देश में बुलेट ट्रेन आए या न आए, लेकिन पेपर लीक एक्सप्रेस पूरी रफ़्तार से दौड़ रही है। हर कुछ दिनों में एक नई परीक्षा और उसके बाद वही पुरानी कहानी—पेपर लीक!
“यह सरकार पेपर लीक का रिकॉर्ड बनाने में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है।”
2014 से अब तक देशभर में विभिन्न भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में 152 पेपर लीक हुआ हैं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के टूटते सपनों, बर्बाद होते वर्षों और व्यवस्था पर से उठते भरोसे की कहानी है।
हर बार जब कोई परीक्षा होती है, लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं, परिवार उम्मीदें बांधता है और युवा अपने भविष्य का सपना देखते हैं। लेकिन पेपर लीक की घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। परीक्षा रद्द होती है, दोबारा परीक्षा होती है, महीनों तक परिणाम अटक जाते हैं और इसका सबसे बड़ा नुकसान ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों को उठाना पड़ता है।
आज स्थिति यह है कि भर्ती परीक्षाओं के नाम पर युवाओं के बीच असुरक्षा और अविश्वास का माहौल बन गया है।युवा केवल रोजगार नहीं मांग रहे हैं, बल्कि अपनी मेहनत का सम्मान और निष्पक्ष अवसर मांग रहे हैं…
#paperleak #JantarMantar #StudentsProtest
“अगर आप मेरी बात से सहमत हैं, तो मुझ पर दबाव क्यों? सरकार पर दबाव क्यों नहीं?”
सोनम वांगचुक जी का यह सवाल अनशन से बड़ा है। यह पूछता है कि लोकतंत्र में संवाद की पहल नागरिक करे, या सत्ता?
#SansadChalo#StandWithSonamWangchuk@Cockroachisback@Wangchuk66
"फांसी सत्याग्रह" कर रहे ये आदिवासी हमारे लोकतंत्र का वह सच हैं, जो अक्सर टीवी स्टूडियो की बहसों में जगह नहीं पाता।
जब कैमरे सत्ता के पीछे चलने लगें, तब ज़मीन पर बैठे लोगों की आवाज़ सुनना और दिखाना और भी ज़रूरी हो जाता है।
यह रिपोर्ट ज़रूर देखिए।
पत्रकार: राजस्थान में दो महीने में 18 गर्भवती महिलाओं की मौत हो गई, सरकार क्या कर रही है?
राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री: मिलते हैं ब्रेक के बाद!
यह कहने के बाद मंत्री जी भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में फूहड़ता से हँसने लगे
यह BJP वाले इतने क्रूर और बेशर्म क्यों होते हैं?
इस न्यूज़ के नीचे के कॉमेंट पढ़ते जाइए, समझ आ जाएगा कि समाज भीतर से कितना खोखला और अमानवीय हो चुका है।
“कैंडल मार्च निकालो … भगवान इसकी आत्मा को शांति दे …..”
कितने निकृष्ट लोग हैं। भाजपा समर्थकों में मानवीयता मर चुकी है, उनका जानवरीकरण होता जा रहा है।
आप किसी व्यक्ति या किसी आंदोलनकर्ता के साथ खड़े होंगे या नहीं होंगे, यह आपकी choice हो सकती है, लेकिन किसी की मौत की इच्छा रखना या फिर इस बात का जश्न मनाना कि किसी की हालत नाज़ुक हो रही है और मौत हो सकती है, यह साबित करता है कि एक लोकतांत्रिक समाज की नैतिक बुनियाद को भाजपा ने धीरे-धीरे कमज़ोर किया है।
हम युवाओं की ज़िम्मेदारी है कि इस बात की तस्दीक हर पल करें कि मुहब्बत पर नफ़रत भारी न हो।
#SonamWangchuk को लेकर Indian Army जवान का संदेश वायरल, माइनस 50°C टेंट का किया जिक्र सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में भारतीय सेना के एक जवान ने सोनम वांगचुक के समर्थन की अपील की है। वीडियो में जवान ने कहा कि सोनम वांगचुक ने भारतीय सेना के लिए माइनस 50 डिग्री सेल्सियस जैसी अत्यधिक ठंड में उपयोगी सोलर हीटिंग तकनीक और टेंट विकसित किए, जिससे लद्दाख जैसे दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों को बड़ी राहत मिली। इसी आधार पर वह लोगों से वांगचुक के शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन करने की अपील करता है।
नोट: वीडियो सोशल मीडिया से मिला है, वीडियो में बोलने वाले व्यक्ति की पहचान और उसमें किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। 🇮🇳🇮🇳🇮🇳 🪖 🪖 🪖
अगर विपक्ष का कोई नेता सरकार से सवाल पूछता है, तो उस पर तुरंत यह ठप्पा लगा दिया जाता है कि वह धर्म-विरोधी है, राम-विरोधी है। लेकिन जैसे ही कोई अपराधी या बलात्कारी भाजपा में शामिल हो जाता है, उसे संस्कारी बता दिया जाता है।
गंगा बचाने के लिए
जे डी अग्रवाल जी 111 दिन तक भूखे प्यासे अनशन पर बैठे रहे
सरकार शुध लेने के लिए नहीं गई
उन्होंने प्राण त्याग दिए
आपको लगता है
वो 15 दिन में सरकार आ जाएगी 😐😐
"समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध"
17 दिन से आमरण अनशन पर बैठे @Wangchuk66 के लिए "ना मोदी बोलेगा - ना गोदी बोलेगा" आप अपनी अंतरात्मा से पूछिए आप कब तक खामोश रहेंगे ?
क्या आप किसी अनहोनी का इंतजार कर रहे है ?
केन–बेतवा इंटरलिंकिंग परियोजना (Ken–Betwa Interlinking Project) के लाभ की ढोल पीटेंगे वाली सरकार काश इन आदिवासी समाज की भी सुन लेते तो बेहतर होता , आख़िर इनको उचित मुआवजा क्यों नहीं दिया जा रहा है ?
लोकतंत्र सभी के सवालों तकलीफ़ों का जबाब देना सरकार की महति ज़िम्मेदारी होती है ?
सरकार अपने ज़िम्मेदारी से क्यों भाग रही है ?
@PMOIndia@DrMohanYadav51
ऋषिकेश में विकास के नाम पर अंधाधुंध पेड़ कटाई बेहद चिंताजनक है। इस पेड़ कटाई का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे सभी लोग सराहना के पात्र हैं। पर्यावरण की रक्षा के लिए आवाज़ उठाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।