पहले मुझे गोली मार दो...
5 अक्टूबर 1983 को पंजाब के ढिलवां में खालिस्तानी आतंकियों ने एक बस को रोककर सिख, मुस्लिम और ईसाइयों को छोड़ दिया और केवल हिंदुओं को चुनकर बाहर निकाला।
8 हिंदुओं को लाइन में खड़ा करके गोलियों से भून दिया गया।
उसी बस में एक हिंदू मां अपने 8 साल के बेटे के लिए आतंकियों के आगे घुटनों पर आ गई और रोते हुए कहा—
"मुझे पहले गोली मार दो, मैं अपने बच्चे की मौत अपनी आंखों से नहीं देख पाऊंगी।"
दशकों से कनाडाई और भारत-विरोधी टूलकिट चलाने वाले इस सच्चाई को इतिहास के पन्नों से गायब करने की लाख कोशिशें कर लें, लेकिन आतंकवाद का यह क्रूर और खौफनाक चेहरा कभी छुपाया नहीं जा सकता।
This man doesn’t need any introduction movie or propaganda , he rose above Religion & caste and did what nation demanded from him to keep India together 🇮🇳.
Nation is indebted to you sir 🙏.
RPSC चेयरमैन साहू का बेटा पास हुआ या नहीं…🤔
राजस्थान के कथित भागीरथ CM श्री @BhajanlalBjp जी, राज्य की 8 करोड़ जनता आपसे जानना चाहती है कि आपने RPSC का चेयरमैन, यू आर साहू IPS (पूर्व DGP राजस्थान) को बनाया था…
अध्यक्ष बनने पर उनके योग्य सुपुत्र ने Si बनने के लिए RPSC में परीक्षा दी…उसका परिणाम आ गया… परिणाम जनता को तो बता दीजिए महाराज…🙏
आपका नाम नितिन गडकरी है।
आप देश के परिवहन मंत्री हैं और आपको एथेनॉल से असीम प्रेम भी है।
20% एथेनॉल से शुरू हुआ “जनहित प्रयोग” अब 100% एथेनॉल तक पहुंच गया है।
जनता पूछ रही है - माइलेज घटेगी तो भरपाई कौन करेगा? इंजन पर असर पड़ेगा तो जिम्मेदारी किसकी होगी? पुराने वाहनों का क्या होगा?
लेकिन खैर , जनता सवाल पूछती रहे , नीति तो वही महान होती है जिसमें नुकसान आम आदमी का और प्रेजेंटेशन मंत्री जी का चमकदार हो।
आपकी सड़कें भी कमाल की हैं।
कागज पर स्पेस टेक्नोलॉजी से बनती हैं, उद्घाटन में वर्ल्ड क्लास दिखती हैं , और बारिश आते ही चार दिन में आत्मनिर्भर होकर हवा हो जाती हैं।
टोल टैक्स पूरा , सड़क अधूरी।
वादा एक्सप्रेसवे का , अनुभव ऑफ-रोडिंग का।
ऊपर से एथेनॉल ऐसा कि गाड़ी भी सोचती होगी मुझे चलाना है या प्रयोगशाला में जमा करना है?
लेकिन कोई बात नहीं।
दुनिया क्या कहती है , उससे मतलब नहीं।
इंसान को खुद की नजर में अच्छा होना चाहिए।
और अगर एथेनॉल , टोल और टूटती सड़कें भी खुश हैं , तो फिर विकास सच में हाईवे पर दौड़ रहा है।
मेरे पसंदीदा नेता श्री @GovindDotasra जी के अरबपति रिश्तेदार को बेशकीमती ज़मीन का 1/- (एक रूपये) में सरकारी पट्टा…
शिक्षा विभाग में बहुत बड़े अफ़सर रहे श्री रमेश पूनिया जो डोटासरा जी के सुपुत्र श्री अविनाश जी के ससुर हैं, जिनके तीनों बच्चे RAS हैं और साक्षात्कार में 80-80-80 नम्बर लाए थे क्योंकि उन पर अफ़सर और नेता सदा ही मेहरबान रहे हैं…
इस पट्टे की ग़ायब हो चुकी पूरी फाइल निकलवाकर जाँच की जाए तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं लेकिन CM श्री @BhajanlalBjp सहित @BJP4Rajasthan के किसी नेता की औक़ात नहीं है…
मेरी पंक्तियाँ पढ़कर किसी BJP नेता को जोश आ भी गया तो डोटासरा जी के नाम से इनकी धूजनी छूट जाएगी…
डोटासरा जी की जय हो…👍
मगरमच्छों को पकड़ने की बात करने वाले BJP नेता, मगरमच्छों का बाल भी नहीं पकड़ सकते…
"RPSC में मेरे पसंदीदा नेता श्री @GovindDotasra जी की असीमित ताक़त देखो..."
