भाजपा एक मशीन बन गई है
यहां से चंदा डालो वहां से धंधा निकालो ।
BJP की लाइन बिलकुल स्पष्ट है-
चंदा देते जाओ, धंधा लेते जाओ !!
मोदी जी भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने चले थे,
रास्ते में ख़ुद ‘वसूली गुरु’ बन गए!
- @Radhika_Khera जी
फांसी से पहले सरदार भगत सिंह और उनके साथियों ने अंग्रेज सरकार को लिखा -
"युद्ध छिड़ा हुआ है और यह लड़ाई तब तक चलती रहेगी जब तक कि शक्तिशाली व्यक्तियों ने भारतीय जनता और श्रमिकों की आय के साधनों पर अपना एकाधिकार कर रखा है- चाहे वे अंग्रेज पूँजीपति हों या भारतीय ही हों, उन्होंने आपस में मिलकर एक लूट जारी कर रखी है। चाहे शुद्ध भारतीय पूँजीपतियों के द्वारा ही निर्धनों का खून चूसा जा रहा हो तो भी इस स्थिति में कोई अंतर नहीं पड़ता।"
……
"हमने कभी कोई प्रार्थना नहीं की और अब भी हम आपसे किसी प्रकार की दया की प्रार्थना नहीं करते। हम आप से केवल यह प्रार्थना करना चाहते हैं कि आपकी सरकार के ही एक न्यायालय के निर्णय के अनुसार हमारे विरुद्ध युद्ध जारी रखने का अभियोग है। इस स्थिति में हम युद्धबंदी हैं, अत: इस आधार पर हम आपसे माँग करते हैं कि हमारे प्रति युद्धबन्दियों-जैसा ही व्यवहार किया जाए और हमें फाँसी देने के बदले गोली से उड़ा दिया जाए।"- भगत सिंह
सरकार के साधन और शक्ति से देश के ऊपर थोपे जा रहे RSS-BJP के स्वघोषित कथित "वीर" की याचिका-
"सरकार अगर कृपा और दया दिखाते हुए मुझे रिहा करती है तो मैं अंग्रेजी सरकार के प्रति वफादारी का कट्टर समर्थक रहूँगा। मैं सरकार की किसी भी हैसियत से सेवा करने के लिए तैयार हूँ।" - विनायक दामोदर सावरकर
यह सिर्फ दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं का अंतर है।
भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और तमाम शहीदों की शौर्य स्मृतियों को नमन!
"लिख रहा हूँ मैं अंजाम जिसका, कल आगाज़ आएगा
मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लाएगा..."
मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले हमारे महान क्रान्तिकारियों — शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव को हम विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
कृतज्ञ राष्ट्र इन वीर सपूतों के त्याग एवं बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।
#ShaheedDiwas
वक़्त के भीषण सागर में एक लहर मेरी भी है ,
गुमनामी की काली खामोशी में लहरी एक मेरी भी है,
जलते सूरज की स्वर्णिम आभा में एक किरण मेरी भी है,
कंकरीले रेतीले मरुधर में एक तपीश मेरी भी है,
भर आयी विहीन आँखों में एक आँसूँ मेरा भी है,
भरी आवाज़ों बीच अटकती एक सिसकी मेरी भी है,
सब भूखों बीच भटकती सूखे हलकों की एक साँस मेरी भी है,
पैने काँटों की नोकों पे मचली एक पंखुड़ी मेरी भी है,
हाँ, मैं हूँ ,
अंधेरे कोनों परतों के नीचे, सब आकाशों बादलों के पीछे , एक बूँद मेरी भी है,
मैं हूँ और मैं लौटूँगा,
मेरे #भारत की ख़ुश्बू कुछ ऐसी ही है.
लेखक : श्री आलोक दीमरी
जुड़ेगा भारत - जीतेगा इंडिया👍.