कुड़ियो दुर रहो, हमें प्यार नहीं हो सकता..
इश्क वाला भूत हम पर सवार नहीं हो सकता
बहुतों ने पूछा तुमसे इजहार क्यूं नही हो सकता..
मैंने कहा यहां पर गलत रफ्तार नहीं हो सकता।
और
बहुत सुकून मिलता है जब जमाना बोलता है कि
स्मार्ट नहीं है पर उस जैसा कोई वफादार नहीं हो सकता!!
#रफ्तार
वो बिछड़कर सुकून से सो रहा है
यूं देर रात तक जागना मेरा कायदा है क्या।
मैं तो शिकायतें तक नहीं करता
अपनी उलझनों से।।
जरा सा वक्त का रुख क्या मुड़ा,
वो पूछना था कि
तेरा घर से भागने में फायदा है क्या !!
#रफ्तार
यूं तो बरस जाते है बादल कभी भी
पर अब वो सुकून वाली बरसात कहा होती है।
दिन का तो मालूम है बीत जाता है उसका
दूसरे आशिक के साथ
जानना है कि उसकी रात कहा होती है।
मै खोया था इश्क की गलियो मे
यहा पर जातपात कहा होती है।
जिनको रास आती थी परछाई भी हमारी
पूछना था अब उनकी बात कहा होती है!!
कभी फुर्सत निकालकर बैठो पास मेरे,
फिर दिल का घाव देखो।
��हले अपना अतीत देखो,
फिर मेरा ठहराव देखो।।
सबको जाता देख रहा हूं
तुम्हे खोने का डर नहीं है,
तुम मेरा हाल देखो।।
इज़्ज़त अभी भी वैसी ही है
मेरी नज़रों में तुम्हारी,
बस तुम अपना बर्ताव देखो!!
#रफ्तार
ना पूछों किस कदर झेला है
इन परिस्थितियों को,
अब कैसा डरना इन घावों और खंजरों से।
"मुकर जाऊंगा मैं पहचानने से इन्हे���",
एक बार जी भर के देख तो लूं
गिरता हुआ इनको अपनी नजरों से!!
#रफ्तार
आया आखिरकार कॉल उसका तो पुछा,
गलत किया था तुमनें ये बात मानते हो।
चोटों का दर्द पूछ रहा था नासमझ,
मैं आखरी सीढ़ी से गिरा हुआ सदमें में हुं,
सदमा जानते हो!!
#रफ्तार
कोई हो अगर मुक्कमल एक टुकड़ा जोड़कर,
तो मैं दे देता हूं अपने सैंकड़ों टुकड़े तोड़कर।
ये कौनसी शख्सियत देकर भेजा हैं ए-मालिक
खाता हूं तरस सब पर
"एक खुद को छोड़कर"!!
#रफ्तार
कौन कहता है वो खुश नहीं,
वो खुश है पर शायद हमसे नहीं।
कौन कहता है वो नाराज नहीं,
वो नाराज है पर शायद हमसे नहीं।।
हम ही आते है दिलासाओं में,
शायद उनको तो हम पसंद नहीं।।
कौन कहता उसके दिल में चाहत नहीं,
उसे मोहब्बत तो है पर शायद हमसे नहीं।।
#रफ्तार
यहाँ हर कोई मरहम लगाने का वादा करता है, पर हाथ में सबने नमक ही छुपा रखा है।
उस शख्स का चुप रहना जहन में यूं बैठा
मुझे रातो को जगा रखा हैं।।
आवाजे दूं भी तो कौनसे आसार से
आवाजे दूं भी तो कौनसे आसार से
हालात नाजुक है उसके "घर की तरफ से"
इन बातों ने मेरा दिल दुःखा रखा हैं!!
#रफ्तार
दादी बोलीः
आंगन में मोर प��ख मिला है।
दादा बोले:
जरुर मोर आया होगा,
पोता बोलाः
हो सकता है कि कृष्ण आये हों?
मैं कान्हा जी के लिए यही महसूस करता हुं
मेरा मानना है कि वो यहीं है मेरे साथ!!
#रफ्तार
ये वफादारी की पगडंडियों को छोड़कर रफ्तार,
जो पास आया
उसे साथ बैठा लेना चाहिए था।
दिखाया था एक फकीर को अपना हाथ
बोला अभी ��क तो गलत कदम उठा लेना चाहिए था...
#रफ्तार
फिर मैं वफादारी की बाते नही करूंगा,
बिना जड़ों के कोनसी शाखा हरी भरी होती हैं।
तुम्हारे बाद जिसका मन होगा अपना लेगा,
मैंने नही सुना कि
मुर्दों की कोई पसंद होती हैं !!
#रफ्तार
गलियां गांव की सु���सान पड़ी है,
हमारी आवारगी के बिना।
एक वक्त हमे लगता था,
मौत को भी हरा देंगे हम।।
कुछ इस कदर शान्त कर दिया है,
एक शख्स की खामोशी ने।
वरना हमें तो लगता था,
जब चाहे कोहराम मचा देंगे हम!!
#रफ्तार
चाहते कुछ इस कदर बढ़ गई
ख़ामोश कोई और है
और खो मैं गया हुं।
तलाश कुछ इस क़दर है उसकी
बहुत गर्द उड़ने लगी मेरे पीछे,
अकेला ही ��ैं कारवां हो गया हुं !!
#रफ्तार
इन हवाओं से कहो धीरे चले,
मैं बिखर जाऊंगा।
उनसे कहो
पहले की तरह नजर भर कर देखें,
मैं संवर जाऊंगा।।
मत पूछो तुमसे बिछड़ूंगा तो किधर जाऊंगा,
आखरी रास्ता मालूम है?
उनसे कहो
तुम बिछड़े तो जीते जी मर जाऊंगा!!
#रफ्तार
उसकी मोहोब्बत मे खुदखुशी खुदखुशी नहीं लगी,,
जो उ�� पर नहीं लिखी गई वो शायरी ही नहीं लगी ||
और नहीं याद मुझे वो पहली बार कब अच्छी लगी थी,,
मगर ये मालूम है की उसके बाद कभी कोई अच्छी नहीं लगी !!
#rafftar