माननीय प्रधानमंत्री जी से मेरा विनम्र अनुरोध है कि यदि पेपर लीक मामले तथा UGC से जुड़े विवादित प्रावधानों को लागू करने में माननीय धर्मेंद्र प्रधान जी की कोई जिम्मेदारी या दोष सिद्ध होता है, तो लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई की जानी चाहिए��
लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति पद से बड़ा नहीं होता। यदि कोई अधिकारी या मंत्री अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करता और उसके विरुद्ध जनता लगातार आवाज उठाती है, तो सरकार को उस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
जनता की भावनाओं और लगातार उठ रही आवाजों को नजरअंदाज करना लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नहीं है। यदि सरकार को लगता है कि पूरा देश गलत है और केवल वही सही है, तो यह सोच लोकतांत्रिक व्य��स्था के लिए उचित नहीं है।
लोकतंत्र का अर्थ यही है कि जो व्यक्ति अपने दायित्वों में असफल हो या जिसके विरुद्ध गंभीर आरोप हों, उसके विरुद्ध निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई हो। इसलिए मैं प्रधानमंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि धर्मेंद्र प्रधान जी के मामले में केवल इस्तीफे तक सीमित न रहें, बल्कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई भी की जाए।
वीडियो बनाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। लोकतंत्र में संवेदनशीलता, जवाबदेही और जनता की आवाज का सम्मान सबसे आवश्यक है।
@JoshiPralhad जी को केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनने पर पूरे हिंदुस्तान की जनता की ओर से बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक अभिनंदन।
आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है कि आप पिछली शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर कर शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर और ऐतिहासिक सुधार करेंगे। लेकिन आपके पदभार संभालने से पहले शिक्षा व्यवस्था में जो गंदगी पैदा की गई है, उसे साफ करना भी आपकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।
UGC जैसे काले कानूनों को समाप्त कर शिक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष, पारदर्शी और योग्यता आधारित बनाने की दिशा में आप ठोस कदम उठाएंगे—हमें इसका पूर्ण विश्वास है। ��पको इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए ही नियुक्त किया गया है और हमें आशा है कि आप अपनी शक्तियों का उचित एवं प्रभावी उपयोग करेंगे।
साथ ही, हिंदुस्तान को जातिवाद की गंदी राजनीति से मुक्त कर एक समान, मजबूत और विकसित भारत बनाने की दिशा में भी आप महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
आपको पुनः हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
आ��रणीय एवं सम्माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से मेरा विनम्र निवेदन एवं लोकतांत्रिक असहमति है कि देश की शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक समानता, निष्पक्षता और समान अवसर सुनिश्चित किए जाएँ।
मेरा मानना है कि प्रत्येक वर्ग के विद्यार्थी को समान अधिकार और समान अवसर मिलना चाहिए तथा योग्यता और प्रतिभा को उचित प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हमारा उद्देश्य किसी भी वर्ग या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करना होना चाहिए जिसमें हर विद्यार्थी को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।
UGC से संबंधित कानूनों और नीतियों को लागू करने से पहले देश के सभी वर्गों, विद्यार्थियों और राज्यों की भावनाओं एवं हितों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। यदि किसी नीति या कानून से समाज के किसी वर्ग में असंतोष या असमानता की भावना उत्पन्न होती है, तो सरकार को उस पर पुनर्विचार करना चाहिए और आवश्यक होने पर उसे वापस लेना चाहिए।
जब शिक्षा और अवसरों में निष्पक्षता, समानता और योग्यता को प्राथमिकता मिलेगी, तभी हमारा देश वास्तव में मजबूत, समावेशी और एकजुट बनेगा। यह किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे देश और आने वाली पीढ़ियों के हित की बात है।
इस विषय को संवेदनशीलता, शिष्टाचार और मजबूती के साथ उठाइए। देश की जनता चाहती है कि शिक्षा व्यवस्था सभी के लिए समान, निष्पक्ष और अवसरों से भरपूर हो।
Bihar Is Built Different! 💀😂🔥
Bihar’s youngsters were literally asking the police:
“No tear gas? At least bring something stronger!” 😂😭
Then the water cannon arrived… and instead of running away, the protesters turned the entire road into a free rain-dance party! 🌧️💃😂
Police: “Water cannon!” 🚿
