#हिंदूराष्ट्र का एक शब्द में आशय है,#रामराज्य और रामराज्य की एक पंक्ति की व्याख्या है यह #चौपाई -
सब नर करहिं परस्पर प्रीती।चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती।।
स्मरण रहे, हिंदू राष्ट्र साध्य है।रामराज्य आदर्श।'रामराज्य' रामजी के राज में ही संभव है।और किसी भी योनिज के लिए असंभव है।
यह हमारी भूल है कि हम सजातीय नेता को अपना नेता मान लेते हैं। और किसी नेता को देश-समाज का नेता मान लेते हैं। सत्ता संघर्ष में नेता केवल सत्ता हासिल करके अपने अहं और हित को पुष्ट करना चाहता है। न इनकी कोई विचारधारा होती है और न सिद्धांत।
@richaanirudh बिल्कुल सही बात है। इस व्यापार को ओशो ने और अच्छे से किया है। धर्म के नाम पर व्यापार में तो थोडी़ कठनाई भी है,पर स्प्रीचुअल्टी के नाम पर स्मूद चलता है,बिना रोकटेक के।
वो कागज की कश्ती
वो वारिस का पानी
आज मेघदेव की कृपा हो गयी। वर्षा इतनी हो गयी कि कृषिकर्म शुरु हो जाएंगे। बखराई बुआई भर पानी हो गया।
आगे की राम जाने।
राम राम।
जुगनुओं को यह भ्रम था कि वे अपने प्रकाश से विश्व को आलोकित कर उसे कृतार्थ करेंगे। और उनने इसके लिए एक वैश्विक सभा का आयोजन किया, पर जैसे ही उस सभा में एक दीप जला जुगनुओं का प्रकाश औझल हो गया। और उस दीप ने मतांधता की परते उधेड़ कर शाश्वत धर्म दर्शन के आलोक से विश्व को आलोकित किया।
@RamaKRoy टीवी ने थोडा़ समाज से काटा, घर-परिवार जुडा़ रहा। डीटीएच ने घर-परिवार से थोडा़ काटा, बीबी-बच्चे-मियाँ जुडे़ रहे। स्मार्टफोन ने नितांत अकेला कर दिया।
हेलो फरमाइश के लिए झुमरी तलैया विख्यात थी।
@myogiadityanath जन धारणा यह है कि,
प्रशासन भ्रष्ट था और है।
पुलिस गुण्डा थी और है।
विकास कार्यों में कमीशन चलता था और चलता है।
राजनेता भ्रष्ट थे और हैं।
शासन प्रशासन के प्रति जनता में शून्य आदर था और है। बस विकल्प के अभाव में घुट घुट कर जी रहे हैं,क्योंंकि अभी प्रजावत्सल शासक पैदा नहीं हुआ।
प्रभुत्व सम्पन्न जनों से निवेदन है कि मानवीय गरिमा का आदर करें। आफत में पडे़ हुए,कष्ट उठाते हुए,दुरावस्था को प्राप्त हुए,धनहीन,शोकाकुल,जिन पर दुखों का पहाड़ टूटा हो,उनकी भी गरिमा होती है हुजूर🙏भरत तिवारी के परिवार से सहानुभूति से संवेदना प्रकट करिए, कैमरा दहरी के बाहर ही रहे।
रिमझिम बरसे बदरिया..
जैसे हो नाऊ का फुहारा।
अषाण की बारिस और जुताई खाद होती है। बारिस की बाट जोहते-जोहते किसानों ने सूखे खेतों की ही बखराई कर दी। इस आशा में कि जब बरसेगा तो कतकी की बुआई हो जाएगी।