@alokrajRSSB जी प्लीज रिप्लाई करो !
चिंता से चतुराई घटे ,
घटे रूप और ज्ञान !
चिंता बड़ी अभागनी,
हैं यह चिता समान !!
चिंता को शान्त करने का काम कीजिए ! बहुत परेशान हो गए है आप से अनुरोध है। रास्ता क्लियर करो ! 🙏🙏����
भाई सुप्रीम कोर्ट। ये पचास साल पुराना भारत नहीं है जब अबोध जनता आपको देवता मानती थ��। जनता संसद की सर्वोच्चता क़ायम करके रहेगी। आपका मन कर रहा है क़ानून बनाने का तो चुनाव लड़कर सरकार बना लो।
#SaveReservation
भारतीय आरक्षण प्रणाली प्रतिनिधित्व का मामला है या ग़रीबी हटाओ योजना?
अगर प्रतिनिधित्व का मामला है तो जिनका प्रतिनिधित्व हमेशा से रहा है उनको EWS reservation क्यों?
कांग्रेस सरकार ने साल 2010 में NEET की अवधारणा रखी.
NEET को क्यों लाया गया ?
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स्टेट बोर्ड के अंतर्गत स्थानीय भाषा में पढ़ने वाले छात्रों को डॉक्टर इंजीनियर बनने से रोकने के लिए NEET सिस्टम को लाया गया. राज्यों की भाषा में पढ़ाई सरकारी स्कूलों में होती है जहां OBC SC ST वर्ग के गरीब घरों के छात्र पढ़ते हैं.
NEET किस तरह स्थानीय भाषा में पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य बर्बाद कर रहा है ?
NEET का पाठ्यक्रम NCERT के पाठ्यक्रम पर आधारित है. NEET का पेपर 720 अंक का होता है. राज्यों के स्टेट बोर्ड का पाठ्यक्रम NEET से बिल्कुल अलग होता है.
● प्रमाण 1 - 2018 के NEET परीक्षा में 600 से ज्यादा ��ंक हासिल करने वाले 3000 छात्र अंग्रेजी मीडियम से थे. केवल एक छात्र राज्य भाषा से था.
● प्रमाण 2 - 500 से ज्यादा अंक पाने वाले 23,000 छात्र अंग्रेजी मिडियम से पढ़े थे. और सिर्फ 84 छात्र राज्य भाषा से पढ़ने वाले थे.
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इन आंकड़ों से येही लगता है अंग्रेजी माध्यम के छात्र बेहतर हैं और ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र कमतर हैं ? नही, ऐसा नही है. NEET का सिस्टम ही अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाले छात्रों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाया गया है.
तमिल नाडु स्टेट बोर्ड के बारहवीं की परीक्षा में 98% अंक हासिल करने वाली स्कॉलर अनिता NEET में काफी कम अंक हासिल किया और डॉक्टर बनने से महरूम हो गयी.
अनुसूचित जाति की अनिता सुप्रीम कोर्ट में NEET से भिड़ गयी. अनिता की याचिका में दलील.
1 - राज्यों का पाठ्यक्रम और NEET के पाठ्यक्रम में ज़मीन आसमान का अंतर.
2 - बिना कोचिंग के NEET पास करना कठिन है. अच्छे कोचिंग संस्���ान शहरों में हैं जहां लाखों रुपए फीस वसूली जाती है. ग्रामीण इलाकों के छात्रों कोचिंग क्लास नही कर पात��.
3 - NEET में अंग्रेजी माध्यम का पेपर सरल और आसान आता है, जबकि राज्यों की भाषा में पेपर काफी कठिन होते हैं.
4 - NEET का राष्ट्रीय पाठ्यक्रम बिल्कुल अनजान सा लगता है. राज्य के बोर्ड में 98% अंक लाने वाले ग्रामीण छात्र हताश महसूस करते हैं.