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व शिक्षामंत्री श्री गोविन्द डोटासरा के सुपुत्र श्री अविनाश डोटासरा के ससुर श्री रमेश चन्द्र पूनिया की एक पुत्री प्रभा और एक पुत्र गौरव को साक्षात्कार में 80-80 नम्बर मिले, जिसको श्री गोविन्द डोटासराजी, योग्य बच्चों के साथ हुआ इत्तेफ़ाक़ बताते हैं...
लेकिन डोटासराजी यह नहीं बताते हैं कि-
1. उनके खुद के पुत्र श्री अविनाश डोटासरा ने OBC से आवेदन क्यों किया ? और
2. श्री अविनाश डोटासरा को RPSC के इतिहास में साक्षात्कार के सर्वाधिक अंक 85 क्यों मिले ?
क्या कोई बात सकता है कि प्रभा और गौरव के RAS परीक्षा के चौथे पेपर में दोनों के 99.5-99.5 नम्बर आए हैं जो इत्तेफ़ाक़ कैसे हो सकता है ?
सामान्य समझ में इसको Pure Setting कहते हैं क्योंकि ऐसा तभी हो सकता है जब दोनों ने कॉपी खाली छोड़ी हो और RPSC चेयरमैन श्री भूपेन्द्र यादव ने खुद कॉपी भरी हो अथवा किसी अन्य व्यक्ति से भरवाई हो...
दोनों कॉपियों को अगर हाईकोर्ट मंगवा ले और देखे तो उसमें सभी उत्तर एक जैसे ही मिलेंगे...
बेरोजगारों के लिए सभी को खड़ा होना होगा अन्यथा ये सभी नेता, इन अफसरों के साथ मिलकर राजस्थान को लूट खाएंगे...
ज़िम्मेदारी से पुनः कहता हूँ कि मेरे पसंदीदा नेता डोटासरा जी से CM @BhajanlalBjp जी को डर लगता है अन्यथा इतने ज़्यादा साक्ष्य होते हुए चूँ भी नहीं कर पाएँ, यह संभव नहीं है…
डोटासरा जी ने CM से मंत्रियों वाला अवैध बंगला भी धमकाकर लिया और समय-समय पर CM की बेज्जती भी करते रहते हैं…
डोटासरा जी की जय हो… 👍
आपका अपना
Lawyer Goverdhan Singh
सरकार के वंदे गंगा जल संरक्षण की पोल तो यहां खुल रही है। नेता तालाबों पर जाकर भाषण देते हैं और यहां दो नदिया प्रदूषण से मर रही है।
अब तो प्रशासन को लीपापोती नही करनी चाहिए
कार्यवाही तात्कालिक जोधपुर के कलेक्टर पर भी होनी चाहिये।ओर सबके संपत्ति की जांच होनी चाहिये।मौत का ये खेल हमारे साथ जो खेला है उसके लिए ये कार्यवाही पर्याप्त नहीं है।फिर भी चलो सरकार ने कुछ तो एक्शन लिया है
कलेक्टर साहब यहां वंदे गंगा जल संरक्षण के दिखावटी फोटो पोस्ट करने में व्यस्त हैं ठीक इसी समय सांगरिया CETP पर सुप्रीम कोर्ट की कमेटी जोजरी नदी में प्रदूषण अवैध रूप से CETP से अनट्रिटेड पानी छोड़ने की एक गुप्त पाइप को तोड़ रही है।कलेक्टर साहब इस CETP पर कड़ी कार्यवाही कब करोगे जब ये भूमिगत गुप्त पाइप से बरसो से केमिकल युक्त पानी को जोजरी नदी में छोड़ा जा रहा है।ओर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड @RSPCB_official के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना ये संभव नही हो सकता है।जोधपुर प्रदूषण बोर्ड के RO की सह से ये सब मौत का खेल चल रहा था।RO की सम्पत्ति की जांच हो आखिर कितनी पैसा खाया है।माननीय जज साहब संगीत लोढा साहब ये सब हमारी मौत के ज़िम्मेदार है इन पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए और ऐसे ग़ैर ज़िम्मेदार अधिकारियों को हटाया जाये
Commandant or CO of a unit has to look after the lawful welfare of personnel under his command at any cost even at the peril of his promotion or even staying put in service.
