आप सांसद राघव चड्ढा ने सदन में उठाया मोबाइल रिचार्ज का मुद्दा
◆"रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग कॉल बंद होना सरासर मनमानी है"- राघव चड्ढा
◆ इनकमिंग कॉल बंद करना हमारे Right to Communication को बंद करने जैसा है- राघव
प्रिय @yadavakhilesh जी🙏
ये खत आपको तब लिख रहा हूं जब हमारी सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं। मैं यूपी लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की तैयारी करता हूं विशेषतौर पर UPPCS और RO/ARO की।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग 2019 से माइग्रेशन यानी ओवरलैपिंग नियम का पालन नहीं कर रहा है जिसका सीधा सा मतलब ये है कि अगर आरक्षित वर्ग यानि OBC/SC/ST/EWS/PH/WOMEN वर्ग का कोई प्रतियोगी छात्र यदि UR कैटेगरी से ज्यादा नंबर प्राप्त करता है तो भी उसे UR कैटेगरी में पास नहीं किया जाएगा जो सीधे सीधे आरक्षण के संवैधानिक नियमों का उल्लंघन है।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी राजस्थान के एक मामले में स्पष्ट किया कि यदि आरक्षित वर्ग यानि OBC/SC/ST/EWS/PH/WOMEN वर्ग का कोई उम्मीदवार UR कैटेगरी से ज्यादा नंबर प्राप्त करता है तो उसे अनारक्षित वर्ग में चयनित किया जायेगा फिर भी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग अपनी मनमानी करते हुए आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के अधिकार पर डाका डाल रहा है।
हम सभी आरक्षित वर्ग के छात्र RO/ARO 2023 और UPPCS 2025 के मामले में माइग्रेशन लागू करने के लिए माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट में केस भी लड़ रहे लेकिन कल आयोग ने RO/ARO 2023 MAINS परीक्षा का एडमिट कार्ड भी जारी कर दिया जबकि इसके प्री परीक्षा के रिजल्ट्स में माइग्रेशन नियम का पालन नहीं हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के हालिया डिसीजन को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को स्वतः माइग्रेशन नियम लागू कर देना चाहिए था लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है।
हम सभी आरक्षित वर्ग (OBC/SC/ST/EWS/PH/WOMEN) के प्रतियोगी छात्रों की अंतिम उम्मीद आप ही हैं 🙏
हम सभी व्यक्तिगत रूप से आपसे मिलकर इस मामले को डिटेल में आपके समक्ष रखना चाहते है ताकि लाखों की संख्या में तैयारी करने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार का भविष्य अंधकारमय न हो और उनके संवैधानिक आरक्षण के अधिकार का हनन न हो।
आशा है कि मेरा ये पत्र आप तक जरूर पहुंचेगा और आप इस पर संज्ञान भी लेंगे🙏🙏
आउटसोर्सिंग भर्तियों में भी गडबडझाला खूब होता है. सुनने में आया है कि जितना वेतन साल दो साल में मिलेगा उतना तो ठेकेदार एकमुश्त रक़म पहले ही झपट लेते हैं क्या ऐसा है?
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देश के सबसे साफ शहर में गंदा पानी पीने से 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जिस शख्स पर लोगों को साफ पानी पिलाने का जिम्मा है वो सवालों को फोकट बता रहे हैं हमारे सवालों को "घंटे" में उड़ा रहे हैं @manishdekoder@GargiRawat@Abhinav_Pan@sanket
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में नकली फैक्ट्री पर बड़ी कार्रवाई –
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 14 DEC 2025 को लोनी मीरपुर गांव में एक अवैध नकली दवा फैक्ट्री को पकड़ा है।
बड़ी मात्रा में नकली BETNOVATE C ,CLOP G , Skinshine जैसे शेड्यूल एच मलहम और अन्य सामग्री बरामद हुई है ।
जब्त माल की कीमत अगभग 2.3 CR बताई जा रही है वहीं पुलिस ने गौरव भगत और विशाल गुप्ता को गिरफ्तार किया है ।
जब दवाइयां ही सुरक्षित नहीं है तो आम नागरिक किस पर भरोसा करे ?
