प्रेम बांटने की जिम्मेदारी लिए
धरती पर उतरी स्त्रियां
इस कदर छली गई
प्रेम में
कि
अब हर कातर नजर से
छल के कीचड़ में
ऐसे प्रेम ढूंढती है
मानो हाथ से कोई मोती
छूट गया हो,
परंतु हर पुरुष को छूते ही
वही कीचड़ अपने हाथ पाती है,
कुछ घर खिड़कियों से नहीं,
दीवारों पर बची हुई छुअनों से खड़े रहते हैं।
वरना दरवाजों में इतनी उम्र कहाँ,
कि वे किसी के लौट आने की आशा
सदियों तक ढो सकें !!!
दरवाज़े भीतर से बंद होने के दौर में
मैंने खिड़की हो जाना चुना है~~~~❣️❣️
#रिश्ता_रूह_का
एक दिन
उसने बताया
कि उसके यहाँ ठंड काफ़ी बढ़ गई है
पिछले कुछ दिनों से।
मैंने भी कहा
मेरे यहाँ तो
पानी बरस कर थमा है
अभी-अभी।
इस बातचीत में
हम एक-दूसरे के शहरों की नहीं,
एक-दूसरे की बात कर रहे थे।
सुरक्षित यात्रा और महिला सशक्तिकरण साथ-साथ.।
महायुति सरकार और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे जी की यह पहल मुंबई महानगर क्षेत्र में महिलाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोल रही है ।
@mieknathshinde 👏
अब मैं उस अवस्था में हूँ .....
जहाँ न किसी के बदल जाने से पीड़ा है ....
न किसी के दूर चले जाने से आश्चर्य ....
क्योंकि समय ने यह भली भाँति समझा दिया है .....
कि अधिकांश संबंधों की नींव निष्ठा पर नहीं .....
स्वार्थ और सुविधा पर टिकी होती है .....
मनुष्य साथ भी वहीं तक निभाता है .
यादों का स्पर्श भी कितना अजीब होता है,
छूता तो नहीं, फिर भी रूह तक महसूस हो जाता है।
कभी मुस्कान बनकर होंठों पर ठहर जाता है,
तो कभी आँखों में खामोश बारिश छोड़ जाता है।
❤️🩹❤️🩹
रस , रूप , रंग नित संग संग ।
हो गया पराजित भी अनंग ।
जीवन है या है उमंग ।
कान्हा में कितने निहित रंग ।
उन रंगों को शत शत प्रणाम ।
कान्हा राधा दोनो अकाम ।।
- अरुणेश मिश्र
कुछ अधूरा सा रह गया
था,अंतर्मन क�� कलश में...
जिसे भरने की चाह में
मन की कई सरहदें
पार कर ली मैने..
धुंधला गई हर नज़र और
नज़रिया मन का ये कौन कौन सी
हदें बे हदें कर ली मैने
राह भूली हूं या भटकी हूं
कुछ खबर ही नहीं
हर खबर से बेखबर
ये रूह कर ली मैने..
Shubh ratri everyone