हज़ारों स्त्रियों के साथ यौन अपराध करने वाले शैतान के समर्थन में वोट माँगने वाले व्यक्ति को आप स्वीकार करते हैं
और फिर 11 साल की बच्ची के साथ रेप करने वालों के लिये फाँसी माँगते हैं
अपने धर्म के बलात्कारियों के पक्ष में जुलूस निकालने वालों का आप समर्थन करते हैं
और फिर 13 साल की बच्ची के साथ बलात्कार करने वाले 32 लड़कों को दरिंदा भी कहते हैं
आपको स्वीकार है कि संसद में बलात्कारी बैठे और देश की नीतियाँ बनाए मगर रोते हैं कि जनता ही बहुत ख़राब है इसमे सरकार क्या करेगी?
आप पहलवान लड़कियों के यौन शोषण की अपील को , उनके दुख पीड़ा को जाट राजपूत की राजनीति कहकर ख़ारिज कर देते हैं,
मगर घर की बेटी को उसी नेता के पास भेजने से पहले 10 बार सोचेंगे.
आप हाथरस की बच्ची के बलात्कार पर चुप रहते हैं कि वह दलित है
सरकार जब बिलकिस बानो के बलात्कारियों को मालाएँ पहना कर प्रोत्साहन देती है तो आपको लगता है कि सही ही करती है, इनके साथ ऐसा ही होना चाहिए
फिर इतने मासूम भी बने रहते हैं कि बलात्कारी हमेशा दूसरे धर्म की और सनातनी पायदान पर नीचली कहे जाने वाली जाति की लड़कियों का ही बलात्कार करेंगे. समान धर्म और जाति वालों की लड़कियों का नाम जाति धर्म पूछकर छोड़ देंगे.
जब आप बलात्कारियों के पक्ष में ताली थाली बजाते ही हैं, जब आपको कुछ शर्तों के साथ समाज मे बलात्कार के वैध होने पर कोई ऐतराज है ही नहीं, तो प्लीज़ देश की बच्चियों पर हो रहे शारीरिक अपराधों पर दुखी होने का नाटक मत कीजिये. इतना दोगलापन भी ठीक नहीं.
यह निरंतर वहशी होता समाज हमारा ही बनाया हुआ है,
हम एक बेहद स्त्री द्वेषी समाज हैं,
ऐसे समाज में बच्चियों का बलात्कार नही होगा तो कहाँ होगा
अपराधियो को फाँसी मिले , ठीक
और हमको?
नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितम्बर को हुआ था
7+1 =8
पहलगाम आतंकी हमले मे 26 लोग मारे गए थे
2+6=8
भारत की सबसे खराब पासपोर्ट रेकिंग 125 हैँ
1+2+5=8
NEET पेपर हुआ 3 मई को जो लीक हुआ
3+5=8
नोटबंदी जिस दिन हुई तारीख थी 8 नवम्बर
मोदी जी टीवी पर भी रात 8 बजे ही आते है
देख रहे हो बिनोद.. 8 के ठाठ.. मोदी के साथ
@budhwardee ये गधे हैं
इनको छांट कर रखा गया है ताकि इन लोगों से इस तरह का कम लिया जा सके
ये लोग अब नासूर बन गए हैं इनको जूतों से मार मार कर खदेड़ना पड़ेगा
वरिष्ठ पत्रकार शीतल प्रसाद सिंह जी लिखते हैं-
“सारे नोएडा के मीडिया चैनलों ने और असंख्य यूट्यूबर्स ने अयोध्या चढ़ावा चोरी का मास्टरमाइंड/ मुख्य अभियुक्त टिन्नू यादव को घोषित कर रक्खा था ।
अब FIR के बाद जो पुलिस जांच चल रही है और कल जो कोर्ट में मुख्य अभियुक्त बताकर रिमांड माँगी गई और मिली वह अविनाश शुक्ला की है ।
कैश बरामदगी की हर खबर में पंद्रह से बीस लाख रुपये की बरामदगी, डालर की बरामदगी और सोने चाँदी की बरामदगी जिनके यहाँ हुई वे यादव नहीं थे ।
टिन्नू के घर से कुल एक लाख रुपये बरामद करने की बात इसी दुष्प्रचार वाहिनी को स्वीकार करनी पड़ी (यह एक लाख रुपये भी मंदिर चढ़ावे के हैं कि निजी हैं यह भी स्पष्ट नहीं है)।
टिन्नू यादव के लखनऊ में फ्लैट और फार्चूनर का भी अब कहीं कोई ज़िक्र नहीं है । प्रसार भारती से सोलह करोड़ रुपये सालाना इनाम पाने वाले सुधीर चौधरी भी आरोप लगाकर अब ग़ायब हैं!