नीति से बड़ी प्राथमिकता जनता की सेहत होनी चाहिए जिससे बड़े स्तर पर खिलवाड़ किया जा रहा था ।
This is how Software is booking tatkal tickets . Within 1 minutes. And we as common ppl try to book and we are just left with transaction error or no seats left.
Dear @IRCTCofficial@RailMinIndia@RailwaySeva
Why don't you all take action against all these set up ? What are you waiting for ?
@khurpenchh@SpokespersonIR@ChapraZila@Bihar_se_hai .thoda kariye zara isko share
आज हालात ये हैं कि हर फल-सब्ज़ी शक के दायरे में है।
लोकी , तरबूज , पपीता जैसे फलों में इंजेक्शन और केमिकल डाले जा रहे हैं ताकि वजन और रंग बढ़े।
भिंडी , टमाटर , हरी सब्ज़ियों में खतरनाक रसायन और कीटनाशक तय सीमा से कई गुना ज़्यादा।
दूध और घी में डिटर्जेंट, सिंथेटिक फैट, यूरिया और पाम ऑयल की मिलावट।
वेजिटेबल ऑयल नकली या रिफाइंड कचरे से बना हुआ।
मिठाइयाँ सिंथेटिक खोया, नकली रंग और सड़े तेल से तैयार।
पनीर असली दूध से नहीं, बल्कि केमिकल और घटिया फैट से बनाया जा रहा है।
बच्चों के लिए खरीदा गया खाना भी स्लो पॉयज़न बन चुका है।
सवाल सिर्फ़ क्या खाएँ का नहीं, सवाल है , किससे शिकायत करें?
FSSAI काग़ज़ों में एक्टिव है, ज़मीन पर ग़ायब।
फूड इंस्पेक्टर बिना “सेटिंग” के दुकान में कदम नहीं रखते।
कार्रवाई होती भी है तो छोटे विक्रेता पर, बड़े सप्लायर बच निकलते हैं।
आम आदमी के पास न सही जानकारी है, न भरोसेमंद सिस्टम।
जब खाना जहरीला , निगरानी बिकाऊ और शिकायत का रास्ता बंद हो ,
तो ये सिर्फ़ मिलावट नहीं, सिस्टम द्वारा थोपी गई मजबूरी है।
यही वजह है कि आज सबसे बड़ा सवाल है कि
हम जिएँ तो कैसे जिएँ?
दोनों तस्वीरें उत्तर प्रदेश की हैं।
दोनों में यूपी पुलिस “सेवा” कर रही है।
एक तस्वीर में—
कांवड़ियों के पैर दबा रही है पुलिस,
क्योंकि लोग थक गए हैं।
दूसरी तस्वीर में—
रोज़गार, भर्ती और सरकारी नौकरियों में चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ
सवाल पूछते युवा हैं—
और पुलिस उन्हें
घसीट रही है, दौड़ा रही है, बाल उखाड़ रही है, पीट रही है।
यह कोई संयोग नहीं,
यह नीति है।
यह प्रदेश अब योगी का है
यहाँ अंधभक्ति करोगे तो फूल बरसेंगे,
और रोज़गार, हक़ और न्याय माँगोगे तो लाठियाँ बरसेंगी।
उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग चेयरमैन संजय श्रीनेत पर इतने सवाल हैं,
कि संसद में बहस का टाइम कम पड़ जाए!!
पेपर लीक, धांधली, गड़बड़ी, परीक्षा स्थगित होने का अद्भुत रिकॉर्ड है।
न कट ऑफ की पारदर्शिता का होना, न प्राप्तांकों को ज़ाहिर करना,
और तो और परीक्षाओं में 15 गुना क्ववालिफाई कराने के अपने ही फैसले का अचार बना देना!!