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अनिता और अन्य आठ छात्रों की याचिका के खिलाफ BJP सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में NEET के पक्ष में बहस करने लिए पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम को खड़ा किया. NEET सुप्रीम कोर्ट में केस जीत गया और अनिता डॉक्टर बनने का सपना हार गयी.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के नौ दिन बाद 1 सितंबर 2017 को अनिता ने आत्महत्या कर NEET और सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ विद्रोह कर दिया.
NEET का पूरा सिस्टम द्रोणाचार्य ने ऐसा बनाया है सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले OBC SC ST छात्र अंग्रेजी माध्यम के छात्रों से कॉम्पिटिशन नही कर पाए.
NEET को पूरी तरह खत्म करने की मांग होनी चाहिए.
PHOTO : SCHOLAR ANITA (2000 - 2017)
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आपने जाति धर्म से ऊपर उठकर न्याय के लिए आवाज उठाई इसके लिए बहुत बहुत धन्य वाद।
हम लोग मिलकर न्याय के लिए संघर्ष करेंगे और सरकार को झुकने के लिए मजबूर करेंगे।
@MDDANISH952574 अमित शाह के बेटे जय शाह को टैलेंट के बेस पर ही तो bcci का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
ऐसे तमाम उदाहरण है पर आप देखना नही चाहते।
भारत एक जातिवादी देश है ये accept कर लो डिफेंड मत करो
जो लोग कहते है ना की आरक्षण का लाभ केवल st,sc, obc वाले लेते ���ै वो ये तस्वीर देख लीजिये
प्राइवेट सेक्टर मे तो सवर्णो का 100% आरक्षण है।
Ews का लाभ तो ले ही रहे है।
और आरक्षण के नाम पर बहुजनो को बदनाम करते है।
ये बात बिल्कुल सत्य है कानून अपना काम नही करता और मजबूरी मे लोगो को ऐसा कदम उठाना पड़ता है क्योकि सबको पता है न्याय पालिका से कितने लोगो को न्याय मिलता है।
हालांकि हिंसा नही करनी चाहिए इनके द्वारा थप्पड मारना गलत था ।
मध्यप्रदेश ��र छत्तीसगढ़ के परिणाम जनभावना के अनुरूप नहीं आने के कारण लोगों में निराशा और शंका है। ये वह राज्य जहां बीजेपी का सर्वाधिक अत्याचार और उसका विरोध देखने को मिला। आपको क्या लगता है?
1. धांधली हुई है।
2. लोग ब्रेनवॉश हैं।
आपकी राय और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।
देश के एक बड़े जिम्मेदार पद पर बैठकर एक आदमी पाखंडवाद, अंधभक्ति जैसी चीजो को करने के लिए प्रेरित कर रहा इस पर आप कुछ बोलेंगे?
इस ढोंग के बारे मे आपने जिक्र ही नही किया क्यो?
शा��द इसीलिए लोग बता रहे की मंडल बिक गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कन्याकुमारी में जिस विवेकानंद शिला पर ध्यान साधना कर रहे हैं, वो दो हजार साल पहले आए महान समतावादी तमिल संत कवि तिरुवल्लुवर की विशाल प्रतिमा के पास है. प्रतिमा लगभग 13 मंजिली इ��ारत जितनी ऊंची हैं. इसका वजन 7,000 टन है. हर दिन इसकी छाया विवेकानंद स्मारक पर पड़ती है.
ये उत्तर और दक्षिण का, नवीन और प्राचीन संत परंपरा का संगम है.
नरेंद्र मोदी द्वारा ढोंग, पाखंड, अंधविश्वास पर जोर दिया जा रहा ताकि जनता अंधभक्त बनी रहे और शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार जैसे जरूरी मुद्दों पर सवाल न करें और लोग धर्मांधता को जिंदगी से जरूरी समझे ताकि अंधभक्तों का ब्रे���वास करके आसानी से सत्ता पा ली जाएं। #मोदी_पाखंड_बंद_करो