हम कितने जातिवादी लोग हैं और हमेशा पिछड़े दलित आदिवासी,स्त्री , व गरीब लोगों को ही टार्गेट करने के दोषी हैं?”
सच कहने की हिम्मत सबमें नहीं होती है, सलाम है @Sheeetalps जी 🫡
इस देश का सिस्टम कितना बेतरतीब है इस खबर से समझिए।
महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा किया है कि Sting कोल्ड ड्रिंक स्कूल से 500 मीटर के दायरे में नहीं बेची जानी चाहिए।
सरकार का मानना है कि,
Sting पीना स्वास्थ्य के लिए घातक है, इसे बच्चे न पिएं इसलिए स्कूल के आस पास नहीं मिलनी चाहिए।
यानि केवल स्कूल के आस पास नहीं मिलेगी बाकी जगह मिलेगी आप आराम से लेकर गटक सकते हैं।
जब पता है कि यह घातक है तो इसे बनाने वाली कंपनी को बैन करने से भारत सरकार को कौन रोक रहा है?
नरेंद्र मोदी समझते है कि विश्व भर के देशों से अवार्ड ले कर वो दुनिया के सबसे बड़े नेता बन जाएंगे
लेकिन असलियत यह है कि अब सब समझने लगे है कि उनको फालतू के अवार्ड दिए जाते है
ऐसे अवार्ड जो पहले किसी को नहीं मिला है,और आगे भी किसी को नहीं मिलेगा
आज एक विदेशी पत्रकार ने साफ लिखा है कि मोदीजी को अवार्ड दो तो वो दौड़े दौड़े तुम्हारे देश पहुंच जाएंगे
इतिहास में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की ऐसी बेइज्जती कभी नहीं हुई थी
एथेनॉल आपके इंजन के लिए वैक्सीन है।
बस फर्क इतना है कि वैक्सीन लगने से पहले डॉक्टर टेस्ट करता है, बाद में रिपोर्ट देखता है। यहाँ पहले टैंक भरवाइए, रिपोर्ट बाद में आएगी।
इंजन अगर खाँसने लगे तो समझिए इम्यून सिस्टम एक्टिव हो गया है।
माइलेज घट जाए तो कहिए, वैक्सीन अपना असर दिखा रही है।
और अगर मरम्मत का बिल बढ़ जाए तो समझ लीजिए, राष्ट्रहित में हल्के-फुल्के साइड इफेक्ट तो चलते हैं।
वैसे भी आजकल हर प्रयोग का नया नाम है सुधार।
और हर दिक्कत का नया नाम संक्रमण काल।
इंजन पूछ रहा है,
मुझे वैक्सीन लगी है या क्लीनिकल ट्रायल में भर्ती कर लिया गया है?
आखिर में मालिक मुस्कुराकर कहता है
देश आगे बढ़ रहा है बस मेरा इंजन पीछे छूटता जा रहा है।😎
अयोध्या में पहले से ही शंकराचार्यों का ट्रस्ट था जिसने कोर्ट और सरकार को लिख कर दिया कि हमारे पास अनुभव है,हम मंदिर बनाएँगे
लेकिन अपने खास कार्यकर्ताओं को Set करके सरकार ने यह राम मन्दिर ट्रस्ट बनाया क्योंकि वो कुछ ऐसा करना चाहते थे जिसकी भनक किसी को ना लगे
जो चोर है वही जॉंचकर्ता बनेगा तो कैसे निर्णय होगा ?”
