कैसी हो ?
ठीक हूं ! तुम कैसे हो ?
मैं भी ठीक हूं
उपर की तीन लाइनों का सिटी स्कैन किया जाए तो हजारों गम , लाखों ख्वाहिशें और बेहिसाब अंत किये गए सपने मिलेंगे , और इन सभी पर “ठीक हूं कि ओढ़ाई गई चादर मिलेगी”
ये है असली तस्वीर .. जब मीडिया के कैमरे बंद हो जाते हैं , नेताओं के भाषण ख़त्म हो जाते हैं , तब ये ग़रीब पहुंचते हैं जो बचा तेल है दीपों का उसे ले जा रहे हैं जिससे इनका घर का चूल्हा जल जाएगा..ख़ैर वैसे भी यूपी का चुनाव तो पाकिस्तान और क़ब्रिस्तान में लड़ा जाता है..
हिटलर ने जर्मनी में अनेक सड़कों, भवनों, संस्थाओं और दूसरी चीज़ों के नाम बदल दिए थे। इतिहास में अमर हो जाना चाहता था वह।
आज उसके नाम से कुछ नहीं है। असल में उसका नाम भी शर्म का प्रतीक है।