असेंबली से AI तक: नए उत्तर प्रदेश की नई उड़ान...
पूर्ववर्ती सरकार���ं ने प्रदेश के अनलिमिटेड पोटेंशियल का उपयोग नहीं किया, बल्कि ��से बीमारू ही बनाए रखा।
आज साढ़े 9 वर्षों के भीतर देश के करीब 60 प्रतिशत मोबाइल फोन और 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट के उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने Make in India, Digital India और आत्मनिर्भर भारत का जो विजन दिया, डबल इंजन सरकार ने उसे उत्तर प्रदेश में नीति, निवेश और उत्पादन से जोड़कर जमीन पर उतारा है।
जेवर में ₹3,706 करोड़ की HCL-Foxconn चिप इकाई बन रही है, 644 मेगावाट के ��ेटा सेंटर प्रस्ताव आ चुके हैं, और प्रदेश में 24,000 से अधिक स्टार्टअप और 8 यूनिकॉर्न हैं। यानी यात्रा Mobile से Module और Module से Microchip तक पहुंच रही है।
लेकिन वर्ष 2017 से पहले तस्वीर अलग थी। घोषणाएं होती थीं, पर परियोजनाएं जमीन पर उतरने के लिए संघर्ष करती थीं। क्योंकि तब परिवारवाद ही विकास था, सैफई महोत्सव ही सांस्कृतिक उत्थान और माफियाकरण ही औद्योगिकीकरण का मॉडल बन गया था।
जब चिंता प्रदेश से अधिक परिवार की और निवेशक से अधिक अपराधियों की हो, तो भविष्य की तकनीक के लिए वातावरण कैसे बनेगा?