Bihari Protesters: “DJ, play the next song!” 😂💀
At this point, even the police must have been thinking:
“Are we controlling a protest… or accidentally organising a monsoon festival?” 😭😂
Nobody can match Biharis when it comes to courage, confidence and comedy. Biharis don’t run from problems—they sometimes dance in them! 😂🔥
And after witnessing this legendary Bihar-style protest, the Education Minister probably thought:
“These students are not going to calm down… maybe I should just resign!” 😂💀
Bihar Is Truly Built Different. There is simply no competition! 🚩🔥
भाई जी, बेहतर होगा कि आप इस आंदोलन से दूर ही रहें। इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश मत कीजिए।
यह लड़ाई किसी पार्टी के खिलाफ नहीं है, न ही किसी जाति के खिलाफ। अगर सच में कुछ करना है, तो UGC जैसे काले कानूनों को खत्म करने की बात कीजिए। देश से आरक्षण समाप्त करने की बात कीजिए। जाति और भेदभाव से ��पर उठकर सभी को समान अधिकार और समान दर्जा देने की बात कीजिए।
अगर दम है, तो ऐसी बातें कीजिए। अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना और गंदी राजनीति करना बंद कीजिए।
और जहां तक प्रधानमंत्री जी की बात है—वह देश को ठीक तरीके से चला रहे हैं। उनके नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है। उनके सामने आपकी राजनीति और बयानबाजी का कोई मुकाबला नहीं है।
युवाओं ने अपने अधिकार और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर एक छोटा-सा आंदोलन किया। माननीय प्रधानमंत्री जी ने युवाओं के अनुरोध और उनके आंदोलन को गंभीरता और संवेदनशीलता से लिया। इसके लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री जी को तहे दिल ��े धन्यवाद देता हूं और हिंदुस्तान की तमाम जनता की ओर से उनका हार्दिक अभिनंदन करता हूं।
अब माननीय प्रधानमंत्री जी से मेरा एक और अनुरोध है—देश में आरक्षण व्यवस्था पर पुनर्विचार कर उसे समाप्त करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाइए। आज आरक्षण का वास्तविक लाभ समाज के हर जरूरतमंद व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसका लाभ बार-बार कुछ सीमित परिवारों और लोगों तक ही सिमट जाता है। देश में सभी नागरिकों ��ो समान अवसर और समान सम्मान मिलना चाहिए।
मेरा विपक्षी दलों से भी अनुरोध है कि युवाओं के इस आंदोलन से दूर रहें। इसे अपनी गंदी राजनीति और राजनीतिक स्वार्थ का माध्यम न बनाएं। वर्षों से देश को जाति और वोट-बैंक की राजनीति में बांटने वाली राजनीति ने देश और समाज को बहुत नुकसान पहुंचाया है।
आज देश का युवा सब समझ रहा है। वह समझ रहा है कि यह व्यवस्था और यह गंदी राजनीति वर्षों से चली आ रही है। इसलिए जो भी राजनीतिक दल इस आंदोलन का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें इससे कोई राजनीतिक फायदा नहीं मिलने वाला।
यह युवाओं और देश की जनता का मुद्दा है—किसी राजनीतिक दल का निजी मंच नहीं। इसलिए विपक्षी दलों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि इस आंदोलन से खुद को दूर रखें। आप अपनी राजनीति अलग से कीजिए; युवाओं और देश की जनता के मुद्दों को अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का माध्यम मत बनाइए।
देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के लिए अपशब्दों का प्रयोग करना हमारी संस��कृति, संस्कार और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। सोशल मीडिया के इस युग में हमारे शब्द पूरी दुनिया तक पहुँचते हैं और उनसे हमारे देश की छवि भी प्रभावित होती है।
मतभेद रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार ��ै, लेकिन अभद्र भाषा का प्रयोग किसी भी संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुँचाता है। प्रधानमंत्री देश का निर्वाचित नेतृत्व और भारत की पहचान का एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि होता है।
मैं देश के सभी युवाओं से विनम्र आग्रह करता हूँ कि वे अपनी ऊर्जा शिक्षा, करियर, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण में लगाएँ। अपनी भाषा में संयम, व्यवहार में शिष्टता और विचारों में मर्यादा रखें। असहमति व्यक्त करें, प्रश्��� पूछें और आलोचना भी करें, लेकिन सम्मानजनक भाषा के साथ।
आइए, हम अपने संस्कारों और भारतीय संस्कृति की गरिमा बनाए रखें और अपने आचरण से भारत का सिर ऊँचा करें।
गाली-गलौज करना केवल असभ्यता नहीं, बल्कि कई परिस्थितियों में कानूनन अपराध भी हो सकता है। ��िसी व्यक्ति, जाति, समुदाय, धर्म या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के प्रति अपमानजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को नुकसान पहुँचाता है।
