Lakulisa Temple Inscription of Guhila King Naravahana (971 AD) identifies Guhilas as belonging to Raghuvamsa, not any clan or dynasty located in Nasik.
Even Nainsi, who wrote his khyat centuries later (between 1650-1665 AD), clarifies it himself that this is just one …. 3/6 🧵
…. was in Nasik (Deccan), a claim which gets easily rejected by careful study of their epigraphs. The Ekling Mahatmya stone inscription identifies the origin of the Guhilas around Gujarat-Rajasthan region, in a place called Anandpur, which isn’t even close to Maharashtra. 2/6 🧵
Who keeps the Karwa Chauth fast? HINDU WOMEN.
For whom do women keep the Karwa Chauth fast? HINDU MEN.
Who has problems with the Karwa Chauth fast? NON-HINDUS.
Girl, you seriously need to STFU.
You don’t get to dictate how a woman expresses her love for her partner. If a woman chooses to observe Karva Chauth, that’s HER CHOICE.
"Whatever punishment may be meted out to Udaipur, we can never dethrone him from his position in the hearts of the Rajput people. If we attempt to do this, we should find ourselves in collision with the Rajputs"
"अश्वा यस्य जयस्तस्य यस्याश्वास्तस्य मेदिनी।
अश्वा यस्य यशस् तस्य यस्याश्वास् तस्य काञ्चनम्॥"
The depicition of a Rajput Cavalry unit from the 1st Republic Day Parade on 26th January, 1950.
“ Nooo sar fake sources, ekchually Rajputs forced muh Chhatrapati’s father & ancestors to accept Sisodiyas as their baap. Also, the Maharanas mentioned here wuz Sisode-Marathas of Deccan, but Rajputs bribed Angrez to hide their existence from the world ”
— My son @MamalkatMadar
[2/8] 🪡🧵 𝙍𝙖𝙙𝙝𝙖 𝙈𝙖𝙙𝙝𝙖𝙫 𝙑𝙞𝙡𝙖𝙨 𝘾𝙝𝙖𝙢𝙥𝙪 is a text written by Jayaram Pindye — court poet of Shahji Bhonsle (Shivaji’s father) — somewhere between the years 1653 to 1658. It traces the ancestry of Bhonsles to the Sisodiya Maharanas of Mewar.
Two other contemporary poets mentioned here — Subudhirao & Dundari Kavi — are said to have visited Shahji and described him as “𝙖 𝙎𝙞𝙨𝙤𝙙𝙞𝙮𝙖 𝙍𝙖𝙟𝙥𝙪𝙩 𝙖𝙣𝙙 𝙠𝙞𝙣𝙨𝙢𝙖𝙣 (𝙗𝙡𝙤𝙤𝙙 𝙧𝙚𝙡𝙖𝙩𝙞𝙫𝙚) 𝙤𝙛 𝙩𝙝𝙚 𝙈𝙖𝙝𝙖𝙧𝙖𝙣𝙖 𝙤𝙛 𝘾𝙝𝙞𝙩𝙩𝙤𝙧” as well.
🪷 Rājput Ancestry of Shahji Bhonsle As recorded by Jayaram Pinde.
There is yet another verse where Shahaji Bhonsale is said to have been born in The Lineage of “ Famed Rāṇas ” in whose lineage he descended in the Saṃskritā Kavya Radhamadhvavilasa Campu.
Perhaps the most popular and revered goddess in Japan is Benzaiten. The goddess of beauty, language, and wisdom, and the defender of the nation and the law, she sits atop the sea-dragon and she plays the lute.
Benzaiten. That is what the Japanese call Saraswati. #BasantPanchami
🚨 In Bangladesh, Islamist extremists assaulted a Hindu woman. 👊💥
No woman should ever be subjected to violence because of her faith.
This is not merely a problem in a distant country.
The threat is also reaching Japan.
*महारानी जोधाबाई, जो कभी थी ही नहीं, लेकिन बड़ी सफाई से उनका अस्तित्व गढ़ा गया और हम सब झांसे में आ गए* ....
जब भी कोई हिन्दू राजपूत किसी मुग़ल की गद्दारी की बात करता है तो कुछ मुग़ल प्रेमियों द्वारा उसे जोधाबाई का नाम लेकर चुप कराने की कोशिश की जाती है!
बताया जाता है कि कैसे जोधा ने अकबर की आधीनता स्वीकार की या उससे विवाह किया! परन्तु अकबर कालीन किसी भी इतिहासकार ने जोधा और अकबर की प्रेम कहानी का कोई वर्णन नहीं किया है!
उन सभी इतिहासकारों ने अकबर की सिर्फ 5 बेगम बताई है!