इतना ही नहीं, धांधली का विरोध करने उतरे छात्रों पर चलती लाठियां और पुलिसिया दमन उनके बायोडाटा का चंद्रहार हैं!!
आलम ये है कि उनकी अगुवाई वाला आयोग इलाहाबाद हाईकोर्ट तक में परीक्षाओं में गड़बड़ी का सच स्वीकार करने पर मजबूर हो चुका है।
मगर मजाल है कि संजय श्रीनेत पर कोई एक्शन हो जाए!
सवाल ये भी है कि यूपी लोकसेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव पर बहस करने वाले लोग संजय श्रीनेत पर मौन क्यों हैं?
जब उस गलत को गलत कहा, तो इस गलत को गलत कहने में होंठ क्यों सिले जा रहे हैं?
अब अखबारों के पन्नों की स्याही कम पड़ गई है, या चैनलों का लाइसेंस खतरे में पड़ गया है?
अब तक तो विधानसभा से लेकर संसद तक संजय श्रीनेत के कामकाज का श्वेतपत्र जारी हो जाना चाहिए था।
रामधारी सिंह दिनकर लिख गए हैं-
“समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याध!
जो तटस्थ है, समय लिखेगा, उसका भी अपराध!!”
यूपी लोक सेवा आयोग
माइग्रेशन की पालिसी लागू करे
हर परीक्षा के बाद कट आफ़ जारी करे
परीक्षा के बाद Answer sheet जारी करे
आरक्षित वर्ग OBC EBC SC ST EWS PH के साथ धांधली करना बंद करें
📢भारत में रामसर स्थलों की संख्या
बढ़कर 96 हो गयी है।
💠2 नयी आर्द्रभूमियों को रामसर स्थल के रूप में मिली मान्यता
▶️सिलीसेढ़ झील अलवर, राजस्थान
▶️कोपरा जलाशय बिलासपुर, छत्तीसगढ़
रामसर स्थलों में निरन्तर वृद्धि के साथ भारत प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर रहा है।
@AIRNewsHindi
🚨🚨 Alert
मुखर्जीनगर से जुड़े तमाम यूट्यूब चैनलों को साफ़ चेतावनी है। अगर आप बिना किसी जांच-पड़ताल के धौलपुर हाउस के आसपास जाकर किसी भी व्यक्ति को हिंदी माध्यम का कैंडिडेट बताकर वीडियो बनाते हैं और उसे यूट्यूब पर डालकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं, तो याद रखिए, आपको कटघरे में खड़ा किया जाएगा।
हिंदी माध्यम यूपीएससी के नाम पर सिर्फ कोर्ट-पेंट पहनकर फोटो खिंचवा लेने वालों से इंटरव्यू करना है तो पहले उनका पूरा ब्यौरा सामने लाइए।
नाम, रोल नंबर, किस स्टेज तक पहुंचे, किस सूची में नाम है। सब कुछ।
भावनाओं से नहीं, सबूतों से बात कीजिए।
हिंदी माध्यम कोई तमाशा नहीं है, न ही थंबनेल और व्यूज़ बटोरने का औज़ार।
या तो सच दिखाइए, पूरी जिम्मेदारी के साथ।वरना यह भ्रम फैलाने का खेल ज्यादा दिन नहीं चलेगा।
#Awareness
#upscmotivation
#UPSCPrelims2026
माइग्रेशन का मुद्दा नेशनल मीडिया में गूंज रहा है🔥
उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग में हो रहे "माइग्रेशन घोटाला" के मुद्दे को समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता श्री @ManojSinghKAKA जी ने नेशनल मीडिया में उठाया है।
हम सभी साथी इसी मुद्दे पर #15_दिसंबर_महाआंदोलन_प्रयागराज_चलो का नारा बुलंद किए है।
लड़ेंगे जीतेंगे✊
अपना हक छीनकर लेंगे✊
#UPPCS ने बड़े चालाकी से सरा ठीकरा #UPSC के पैटर्न पे फोड़ दिया है. वो कह रहे हैं कि हम तो वही फॉलो कर रहे हैं जो यूपीएससी कर रही है.
