प्रिय सम्मानित जनता,
कल दिनांक 18 अक्टूबर 2025, सुबह 11 बजे मैं सासाराम विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र चुनाव के लिए एनडीए समर्थित उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से नामांकन दाखिल करुँगी।
आप सभी फैज़लगंज स्टेडियम, सासाराम में उपस्थित होकर अपना आशीर्वाद दें।
प्रिय सासाराम वासियों,
आगामी 18 अक्टूबर 2025 को सुबह 11 बजे मैं सासाराम विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र चुनाव के लिए एनडीए समर्थित उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से नामांकन दाखिल करुँगी।
अपनी उपस्थिति और सहभागिता से इस कार्यक्रम को सफल बनाएं।
"गरीबों के हित में काम करना मेरा पहला कर्तव्य"
जिस तरीके से कुशवाहा जी ने समाज के शोषित, वंचित, पिछड़ा, गरीब वर्ग के लिए काम करना शुरू किया उन्हीं के पद चिह्न पर चलते हुए जनसेवा सेवा करना राजनीति में मेरा पहला कर्तव्य रहेगा।
#RLM#NDA#RashtriyaLokMorcha#SnehlataKushwaha
आगामी 18 अक्टूबर 2025 को सुबह 11 बजे मैं सासाराम विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र चुनाव के लिए एनडीए समर्थित उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से नामांकन दाखिल करुँगी।
अपनी उपस्थिति और सहभागिता से इस कार्यक्रम को सफल बनाएं सासाराम के विकास के लिए अपना समर्थन दें।
"मिसाइल मैन ऑफ इंडिया" के नाम से मशहूर महान वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, युवाओं के प्रेरणास्रोत और देश के पूर्व राष्ट्रपति "भारत रत्न" डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम साहब की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटिश: नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
#WATCH | रोहतास, बिहार: RLM के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, "अगर RJD के लोग घर बैठे पहलवान बनते रहें तो क्या दिक्कत है। जीत या हार इस बात पर निर्भर करेगी कि जनता में पहलवान कौन है। जनता जिस पर मेहरबान होती है, वही पहलवान होता है और जनता NDA पर मेहरबान है क्योंकि NDA की सरकार ने दिल्ली से लेकर पटना तक काम किया है, इसलिए जब जनता एक बार फिर NDA के पक्ष में खड़ी है तो RJD के लोग चाहे जितना भी ताल ठोक लें, कोई फर्क नहीं पड़ेगा।"
#कारगिल_विजय_दिवस पर देश के सभी वीर सपूतों को हार्दिक वंदन । आज का दिन अपने सैनिकों के साहस, शौर्य और समर्पण की याद दिलाता है। मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले पराक्रमी योद्धाओं को भावभीनी श्रद्धांजलि। #KargilVijayDiwas2025
बिहार सहित समस्त देशवासियों को कारगिल विजय दिवस की हार्दिक बधाई। देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले रणबांकुरों को कोटिशः नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
#KargilVijayDiwas2025
बिहार के युवाओं के साथ न्याय तभी संभव है जब राज्य में डोमिसाइल नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। यह नीति स्थानीय युवाओं को राज्य की नौकरियों में प्राथमिकता देकर न सिर्फ उनका हक सुनिश्चित करेगी, बल्कि उन्हें अपने ही राज्य में सम्मान और स्थायित्व भी देगी।
इससे बेरोजगारी की मार झेल रही युवा पीढ़ी को नई उम्मीद मिलेगी और पलायन जैसी मजबूरी पर भी रोक लगेगी। अब समय आ गया है कि बिहार में डोमिसाइल नीति बहाल हो और बिहार के नौजवानों को न्याय मिले।
हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद माननीय Upendra Kushwaha जी की दूरदर्शिता और सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप अब औरंगाबाद तथा अरवल के छात्र-छात्राओं को विशेष लाभ मिलने जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री रहते हुए उन्होंने जिस केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए पहल की थी, वही पहल आज इन छात्रों के भविष्य को नई दिशा देने जा रही है। यह उपलब्धि उनके जनप्रतिबद्ध नेतृत्व और शिक्षा के प्रति उनके गहन समर्पण का सजीव प्रमाण है।
#Bihar #rashtriyalokmorcha #UpendraKushwaha #NDAGovernment #kendriyavidyalaya
हिंदी पट्टी के राज्यों ने इतिहास के हर कठिन दौर में देश का नेतृत्व किया, चाहे वह विदेशी आक्रमण हो, औपनिवेशिक शोषण हो या आज़ादी का संघर्ष। लेकिन आज़ाद भारत में आपातकाल के दौरान नीतियों में जब राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बात आई, तो सबसे ज़्यादा उपेक्षित भी यही क्षेत्र रहा।
ऐसे में यह कहना कि जनसंख्या के आधार पर पुनर्सीमांकन करने से संघीय असंतुलन बढ़ जाएगा। यह न केवल तर्कहीन है, बल्कि उन राज्यों के ऐतिहासिक योगदान को भी नज़रअंदाज़ करता है, जिन्होंने हमेशा देशहित को प्राथमिकता दी।
लोकतंत्र की बुनियाद तभी मज़बूत होती है जब उसमें समानता, न्याय और सहभागिता के तत्व जीवित रहें। किसी क्षेत्र को उसके ऐतिहासिक योगदान और वर्तमान यथार्थ से काटकर देखना, संविधान की उस भावना के विरुद्ध है, जिसमें सभी को समान अधिकार और सम्मान देने की परिकल्पना की गई थी।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा का प्रत्येक कार्यकर्ता इस विश्वास के साथ खड़ा है कि अब और देर नहीं की जा सकती। आबादी के आधार पर निष्पक्ष पुनर्सीमांकन होना ही लोकतांत्रिक न्याय है।
आगामी 2026 में यह प्रक्रिया आरंभ हो और इसके लिए ठोस योजना बने। इसे किसी भी हाल में फिर से स्थगित न किया जाए।
पिछले पचास वर्षों से जिन राज्यों ने इस असंतुलन की पीड़ा सही है, अब उन्हें उनका संवैधानिक अधिकार मिलना ही चाहिए।
#संवैधानिक_अधिकार_परिसीमन_सुधार #UpendraKushwaha
देश की सांस्कृतिक विविधता में भोजपुरी भाषा एक जीवंत प्रतीक के रूप में सदियों से अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रही है। यह केवल एक संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की अस्मिता, परंपरा और सामाजिक चेतना से जुड़ी हुई भाषा है। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और देश के विभिन्न हिस्सों में फैली भोजपुरी भाषी आबादी लगातार यह माँग कर रही है कि भोजपुरी को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिया जाए।
यह माँग कोई तात्कालिक राजनीतिक आग्रह नहीं, बल्कि वर्षों से चल रही एक गहरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। संसद से लेकर सड़कों तक, बुद्धिजीवियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक—हर स्तर पर यह स्वर बार-बार उठता रहा है कि जिस भाषा में लोकगीतों की मिठास है, लोकसंस्कृति की समृद्ध परंपरा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जिसकी पहचान स्थापित हो चुकी है, उसे अब तक संवैधानिक मान्यता क्यों नहीं मिल पाई?