1.सलीमा सुल्तान
2.मरियम उद ज़मानी
3.रज़िया बेगम
4.कासिम बानू बेगम
5.बीबी दौलत शाद
अकबर ने खुद अपनी आत्मकथा अकबरनामा में भी किसी हिन्दू रानी से विवाह का कोई जिक्र नहीं किया। परन्तु हिन्दू राजपूतों को नीचा दिखाने के षड्यंत्र के तहत बाद में कुछ इतिहासकारों ने अकबर की मृत्यु के करीब 300 साल बाद 18 वीं सदी में “मरियम उद ज़मानी”, को जोधा बाई बता कर एक झूठी अफवाह फैलाई!
और इसी अफवाह के आधार पर अकबर और जोधा की प्रेम कहानी के झूठे किस्से शुरू किये गए! जबकि खुद अकबरनामा और जहांगीर नामा के अनुसार ऐसा कुछ नहीं था!
18वीं सदी में मरियम को हरखा बाई का नाम देकर हिन्दू बता कर उसके मान सिंह की बेटी होने का झूठा पहचान शुरू किया गया। फिर 18 वीं सदी के अंत में एक ब्रिटिश लेखक जेम्स टॉड ने अपनी किताब "एनालिसिस एंड एंटीक्स ऑफ़ राजस्थान" में मरियम से हरखा बाई बनी इसी रानी को जोधा बाई बताना शुरू कर दिया!
और इस तरह ये झूठ आगे जाकर इतना प्रबल हो गया कि आज यही झूठ भारत के स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गया है और जन जन की जुबान पर ये झूठ सत्य की तरह आ चुका है!
और इसी झूठ का सहारा लेकर राजपूतों को नीचा दिखाने की कोशिश जाती है! जब भी मैं जोधाबाई और अकबर के विवाह प्रसंग को सुनता या देखता हूं तो मन में कुछ अनुत्तरित सवाल कौंधने लगते हैं!
आन, बान और शान के लिए मर मिटने वाले शूरवीरता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध भारतीय क्षत्रिय अपनी अस्मिता से क्या कभी इस तरह का समझौता कर सकते हैं??
हजारों की संख्या में एक साथ अग्नि कुंड में जौहर करने वाली क्षत्राणियों में से कोई स्वेच्छा से किसी मुगल से विवाह कर सकती हैं???? जोधा और अकबर की प्रेम कहानी पर केंद्रित अनेक फिल्में और टीवी धारावाहिक मेरे मन की टीस को और ज्यादा बढ़ा देते हैं!
अब जब यह पीड़ा असहनीय हो गई तो एक दिन इस प्रसंग में इतिहास जानने की जिज्ञासा हुई तो पास के पुस्तकालय से अकबर के दरबारी 'अबुल फजल' द्वारा लिखित 'अकबरनामा' निकाल कर पढ़ने के लिए ले आया, उत्सुकतावश उसे एक ही बैठक में पूरा पढ़ डाली । पूरी किताब पढ़ने के बाद घोर आश्चर्य तब हुआ, जब पूरी पुस्तक में जोधाबाई का कहीं कोई उल्लेख ही नहीं मिला!
मेरी आश्चर्य मिश्रित जिज्ञासा को भांपते हुए मेरे मित्र ने एक अन्य ऐतिहासिक ग्रंथ 'तुजुक-ए- जहांगिरी' जो जहांगीर की आत्मकथा है उसे दिया! इसमें भी आश्चर्यजनक रूप से जहांगीर ने अपनी मां जोधाबाई का एक भी बार जिक्र नहीं किया!
हां कुछ स्थानों पर हीर कुँवर और हरका बाई का जिक्र जरूर था। अब जोधाबाई के बारे में सभी ऐतिहासिक दावे झूठे समझ आ रहे थे । कुछ और पुस्तकों और इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के पश्चात हकीकत सामने आयी कि “जोधा बाई” का पूरे इतिहास में कहीं कोई जिक्र या नाम नहीं है!
इस खोजबीन में एक नई बात सामने आई, जो बहुत चौंकाने वाली है! इतिहास में दर्ज कुछ तथ्यों के आधार पर पता चला कि आमेर के राजा भारमल को दहेज में 'रुकमा' नाम की एक पर्सियन दासी भेंट की गई थी, जिसकी एक छोटी पुत्री भी थी!
रुकमा की बेटी होने के कारण उस लड़की को 'रुकमा-बिट्टी' नाम से बुलाते थे आमेर की महारानी ने रुकमा बिट्टी को 'हीर कुँवर' नाम दिया चूँकि हीर कुँवर का लालन पालन राजपूताना में हुआ, इसलिए वह राजपूतों के रीति-रिवाजों से भली भांति परिचित थी!
राजा भारमल उसे कभी हीर कुँवरनी तो कभी हरका कह कर बुलाते थे। राजा भारमल ने अकबर को बेवकूफ बनाकर अपनी परसियन दासी रुकमा की पुत्री हीर कुँवर का विवाह अकबर से करा दिया, जिसे बाद में अकबर ने मरियम-उज-जमानी नाम दिया!
