जिस आदित्य शर्मा की अमेरिकी हमले में मौत हो गई है उसके पिता राजेश शर्मा 'ग़ाजा' में बच्चों की मौत पर जश्न मना रहे थे ! अफसोस शर्मा जी को ये नहीं मालूम नहीं दुनिया में क्या हो रहा है उस पर रब की पैनी नज़र रहती है !
देशी मुर्गे का सालन सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि स्वाद और सेहत का एक बेहतरीन तालमेल है !
ब्रायलर (फार्म वाले) चिकन के मुकाबले लोग इसे इसके खास स्वाद और पारंपरिक तरीके से बनने की वजह से ज्यादा पसंद करते हैं !
देशी मुर्गे का मांस प्राकृतिक रूप से तैयार होता है, जिससे इसके रेशों में एक अलग तरह का सौंधापन और गहरा स्वाद होता है !
इसका सालन जब मसालों के साथ धीमी आंच पर पकता है, तो इसकी ग्रेवी में हड्डियों और मांस का असली अर्क पूरी तरह घुल जाता है, जो ब्रायलर चिकन में बिल्कुल नहीं मिलता !
अगर किसी बंदर के पास उसकी ज़रूरत से कहीं ज़्यादा केले हों और बाकी बंदर भूखे हों, तो वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करेंगे कि वह इतना असामान्य व्यवहार क्यों कर रहा है ! क्योंकि जानवरों की दुनिया में ज़रूरत से बहुत ज़्यादा जमा करना अक्सर स्वाभाविक नहीं माना जाता !
लेकिन इंसानी समाज में, जब कोई व्यक्ति ग़लत तरीक़े से लोगों का हक़ मारकर बेहिसाब दौलत, संसाधन या संपत्ति जमा कर लेता है, जबकि बहुत से लोग बुनियादी ज़रूरतों के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं, तो अक्सर उसे सफलता, होशियारी और कामयाबी की मिसाल के तौर पर पेश किया जाता है !
Forbes जैसी बिज़नेस मैगज़ीनों के कवर पर आना उसी प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
हम किन व्यवहारों की प्रशंसा करते हैं और किन्हें समस्या मानते हैं... समाज की नैतिकता को ये दर्शाता है !
ये राजेश शर्मा साहब है आज सोशल मीडिया पर वायरल है ये सोशल मीडिया पर दिन रात नफरत परोस रहे थे !
अब पता चल रहा है कि इनका बेटा आदित्य शर्मा इजरायल ईरान वार में मारा गया है क्या इतने बड़े नुकसान के बाद इनके किरदार में सुधार आयेगा !
हेलो @grok तू आवाम को हकीकत से रूबरू करवा क्या ये खबर सही है क्या शर्मा जी नफरत परोसते थे !
एक अरबपति दिवालिया हो गया !
उसके पास सिर्फ़ 20 डॉलर बचे थे और काम मिला एक खदान मज़दूर के रूप में !
उसने कोयले की खदान में काम शुरू किया !
पहले दिन उसने कोयले की एक छोटी पेटी निकाली और उसे 60 डॉलर में बेच दिया !
बचे हुए 20 डॉलर से खाना खरीदा और कमाए हुए 60 डॉलर बचाकर रख लिए !
अगले दिन उसने 60 डॉलर देकर 2 मज़दूर रख लिए !
उन मज़दूरों ने 4 पेटियाँ कोयले की निकालीं, जो 200 डॉलर में बिकीं !
मज़दूरों की मज़दूरी देने के बाद उसके पास 140 डॉलर बच गए !
फिर उसने 4 मज़दूर रखे !
उसके बाद 10, फिर 20, और फिर 100 मज़दूर !
वह अपनी कमाई का हर डॉलर ख़र्च करने के बजाय दोबारा काम में लगाता रहा !
कई सालों बाद वह कई कोयला खदानों का मालिक बन गया, जो उसे लाखों डॉलर की आमदनी देने लगीं !
अमीर लोग सिर्फ़ ज़्यादा मेहनत नहीं करते, बल्कि अपनी मेहनत और कमाई को बढ़ाने का हुनर भी सीख लेते हैं !
दौलत अक्सर तब तेज़ी से बढ़ती है जब आमदनी को फ़ौरन ख़र्च करने के बजाय ऐसी चीज़ों में लगाया जाए जो आगे और कमाई पैदा करें ! यही सरमाया बनाने और उसे बढ़ाने का रास्ता है !
बिग ब्रेकिंग न्यूज़ खुशखबरी 🥰
दिल की बात दोस्तों के साथ की पूरी टीम आप सभी सोशल मीडिया के एक्टिविस्ट साथियों का दिल की गहराइयों से शुक्रिया अदा करती है !
आप सबकी कोशिश से ग्राम सभा नटवा पोस्ट बासपार बैजौली जिला महराजगंज निवासी निजाम अहमद साहब अपने परिवार से मिल गए है !
