शंकर शिव भोले उमापति महादेव
पालनहार परमेश्वर,
विश्वरूप महादेव
पालनहार परमेश्वर,
विश्वरूप महादेव
महादेव, महादेव, महादेव…
महादेव...... महादेव.......
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय।
हर हर हर हर महादेव।🔱📿🌿
जय श्री राम।📿🚩
#सप्रेम_सुप्रभातम।🙏🌹
आज वार्षिक नवरात्रि का तीसरा दिन है आज मां चंद्रघंटा देवी की पूजा का विधान है,
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटेति रुपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः🚩
ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते🚩
#जय_मां_चंद्रघंटा🙏🚩
जाने क्या मुझसे ज़माना चाहता है
मेरा दिल तोड़कर मुझे ही हंसाना चाहता है
जाने क्या बात झलकती है मेरे इस चेहरे से
हर शख्स मुझे आज़माना चाहता है🌶🍒
#आज़माना
😉😎🤓🤞
ममता की छांव में ही मिलता है सच्चा सुकून 🙏
माँ का स्पर्श ही सबसे बड़ा आशीर्वाद है…
जहां विश्वास हो, वहां हर डर खत्म हो जाता है l
माँ चन्द्रघण्टा की कृपा ऐसे ही अपने भक्तों पर बनी रहे 🙏🌺
#माँ_चन्द्रघण्टा#नवरात्रि#जयमातादी 🚩🪔
बहुत समय पहले की बात है, जब भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का दिव्य विवाह तय हुआ। चारों ओर आनंद और उत्सव का माहौल था। देवताओं को बारात में आने का निमंत्रण दिया गया और सभी बड़े उत्साह से तैयार होने लगे।
जब सभी देवता एकत्र हुए, तब आपस में विचार होने लगा कि गणेश जी को साथ ले जाया जाए या नहीं। कुछ देवताओं ने कहा—“गणेश जी बहुत भोले और भारी शरीर वाले हैं, उन्हें साथ ले जाना उचित नहीं होगा। वे अधिक भोजन भी करते हैं, इसलिए उन्हें यहीं रहने देते हैं।”
ऐसा निश्चय कर सभी देवता गणेश जी को वहीं छोड़कर बारात लेकर चल पड़े।
उधर नारद जी ने यह बात गणेश जी को बताई और कहा—“आज आपका बहुत बड़ा अपमान हुआ है। आपको जानबूझकर बारात में नहीं ले जाया गया।” यह सुनकर गणेश जी को क्रोध आ गया।
उन्होंने अपने वाहन मूषकों (चूहों) को आदेश दिया कि मार्ग की भूमि को भीतर से खोखला कर दें। जैसे ही बारात आगे बढ़ी, रथों के पहिए जमीन में धँसने लगे। सभी देवता परेशान हो गए, बहुत प्रयास किया, पर रथ आगे नहीं बढ़ा।
अंततः एक बढ़ई (खाती) को बुलाया गया। वह आया, स्थिति को देखा और रथ के पहिए को छूते हुए बोला—“जय गजानंद जी!” इतना कहते ही रथ तुरंत बाहर निकल गया।
देवताओं को बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होंने पूछा—“तुमने गणेश जी का नाम क्यों लिया?” खाती ने विनम्रता से उत्तर दिया—“गणेश जी का स्मरण किए बिना कोई भी कार्य सिद्ध नहीं होता। वे विघ्नहर्ता हैं, उनके बिना सब कार्य अधूरे रहते हैं।”
तब सभी देवताओं को अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने तुरंत एक दूत भेजकर गणेश जी को आदरपूर्वक बुलाया और उनसे क्षमा माँगी। पहले गणेश जी का विवाह रिद्धि और सिद्धि के साथ संपन्न कराया गया, उसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विवाह हुआ।
उस दिन से यह परंपरा बनी कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश का स्मरण अवश्य किया जाता है, ताकि कार्य निर्विघ्न पूर्ण हो।
बोलो श्री गणेश भगवान की जय! 🙏✨
🌻🌺 जय श्री गणेश
मैं तूफान हूँ, लेकिन बारिश भी,
जो खुद को रोक नहीं पाती,
फिर भी सबको भिगो देती हूँ।
लोग देखते हैं सिर्फ़ मेरी कठोरता,
पर अंदर से मैं वो फूल हूँ,
जो हल्की सी हवा पर भी झुक जाती हूँ।
#सुप्रभात_जिंदगी#सुगंधा#हर_हर_महादेव#वंदे_मातरम्
💞जय श्री राधे राधे 💞
अतीत में जीवन जीना,
दूसरों से ज्यादा उम्मीद रखना,
आवश्यकता से अधिक सोचना और
अपने आपको दूसरों से अधिक बुद्धिमान मानना
यह चारों अंतः दुख का कारण बनते हैं....!!
‼️🙏🦚जय श्री राधे कृष्ण 🦚🙏‼️
🍵❣️#शुभ_संध्या❣️🍵
शिव की कर ले कल्पना, जैसी वैसा जान
शिव को कोई भी कहाँ, कब पाया अनुमान
महादेव महनीय हैं, असुरेश्वर निष्काम
देवेश्वर कमनीय को, करतीं उमा प्रणाम
🕉️जय श्री महाकाल 🕉️जय भोलेनाथ 🕉️
🕉️ॐ नमः शिवाय 🕉️ हर हर महादेव 🕉️
राधारानी और श्रीकृष्ण का प्रेम सर्वोच्च है, जहाँ वे एक-दूसरे का श्रृंगार करते हैं। वृन्दावन में 'शृंगार वट' के स्थान पर राधारानी ने श्रीकृष्ण का श्रृंगार किया था, और वहीं श्रीकृष्ण ने भी फूलों से राधारानी को सजाया था। यह लीला उनके निस्वार्थ प्रेम, भक्ति और परस्पर समर्पण को दर्शाती है, जहाँ राधा कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए सजती हैं। 🙏🏻🪈
#विरक्त_मन_शिवमय_होना_चाहता_है
इतना भटकाव, इतना भ्रम?
मैं शिथिल, ऊर्जाहीन
हो बैठी हूँ महादेव 🔱
इतनी अनासक्ति, विरक्ति,
सब मोह, छलावा, माया
आखिर क्या? महादेव!
मेरा हाथ क्यों नहीं थाम लेते,
क्यों मन अस्थिर हो
व्याकुल हो बैठा है,
क्यों श्वास भी दीर्घ नहीं आती?
मैं वैराग्ण बनी
हर बंधन से मुक्त हो,
जाने क्या पा लेना चाहती हूँ —
किंचित ही "तुम्हें शिव",
तुम्हें स्वयं के समक्ष चाहती हूँ।
रिक्त मन, विरक्त मनोदशा,
भावहीन हो हर बंधन से
मुक्ति चाहता है।
#ॐनमः_शिवाय 🔱
#हर_हर_महादेव_शिव_शंभू_ॐ 🙏
@BazmKavyamanch #बज़्म