गजब. माने आंसर की न देने से ,कटऑफ न बताने से कौन सा तीर मार लेते हैं ये.
और यूपीएससी को खुद बोलना चाहिए इनको कि तुम अपने आप में एक संवैधानिक संस्थान हो अपना खुद का तरीका अपनाओ. और कायदे से यूपीएससी और तमाम ऐसे संस्था जो प्रीलिम्स के मार्क्स और कटऑफ और आंसर की फाइनल सिलेक्शन के बाद देते हैं,उनका हाल हम सब जानते हैं. अभी बिल्कुल ताज़ा ताजा मैने हिमाचल प्रदेश पीसीएस का हाल देखा है जूडिशियरी के पेपर में,,जब इन्होंने फाइनल सिलेक्शन के बाद प्रीलिम्स की चीज़ें बताई. ये कुछ भी आंसर मान लेते हैं, और ज्वाइनिंग दे देते हैं.
#UPSC के चेयरमैन सर तक अगर मेरी बात पहुंच रही है,या कोई उन तक इस बात को पहुंचा सकते हैं तो जरूर बताइए कि ये प्रीलिम्स का पूरा खेल प्रीलिम्स के रिजल्ट के साथ हीं खत्म कर दें। फिर ये राज्य वाले आयोग फॉलो करेंगे कि नहीं वो देखना पड़ेगा.
भारत देश में कितनी आसानी से लाखों को साल 2 साल तक अंधेरे में रखा जाता है,शर्म आता है देख के. क्या संसद,न्यायालय,आयोग खुद सब के सब अंधे बने हैं.
अभिशाप स हो गया है,देश में प्रतियोगी छात्र या छात्र बन ना. कोई है जो बच्चों की व्यथा सुन सकता है?
इतने बड़े बड़े अधिकारी हैं,पर सब के सब अंधे हुए पड़े हैं. पारदर्शिता कहां है ? बताइए? इंटरव्यू लेने वाले लोग हमें जज करते हैं,वो खुद को आईने में क्यों नहीं देखते?
181 पोस्ट के लिए कल निकली वेकेंसी के सामने rpsc ने कितनी आसानी से मात्र 4 बच्चों को सेलेक्ट किया. 40% का मापदंड रख दो और सवाल ऐसा बना दो कि कोई ला हीं न पाए,,क्या मतलब है,पेपर लेने का फिर ?
क्या बच्चों के पैसे खर्च नहीं होते आने जाने में ? कौन जवाबदेही लेगा ?
2 साल से झारखंड आयोग ने जूडिशियरी का प्रीलिम्स लेने के बाद मैंस तक नहीं लिया है अभी.. कौन जिम्मेदार हैं इसके लिए?
इन आयोग ,खुद को अधिकारी बोलने वाले IAS,IPS,और नेताओं ने न जाने कितने बच्चों की जिंदगी खराब कर दी है. इनके वजह से उन्हें अपनी कमियों का हीं नहीं पता चल पाता. उम्र निकल जाती है। परिवार, समझ सब गालियां देते हैं,और एक कड़वी सच्चाई पर 100 फीसदी सच है,नौकरी के वजह से कई ज़िंदगी एक दूसरे से दूर भी हो जाती है.
यही अमृत भारत है क्या ? यही सरकार बदलने से देश में बदलाव आया है ? कोई मीडिया है जो पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करेगा?
क्यों नहीं राज्यों के CM और आयोगों के चेयरमैन से सवाल पूछे जा रहे हैं,की आखिर क्यों सालों तक एक एक वैकेंसी को टाला जात है.
बस चुनावों से पहले चंद पैसे बांट दो,और सरकार बना लो,,यही चल रहा देश में. सवाल पूछना आज देश में एक अपराध सा हो गया है. सही जा रहे हैं हम.... बहुत खूब. शर्म आना चाहिए हमें.