्च स्तरीय कार्य लेकिन सही बोलने पर ही नोटिस देना प्रदर्शित करता है....?
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हम सरकार के कार्मिक हैं
जनहित में,सरकारहित हित में, यूवा हित
जांचों के गुणवत्ता बनाए रखने के लिए केवल अपनी बात पहुंचा सकते हैं
विचार करना ना करना उच्च स्तरीय कार्य लेकिन सही बोलने पर ही नोटिस देना प्रदर्शित करता है....?
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हम सरकार के कार्मिक हैं
जनहित में,सरकारहित हित में, यूवा हित
जांचों के गुणवत्ता बनाए रखने के लिए केवल अपनी बात पहुंचा सकते हैं
विचार करना ना करना उच्च स्तरीय कार्य लेकिन सही बोलने पर ही नोटिस देना प्रदर्शित करता है....?