This gentleman has shown moral courage to stand by his man. Men lay down their lives without batting an eyelid for such leaders.
He has sent the desired message.
रांची में आयोजित 29वें नेशनल सीनियर फेडरेशन कप में पंजाब के प्रतिभाशाली धावक गुरिंदर वीर सिंह जी ने भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए 100 मीटर दौड़ मात्र 10.09 सेकंड में पूरी कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया है।
यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस ऐतिहासिक सफलता के लिए गुरिंदर वीर सिंह जी को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं।
उनका नाम राजन था।
वह केरल के कालीकट स्थित रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज के अंतिम वर्ष के इंजीनियरिंग छात्र थे। उनके पिता टी. वी. ईचारा वारियर उसी शहर के गवर्नमेंट आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर थे।
1 मार्च 1976 की सुबह पुलिस कॉलेज परिसर में आई और राजन को उठाकर ले गई।
देश में इमरजेंसी लगी हुई थी। नागरिक अधिकार निलंबित थे। अदालतें लगभग मौन हो चुकी थीं।
अगले दिन कॉलेज प्रिंसिपल से उनके पिता को यह पता चला।
उन्होंने जिले के हर पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाए। किसी ने यह तक नहीं माना कि उनका बेटा पुलिस की हिरासत में है।
उन्होंने सीधे केरल के गृहमंत्री के. करुणाकरण से मुलाकात की।
उन्होंने केरल सरकार के गृह सचिव को तीन बार याचिका भेजी। एक बार भी जवाब या प्राप्ति रसीद नहीं मिली।
उन्होंने भारत के राष्ट्रपति और केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखा। केरल के हर सांसद को उसकी प्रतियां भेजीं।
कुछ नहीं हुआ।
ईचारा वारियर को तब यह नहीं पता था कि उनके बेटे को कक्कायम के एक अवैध पुलिस यातना शिविर में ले जाया गया था।
वहां उसे यातनाएं दी गईं।
एक क्रूर तरीका इस्तेमाल हुआ जिसे “उरुट्टल” कहा जाता था — इसमें पीड़ित के शरीर पर भारी लकड़ी का लट्ठा घुमाया जाता था।
राजन उन यातनाओं को सह नहीं पाए।
उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने उनके शव को गायब कर दिया। आज तक उनका शरीर नहीं मिला।
1977 में जब इमरजेंसी खत्म हुई, तब ईचारा वारियर ने केरल हाई कोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की।
इमरजेंसी के बाद केरल में यह पहली ऐसी याचिका थी।
न उनके पास कानूनी प्रशिक्षण था, न राजनीतिक ताकत, न पैसा।
अपने बेटे को ढूंढते-ढूंढते वह सब कुछ खर्च कर चुके थे।
धीरे-धीरे अदालत में सच सामने आने लगा।
1978 में अदालत की प्रतिकूल टिप्पणी के बाद के. करुणाकरण को केरल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
राजन की मां इस सदमे से मानसिक रूप से टूट गईं। वर्ष 2000 में उनकी मृत्यु हो गई। उन्हें भी कभी यह नहीं पता चला कि उनके बेटे का शव कहां है।
ईचारा वारियर ने अपनी आत्मकथा “Memories of a Father” लिखी, जिसे 2004 में केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
उसकी अंतिम पंक्तियों में उन्होंने लिखा:
“मैं दरवाजा बंद नहीं करता। बारिश को अंदर आने देता हूं, मुझे भिगोने देता हूं। शायद मेरा अदृश्य बेटा इतना तो जान सके कि उसके पिता ने कभी उसके लिए दरवाजा बंद नहीं किया।”