भोजपुरी भाषियों की यह पीड़ा अब प्रश्न बन चुकी है। क्या किसी भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलाने के लिए भाषा की समृद्धि, उसके बोलने वालों की संख्या और उसका सांस्कृतिक योगदान ही पर्याप्त नहीं है?
वर्तमान समय में जब देश ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के भाव के साथ विविधताओं को सम्मान देने की ओर अग्रसर है, ऐसे में भोजपुरी जैसी प्राचीन और व्यापक भाषा की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए।
सरकार से यह अपेक्षा है कि वह वर्षों से प्रतीक्षारत इस माँग को गंभीरता से लें और भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल कर, लाखों नागरिकों की भाषा को उसका संवैधानिक सम्मान प्रदान करे।
भाषा केवल अभिव्यक्ति नहीं, पहचान होती है। और पहचान को सम्मान देना, लोकतंत्र की बुनियादी जिम्मेदारी है।
भोजपुरी मात्र एक भाषा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की सांस्कृतिक पहचान, भावनात्मक अभिव्यक्ति और ऐतिहासिक विरासत है। यह भाषा उन खेतों की मिट्टी से जुड़ी है जहाँ मेहनतकश किसान गीतों में जीवन ढूंढते हैं, उन चौपालों से उठी है जहाँ समाज अपनी बात साझा करता है, और उन गीतों में बसी है जो संघर्ष, प्रेम और परंपरा की अनुगूंज बनकर पीढ़ियों से गूंजते रहे हैं।
बिहार ही नहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और देश की सीमाओं से बाहर मॉरिशस, फिजी, सूरीनाम जैसे देशों तक भोजपुरी का प्रभाव आज भी जीवंत है। बावजूद इसके, वर्षों से भोजपुरी भाषियों की यह न्यायपूर्ण मांग ठंडी फ़ाइलों में दबी रह गई है कि इसे भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित किया जाए। यह केवल भाषिक सम्मान का विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक आत्मसम्मान से जुड़ा प्रश्न है। अब समय आ गया है कि सरकार इस ऐतिहासिक उपेक्षा का अंत करे और भोजपुरी को वह संवैधानिक स्थान प्रदान करे, जिसकी वह वर्षों से अधिकारी हैं।
बिहार के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कराना हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह माननीय सांसद श्री उपेंद्र कुशवाहा जी की प्रतिबद्धता रही है।
यह सिर्फ विद्यालय की माँग नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से समान अवसर और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक गंभीर पहल है।
पूर्व में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री रहते हुए उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में जो कार्य प्रारंभ किए थे, उन्हें अब राज्यसभा सांसद के रूप में अपने प्रश्नों के जरिए निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं।
देवकुंड (औरंगाबाद) और नवादा जैसे क्षेत्रों में केन्द्रीय विद्यालयों की स्थापना की माँग, उसी संकल्प का हिस्सा है।
(Note: प्रश्नोत्तर कॉमेंट बॉक्स में संलग्न किया जा रहा है)
बिहार की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और समावेशी बनाने के निरंतर प्रयासों के तहत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह माननीय सांसद श्री @UpendraKushRLM ने राज्यसभा में देवकुंड (औरंगाबाद) एवं नवादा जिले में नए केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना को लेकर केंद्र सरकार से सवाल(अतारांकित) किया, जिसका जवाब संबंधित मंत्री जी ने दिया है।
आदरणीय उपेंद्र कुशवाहा जी सदैव शिक्षा को सामाजिक न्याय की बुनियाद मानते हुए हर मंच पर बिहार के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्ध आवाज रहे हैं। यह सवाल भी उसी संकल्प का हिस्सा है – जहाँ शिक्षा केवल नारा नहीं, सामाजिक न्याय की बुनियाद है।
भोजपुरी बोलने वाले करोड़ों लोग आज भी संवैधानिक सम्मान से वंचित हैं। अब समय आ गया है कि भोजपुरी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए, ताकि इसकी सांस्कृतिक और भाषाई गरिमा को उचित मान्यता मिल सके।
#संवैधानिक_सम्मान#भोजपुरी_भाषा#UpendraKushwaha#Bihar