- शंकराचार्य जी महाराज
आज से 32 साल पहले मई 1991 में 3 मूर्ति मार्ग से मेरे पिता की शव यात्रा निकल रही थी – प्रियंका गांधी
मेरे पिता आगे सेना की गाड़ी में तिरंगे से लिपटे हुए थे, मेरी मां, मेरे भाई राहुल दूसरी गाड़ी में उनके पीछे थे..।
तभी राहुल ने कहा मां मुझे गाड़ी से नीचे उतरना है मां ने मना कर दिया सुरक्षा का देखते हुए, लेकिन राहुल ने जिद्द नहीं छोड़ी...!
मैने मां से कहा उतरने दो तो राहुल गाड़ी से नीचे उतरे और मेरे पिता की शव की गाड़ी के पीछे पीछे चले..।
यहां आकर मेरे भाई राहुल गांधी ने मेरे पिता को मुखाग्नि दी, उस राहुल गांधी को ये देशद्रोही, मीर जाफर कहते।
राहुल गांधी और मेरी मां पर सदन में उनके मंत्री अपमान करते हैं, मेरे शहीद पिता का अपमान सदन में करते.....।
"BJP मुर्दाबाद" कहने पर जिला बदर? — जज ने कहा: नागरिक गुलाम नहीं हैं
आज बॉम्बे हाईकोर्ट में कुछ असाधारण हुआ।
एक जज ने वह कहा — जो शायद ही कभी किसी अदालत ने इतनी साफगोई से कहा हो।
जस्टिस माधव जामदार ने कहा — "नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे प्रदर्शन नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते — यह क्या है?"
मामला क्या था
Socialist Democratic Party of India के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी CAA और ज्ञानवापी विवाद के खिलाफ मोर्चे और धरने आयोजित कर रहे थे।
मुंबई पुलिस ने उन्हें एक साल के लिए जिला बदर कर दिया — पांच FIR के आधार पर जो ज़्यादातर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए थीं।
जस्टिस जामदार ने यह आदेश देखा।
और आगबबूला हो गए।
जज ने जो कहा — वह इतिहास में दर्ज होगा
"याचिकाकर्ता ने तो सिर्फ 'BJP Government Murdabad', 'Amit Shah Murdabad' जैसे नारे लगाए। नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए जिला बदर आदेश क्यों?"
"पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की सेवक नहीं है — वे जनसेवक हैं। मैं आपके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाऊंगा।"
"अगर लोग विरोध करें तो आप केस थोप देंगे — यह क्या है? नागरिकों का प्रदर्शन करना उनका अधिकार है।"
और फिर — "वॉशिंग मशीन" वाली टिप्पणी
जस्टिस जामदार ने महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे "horse-trading" पर भी टिप्पणी की।
उन्होंने कहा — "एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और राज्य विधानसभा में चर्चा हो रही थी कि Presiding Officer कैसे चुना जाए और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे shift हो गया। पूरे महाराष्ट्र में horse-trading चल रही है — केस बदलने पर विचार करें, वॉशिंग मशीन है।"
फैसला
जस्टिस जामदार ने अपने आदेश में लिखा — "सरकार के फैसलों का विरोध करने और उसके खिलाफ नारे लगाने मात्र से किसी नागरिक को जिला बदर नहीं किया जा सकता। यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण है और संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।"
जिला बदर आदेश रद्द।
यह फैसला इतना बड़ा क्यों है
आज के भारत में —
जहाँ असहमति को देशद्रोह कहा जाता है।
जहाँ विरोध प्रदर्शन पर UAPA लगाया जाता है।
जहाँ "BJP मुर्दाबाद" कहने पर जिला बदर किया जाता है।
एक जज ने खड़े होकर कहा — नागरिक गुलाम नहीं हैं।
पुलिस प्रधानमंत्री की नौकर नहीं है।
विरोध करना — अधिकार है।
यह फैसला नज़ीर है।
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क्योंकि जब अदालतें जागती हैं —
तो लोकतंत्र सांस लेता है।