13 अप्रैल 2006 को ईचारा वारियर की मृत्यु हो गई।
वह अपने बेटे का शव कभी नहीं ढूंढ पाए।
मार्च 1976 की एक सुबह राजन को उसके कॉलेज परिसर से उठाया गया था।
उसके बाद वह कभी दिखाई नहीं दिया।
इस कहानी को आगे बढ़ाइए।
कुछ कहानियां गायब नहीं होनी चाहिए।
आपका नाम एपीजे अब्दुल कलाम था।
तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण परिवार में जन्म हुआ। बचपन में अखबार बेचकर पढ़ाई की। सपना था फाइटर पायलट बनने का, लेकिन सिर्फ एक रैंक से चयन छूट गया।
फिर आपने DRDO जॉइन किया।
1998 में अटल बिहारी वाजपेयी ने आपको एक ऐसा मिशन दिया, जिसने दुनिया को हिला दिया पोखरण परमाणु परीक्षण।
चुनौती बम बनाना नहीं थी, अमेरिका की नजरों से बचाना था।
CIA के जासूसी सैटेलाइट हर सुबह पोखरण पर नजर रखते थे। वैज्ञानिकों को सेना की वर्दी पहनाई गई। सारा काम रात में हुआ। सुबह होने से पहले रेत का हर निशान मिटा दिया जाता था।
11 मई 1998 को भारत ने एक साथ तीन परमाणु परीक्षण किए।
दुनिया को पता तब चला, जब धरती कांप चुकी थी।
CIA को भनक तक नहीं लगी। इसे अमेरिका की सबसे बड़ी इंटेलिजेंस विफलताओं में गिना गया।
भारत परमाणु शक्ति बन गया।
बाद में आपने कहा था:
“CIA के सैटेलाइट अच्छे थे, लेकिन वो भारतीय संकल्प को नहीं देख पाए।”
फिर आप भारत के राष्ट्रपति बने। लेकिन आखिरी सांस तक खुद को शिक्षक ही मानते रहे।
27 जुलाई 2015 को IIM शिलॉन्ग में छात्रों को संबोधित करते हुए आप गिर पड़े।
एक वैज्ञानिक चला गया, लेकिन करोड़ों भारतीयों को सपने देखना सिखा गए।
आपका नाम राजू नारायणस्वामी है।
1991 में आपने UPSC में AIR 1 हासिल की थी। पूरे देश में पहला स्थान।
आप IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट थे। MIT ने स्कॉलरशिप ऑफर की। लेकिन आपने ठुकरा दी। आपने कहा — IIT की पढ़ाई गरीब भारतीयों के टैक्स से हुई है, अब देश को लौटाना मेरा कर्तव्य है।
फिर आपने IAS जॉइन किया।
पहली पोस्टिंग में एक बिल्डर धान के खेत को भरना चाहता था। 60 गरीब परिवारों ने कहा इससे उनका इलाका डूब जाएगा। आपने अनुमति नहीं दी। आपका ट्रांसफर हो गया।
केरल के PWD मंत्री के बच्चों के अवैध जमीन सौदे उजागर किए। मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। आपका ट्रांसफर हो गया।
Coconut Development Board में भ्रष्टाचार पकड़ा। अफसर सस्पेंड हुए। आपका ट्रांसफर हो गया।
सिविल सप्लाई विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। जांच पूरी होने से पहले हटा दिए गए।
34 साल की सेवा में 32 ट्रांसफर।
एक बार आपने सरकार को चिट्ठी लिखकर पूछा “जब मुझे कोई काम ही नहीं दिया जा रहा, तो मुझे वेतन क्यों दिया जा रहा है?”
2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी Chief Secretary पदोन्नति की याचिका खारिज कर दी।
AIR 1 होने के बावजूद।
30 साल की ईमानदार सेवा के बावजूद।
उन्होंने 34 किताबें भी लिखीं। साहित्य अकादमी पुरस्कार जीता। कानून में PhD की।
MIT उन्हें अमेरिका देना चाहता था।
उन्होंने भारत के लोगों को चुना।
लेकिन भारत की व्यवस्था ने उन्हें 34 साल तक सिर्फ एक संदेश दिया
“ईमानदारी की कीमत सब कुछ खोकर चुकानी पड़ती है।”
और उन्होंने हर बार वो कीमत चुकाई।
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