ऐसी भाषा लोगों में उत्तेजना, वैमनस्य और घृणा पैदा करती है। जब अपमानजनक शब्द सामान्य व्यवहार का हिस्सा बन जाते हैं, तो समाज में बदतमीज़ी और आक्रामकता बढ़ती है, जिससे विवाद, हिंसा और अपराध की संभावना भी बढ़ जाती है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार किसी की गरिमा, सम्मान और कानून की सीमाओं का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं देता। मतभेद रखें, आलोचना करें, परंतु सभ्य, संयमित और सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें। यही एक जिम्मेदार नागरिक और सशक्त समाज की पहचान है। @narendramodi @AmitShah @indiankanoon
अब तक ���े राजनीतिक इतिहास में मुझे ऐसा दूरदर्शी और विलक्षण नेतृत्व बहुत कम देखने को मिला है, जैसा आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का है। मेरा मानना है कि उनसे संवाद और सकारात्मक जुड़ाव का प्रयास करना ��ाहिए। यदि जनता अपनी समस्याएँ शालीनता और गंभीरता से रखे, तो उनके समाधान की संभावना बढ़ती है।
मैं विशेष रूप से युवाओं से आग्रह करता हूँ कि वे किसी के बहकावे में न आएँ। लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन हमारा उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि देश का विकास और जनहित होना चाहिए। हमारी माँगें संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से रखी जानी चाहिए।
मेरा सुझाव है कि एक प्रतिनिधिमंडल बनाक�� प्रधानमंत्री जी से मुलाकात की जाए और भारतीय संस्कृति, सभ्यता तथा मर्यादा के अनुरूप अपनी बात रखी जाए। लोकतांत्रिक संवाद और सकारात्मक प्रयासों से समाधान का मार्ग अवश्य निकल सकता है।
विकास हमारा लक्ष्य है, और राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए।
माननीय शिक्षा मंत्री महो��य @JoshiPralhad
जी,
सविनय निवेदन है कि देश के अनेक निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस के अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के अनावश्यक शुल्क, जुर्माने (फाइन), दंड, अन्य बिल तथा अतिरिक्त वसूली की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। एक सामान्य परिवार अपने बच्चे को मेडिकल शिक्षा दिलाने के लिए पहले ही अत्यधिक आर्थिक बोझ उठाता है, लेकिन उसके बाद भी अभिभावकों पर तरह-तरह के अतिरिक्त शुल्क थोप दिए जाते हैं।
कई मामलों में छ���त्रों और उनके अभिभावकों को मानसिक दबाव, भय और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। यह आशंका बनी रहती है कि यदि वे आवाज उठाएँगे तो उनके बच्चे की पढ़ाई या कॉलेज में स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसी कारण अनेक अभिभावक मजबूरी में अतिरिक्त धनराशि देने के लिए विवश हो जाते हैं।
यह स्थिति शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। सरकार को इस विषय पर गंभीरता से ध्यान देन��� चाहिए और निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस संरचना, जुर्माने तथा अन्य सभी प्रकार की वसूली की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। यदि निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त अवैध या अनुचित वसूली हो रही है, तो उस पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
मेरा विनम्र अनुरोध है कि निजी मेडिकल कॉलेजों पर प्रभावी नियामक व्यवस्था लागू की जाए, ताकि छात्रों और अभिभावकों का आर्थिक तथा मानसिक शोषण रोका जा सके और चिकित्सा शिक्षा सभी के ���िए अधिक न्यायसंगत एवं पारदर्शी बन सके।
धन्यवाद।
आज का सबसे बड़ा युद्ध किसी जाति, धर्म या पार्टी का नहीं है; सबसे बड़ा युद्ध अज्ञान बनाम ज्ञान का है।
जो युवा अपना समय केवल बहस, ट्रोलिंग और नफ़रत में खर्च करता है, वह दूसरों का भविष्य नहीं, अपना भविष्य खो देता है। आने वाले वर्षों में वही आगे बढ़ेगा जिसके पास कौ��ल (skills), अनुशासन (discipline), चरित्र (character) और निरंतर सीखने की आदत (continuous learning) होगी।
याद रखिए—डिग्री अवसर दिला सकती है, लेकिन क्षमता पहचान दिलाती है। मोबाइल आपकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बन सकता है और सबसे बड़ी ताकत भी; यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उससे मनोरंजन खरीदते हैं या ज्ञान।
भारत का भविष्य सरकारें अकेले नहीं बदलेंगी; पढ़ने वाले, सीखने वाले, ईमानदारी से काम करने वाले और एक-दूसरे को आगे बढ़ाने वाले युवा बदलेंगे।
अगर हर युवा रोज़ 1 घंटा नई चीज़ सीखने, 1 घंटा शरीर को स्वस्थ रखने और 1 अच्छा काम समाज के लिए करने का संकल्प ले ले, तो देश बदलने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा।
नफ़रत से भीड़ बनती है, ज्ञान से राष्ट्र बनता है।