मीडिया से ख़बर मिली कि 60 के दशक में बिहार के CM रहे स्वर्गीय भोला पासवान शास्त्री जी का परिवार लॉकडाउन के दौरान खाने के दाने-दाने को मोहताज है। परिवार के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। तुरंत परिवार से बात कर 1 लाख रु की आर्थिक सहायता और पर्याप्त राशन पहुँचाया।
माननीय मुख्यमंत्री जी, विपक्ष सरकार को 2000 बस दे रहा है। बसें ले लीजिए और हमारे ग़रीब बिहारी भाइयों को ले आइए। भले इसका श्रेय भी आप ले लीजिए। हमें कोई आपत्ति नहीं। लेकिन कृपया कर के तत्काल प्रभाव से कुछ किजीए। कितना सोचेंगे। ये सोचने का समय नहीं कर्तव्य करने का समय है।
'आना' तो रसूखदार लोगों की विशेष सुविधा होती है...'लाना' तो उन्हें होगा जो अलग अलग राज्यों में फंसे हुए हैं और वो भी 'अपने घर' पहुंचना चाहते हैं।
तेजस्वी ने देर रात नीतीश को घेरा, बिहारियों को 'आना' नहीं 'लाना' होगाhttps://t.co/rjyaq5IdVV
Now no more excuses to hide failure, Mr. CM! There r approx 40 lacs people from Bihar stranded outside who desperately want to come back home. Govt is duty bound to ensure safe return of them & make all necessary logistics arrangements of their health, travel, food & stay.
What! आने में सुविधा होगी?“आने”??
यहाँ “आना” क्या है? स्पष्ट निर्देश है आपको उन्हें “लाना” है लाना। शब्दों की बाज़ीगरी से कर्तव्य की इतिश्री ना किजीए।
सरकार को उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा, यात्रा, भोजन, राशन इत्यादि का प्रबंध कर सकुशल वापसी सुनिश्चित कराना है अर्थात् उन्हें लाना है।