'Telegram Ban’ - मोदी सरकार का पेपर लीक रोकने का नया नुस्खा।
यानी चोर को पकड़ने के बजाय, पीड़ित के घर पर ताला लटका दो।
लाखों छात्र सालों से Telegram पर पढ़ते हैं - नोट्स, टेस्ट सीरीज़, डिस्कशन, तैयारी। वो सुविधा छीन लेना पेपर लीक का समाधान कैसे हुआ?
और यह फूलप्रूफ भी नहीं है - यह देश का हर छात्र जानता है, और पेपर लीक माफ़िया भी। फिर अगला ban किसपर लगाएंगे? WhatsApp?
परीक्षा के दिन छात्रों की तलाशी होगी। जेबें कैंची से काटी जाएँगी। प्रश्नपत्र वायुसेना से भेजे जाएँगे। दिखावे की कोई कमी नहीं होगी।
पर बीमारी की जड़ पर एक वार भी नहीं - क्योंकि पेपर लीक माफ़िया इसी सरकार की देख-रेख में फल-फूल रहा है, और युवाओं को खून के आँसू रुला रहा है।
मोदी जी - दिखावा छोड़िए। माफ़िया पर वार कीजिए, छात्र पर नहीं।
‘छात्रों की गूंज’ सुन लीजिए - वरना देश का युवा अपना हक़ लेना जानता है।
#ChhatronKiGoonj
मेरे युवा और Gen Z साथियों,
एक बात मेरे मन में साफ़ है और आप भी इसे दिल में बैठा लीजिए: भारत के हर युवा का भविष्य सुरक्षित करना सरकार की ज़िम्मेदारी है।
पर ज़िम्मेदारी और ईमानदारी - दोनों मोदी सरकार की सोच से परे हैं।
पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन, रद्द होती भर्तियाँ, आसमान छूती फीस, निजीकरण, घोटाले - इन्हीं औज़ारों से वो हर दिन करोड़ों सपने तोड़ रही है।
याद रखिए, युवा का भविष्य ही देश का भविष्य तय करेगा। यही सब आपसे विस्तार से कहना है। इसलिए मैं आपको बुला रहा हूँ - देश की हर गली, हर कस्बे, हर शहर से उठती ‘छात्रों की गूंज’ को, आइए कोटा में हुंकार बनाएँ।
🗓️ 17 जून | छात्रों की गूंज | कोटा महारैली
#ChhatronKiGoonj
सार्थक 18 साल का है - पर सोच, साहस और सिद्धांत में किसी से कम नहीं।
उसने और उसके साथी निसर्ग ने वो कर दिखाया जो देश के बड़े मीडिया हाउस, खोजी पत्रकार नहीं कर पाए - CBSE और COEMPT की मिलीभगत को देश के सामने रख दिया।
मोदी जी चाहते हैं हमारे युवा reels बनाते रहें, पकौड़े तलते रहें, सवाल न पूछें, आँखें न खोलें। पर इन बच्चों ने सवाल भी पूछे। और जवाब भी ढूँढ निकाले।
देश का 18 साल का बच्चा CBI से तेज़ निकला - नौजवानों की ये जीत सही मायने में सरकार की हार है।
यही है भारत की असली युवा शक्ति - जिज्ञासु, जागरूक, जानकार। और याद रखिए, देश का भविष्य किसी बहकावे में नहीं आएगा।
अपराधी को किसी जाति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए लेकिन अगर अपराधी चीख-चीख कर अपनी जाति बताए तो मजबूरन हमें यह मानना हीं पड़ेगा कि इस देश में अपराधियों की भी एक जाति है?
NEET से जुड़ी पहली चर्चित पीड़िता थीं तमिलनाडु की दलित बेटी अनिता।
गरीब परिवार, मजदूर पिता, बचपन में मां का साया छिन गया, घर में शौचालय तक नहीं था। फिर भी तमिल माध्यम के सरकारी स्कूल में पढ़कर उसने 1200 में से 1176 अंक हासिल किए और जिले की मेधावी छात्राओं में शामिल हुई।
लेकिन NEET जैसी व्यवस्था ने उसकी मेहनत, संघर्ष और प्रतिभा को कोचिंग उद्योग के सामने छोटा कर दिया। अनिता ने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और कहा कि यह परीक्षा ग्रामीण, सरकारी स्कूलों और वंचित समाज के छात्रों के साथ अन्याय करती है।
उसकी आवाज़ नहीं सुनी गई। 1 सितंबर 2017 को अनिता ने आत्महत्या कर ली।
आज सवाल यह है कि सरकार शिक्षा को अवसर का माध्यम बनाना चाहती है या अमीरों और कोचिंग माफियाओं का विशेषाधिकार?
अनिता सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की शिकार बेटी है जिसने प्रतिभा से ज्यादा पैसे को महत्व दिया।
#JusticeForAnitha #NEET #EducationForAll #DalitStudents
Since the NEET paper leak controversy came to light, five students, Pradeep Meghwal, Ritik Mishra, Siddhartha Hegde, Anshika Pandey and Akanksha Chaturvedi have reportedly died by suicide.
NEET is conducted by the National Testing Agency (NTA), headed by Chairman Pradeep Joshi. Despite the growing concerns and the tragic loss of young lives, neither has he resigned nor publicly expressed regret over the situation.
It is a deeply disturbing and shameful state of affairs that young students are losing their lives while those responsible remain unaccountable.
मोदी जी, कुर्सी स्थायी नहीं होती है वो आती-जाती रहती है लेकिन आपने 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को जिस हद तक बर्बाद किया है
उसकी कीमत भारत की एक पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है : राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष
कॉकरोच ही नहीं कीड़े मकोड़े हैं लोग।
रोज कटकर, दबकर, जलकर मर जाते हैं दर्जनों लोग।
दिल्ली के मालवीय नगर में जलकर मर गए 10 इंडियन 11 विदेशी मतलब कुल 21 कॉकरोच।
सरकार और होटल मालिकों की मिलीभगत से चल रहे भ्रष्ट व्यवस्था के हवन में जलकर स्वाहा हो गए इतने लोग
लाखों विद्यार्थियों की अहम परीक्षा का बंटाधार करने के एवं में दी गई कड़ी कार्रवाई ये है - साहब को जेल नहीं हुई, निलंबित तक नहीं किया गया, किसी किस्म की कोई सजा नहीं - उन्हें बाकायदा कृषि विभाग में अतिरिक्त सचिव पद से नवाजा गया है. #CBSEClass12
CBSE अध्यक्ष - ट्रांसफ़र।
CBSE सचिव - ट्रांसफ़र।
एक-सदस्यीय “जाँच” समिति - गठित।
और असल ज़िम्मेदार, धर्मेंद्र प्रधान - सुरक्षित।
अधिकारियों को हटा दिया। मंत्री को बचा लिया।
यह जवाबदेही नहीं - यह cover-up है।
हमारी माँग आज भी वही है: शिक्षा मंत्री को बर्ख़ास्त किया जाए और स्वतंत्र न्यायिक जाँच हो - ये मांगें कोई मोदी सरकार की एक महीने पुरानी अंदरूनी फ़ाइल नहीं जो यूं ही भुला दी जाए।
अगर प्रधानमंत्री को 18.5 लाख CBSE छात्रों की परवाह होती - धर्मेंद्र प्रधान जी कब के हटाए जा चुके होते।