चूँकि राजा भारमल ने उसका कन्यादान किया था, इसलिये ऐतिहासिक ग्रंथों में हीर कुँवरनी को राजा भारमल की पुत्री बता दिया! जबकि वास्तव में वह कच्छवाह राजकुमारी नहीं, बल्कि दासी-पुत्री थी!
राजा भारमल ने यह विवाह एक समझौते की तरह या राजपूती भाषा में कहें तो हल्दी-चन्दन किया था। इस विवाह के विषय में अरब में बहुत सी किताबों में लिखा है!
(“ونحن في شك حول أكبر أو جعل الزواج راجبوت الأميرة في هندوستان آرياس كذبة لمجلس”) हम यकीन नहीं करते इस निकाह पर हमें
संदेह है, इसी तरह ईरान के मल्लिक नेशनल संग्रहालय एन्ड लाइब्रेरी में रखी किताबों में एक भारतीय मुगल शासक का विवाह एक परसियन दासी की पुत्री से करवाए जाने की बात लिखी है!
'अकबर-ए-महुरियत' में यह साफ-साफ लिखा है कि (ہم راجپوت شہزادی یا اکبر کے بارے میں شک میں ہیں)
हमें इस हिन्दू निकाह पर संदेह है, क्योंकि निकाह के वक्त राजभवन में किसी की आखों में आँसू नहीं थे और ना ही हिन्दू गोद भराई की रस्म हुई थी!
सिक्ख धर्म गुरू अर्जुन और गुरू गोविन्द सिंह ने इस विवाह के विषय में कहा था कि क्षत्रियों ने अब तलवारों और बुद्धि दोनों का इस्तेमाल करना सीख लिया है, मतलब राजपूताना अब तलवारों के साथ-साथ बुद्धि का भी काम लेने लगा है!
17वी सदी में जब 'परसी' भारत भ्रमण के लिये आये तब अपनी रचना ”परसी तित्ता” में लिखा “यह भारतीय राजा एक परसियन वैश्या को सही हरम में भेज रहा है अत: हमारे देव (अहुरा मझदा) इस राजा को स्वर्ग दें"!
भारतीय राजाओं के दरबारों में राव और भाटों का विशेष स्थान होता था, वे राजा के इतिहास को लिखते थे और विरदावली गाते थे उन्होंने साफ साफ लिखा है-
”गढ़ आमेर आयी तुरकान फौज ले ग्याली पसवान कुमारी ,राण राज्या राजपूता ले ली इतिहासा पहली बार ले बिन लड़िया जीत! (1563 AD)
मतलब आमेर किले में मुगल फौज आती है और एक दासी की पुत्री को ब्याह कर ले जाती है! हे रण के लिये पैदा हुए राजपूतों तुमने इतिहास में ले ली बिना लड़े पहली जीत 1563 AD!
ये ऐसे कुछ तथ्य हैं, जिनसे एक बात समझ आती है कि किसी ने जानबूझकर गौरवशाली क्षत्रिय समाज को नीचा दिखाने के उद्देश्य से ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की और यह कुप्रयास अभी भी जारी है!
No, there children aren't We have exact source which says that Rājaputra ( Sonnes of Kings ) was a title of Rājputs. Here a source of 1638, also confirming that “ Rajputs are the Kṣatriya Caste itself ”, rest your cribbings are worthless as whole.
[1/8] 🪡🧵 Official records, court chronicles and contemporary letters — 𝗰𝗼𝗺𝗺𝗶𝘀𝘀𝗶𝗼𝗻𝗲𝗱 𝗼𝗿 𝘄𝗿𝗶𝘁𝘁𝗲𝗻 𝗯𝘆 𝗕𝗵𝗼𝗻𝘀𝗹𝗲 𝗖𝗵𝗵𝗮𝘁𝗿𝗮𝗽𝗮𝘁𝗶𝘀 𝘁𝗵𝗲𝗺𝘀𝗲𝗹𝘃𝗲𝘀 — attesting their Sisodiya Rajput ancestry.
Open challenge to my son @MamalkatMadar to refute even a single one of these.
[1/2] 🤡 Abey लंडबुद्धि
Deepvijay sent the genealogy ONLY BECAUSE PRATAP SINGH BHONSLE REQUESTED FOR IT HIMSELF by sending emissaries to Udaipur.
Bhonsles had been calling themselves Sisodiya-Rajputs all the way back since 17th century, it’s not like they blindly believed a stray claim fabricated by someone in 19th century.
Short Story..
Once upon a time, there was a ruler called, @MamataOfficial who threw common people into jail by denying them free speech guranteed under article 19.
In one instance, she even sent her police force across 5 States to capture a student.
After she lost power, she started supporting free speech for Vadras and Gandhis under same article 19.
And she kept blaming SIR, Vote Chori, Blah, blah for losing power..!
End for her...
Sorry End of story..!