सोशल मीडिया का यही पावर है अल्लाह रब्बुल इज्ज़त आप सबको खूब बुलंदी दें आमीन 🤲
किसान सिर्फ अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश का पेट भरने के लिए अनाज, फल और सब्जियां उगाता है ! इसीलिए उन्हें अन्नदाता कहा जाता है !
जय जवान, जय किसान यह नारा सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि हमारे समाज में किसानों के सर्वोच्च योगदान का सम्मान है ! उनके बिना हमारी थाली तक भोजन पहुँचना नामुमकिन है !
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हम अक्सर उन चीज़ों का बोझ भी अपने कंधों पर उठा लेते हैं, जिन्हें बदलना हमारे हाथ में नहीं होता !
चाहे वह बीता हुआ कल हो,आने वाले कल की फ़िक्र हो,या हालात का हमारे हक़ में ना होना हो !
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बिहार के राहुल कुमार साह का ख़्वाब था कि वह पुलिस अफ़सर बने !
लेकिन वह कोई परीक्षा पास नहीं करना चाहता था !
इसलिए उसने NCC जॉइन की, पुलिस की ड्रिल, यूनिफॉर्म और तौर-तरीके सीख लिए !
फिर उसने बिहार के पूर्णिया में एक सरकारी स्कूल की बिल्डिंग के अंदर नकली पुलिस थाना खोल लिया !
सिर्फ़ इतना ही नहीं...
• अपने दोस्तों को "कॉन्स्टेबल" की नौकरी दे दी
• चोरी और हादसों के मामलों को देखने लगा
• गश्त भी करवाने लगा
• गाँव वालों को सब कुछ असली लगा
फिर उसने एलान किया:
"मैं 500 लोगों को पुलिस की नौकरी दिलाऊँगा!"
लोगों ने "प्रोसेसिंग" और "ट्रेनिंग" के नाम पर ₹2,500 से ₹15,000 तक दे दिए !
कुछ ही महीनों में उसने ₹50 लाख से ज़्यादा जमा कर लिए !
फिर एक दिन उसने थाना बंद कर दिया और कहा:
"अब हम ट्रेनिंग के लिए जा रहे हैं!"
और ग़ायब हो गया !
कुछ दिन बाद असली पुलिस वहाँ पहुँची !
तब गाँव वालों को पता चला कि
• थाना नकली था
• पुलिस वाले नकली थे
• भर्ती मुहिम (अभियान) भी नकली थी
एक आदमी ने पूरा का पूरा पुलिस महकमा खड़ा कर दिया... और किसी को भनक तक नहीं लगी !
जब जांच-पड़ताल कमज़ोर हो, तो यूनिफॉर्म, ओहदा और आत्मविश्वास दिखाने वाले लोग आसानी से लोगों का भरोसा जीत लेते हैं !
मेरे साथ तस्वीर में जो शख्सियत खड़े है इनका नाम जनाब कमालुद्दीन सिद्दीकी है लोग इन्हें खजांची साहब के नाम से जानते है !
ये हमारे छोटका बबुआ है जो किसी परिचय के मोहताज़ नहीं है जब दिल्ली वापसी करता हूं तो इनसे मिलकर जरूर आता हूं जो दिल से दुआएं और नसीहत देते है आँखें भर आती है !
यही सोचता हूं कि पन्द्रह साल दोनों परिवारों ने छोटी सी गलतफहमी में बर्बाद कर दिया वो पन्द्रह साल वापस तो नहीं आ सकते लेकिन मौजूदा जो दौर है उनकी ख़िदमत करके दुनिया और आखिरत बेहतर बनाया जा सकता है !
बड़े-बुजुर्गों का सम्मान और उनकी सेवा केवल एक नैतिक कर्तव्य नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन में तरक्की और सुकून का सबसे बड़ा जरिया है !
बुजुर्गों के पास जिंदगी का लंबा तजुर्बा (अनुभव) होता है ! जब हम उनका एहतराम करते हैं, तो हमें उनकी दुआएं और सही रास्ता मिलता है ! इतिहास गवाह है कि जो लोग अपने माता-पिता और बड़ों की इज्जत करते हैं, समाज उन्हें हमेशा सम्मान की नजर से देखता है और वे जीवन में खूब तरक्की करते हैं !
हर धर्म और संस्कृति में बड़ों की सेवा को ईश्वर/अल्लाह की इबादत के बाद सबसे बड़ा दर्जा दिया गया है ! बुजुर्गों के दिल से निकली दुआ सीधे कुबूल होती है, जो इंसान के लिए आखिरत में कामयाबी और ऊंचे मुकाम का रास्ता साफ करती है !
घर के बुजुर्गों की मौजूदगी उस घने पेड़ की तरह होती है, जो खुद तो धूप सहता है लेकिन पूरे परिवार को ठंडी छांव देता है !
बड़ों का सम्मान करना दरअसल खुद अपनी किस्मत को संवारना है !
बड़े बुजुर्गों का एहतराम आपको दुनिया में बुलंदी दिलाता है और आखिरत में आपका दर्ज़ा बुलंद करता है !
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जब शेर किसी हिरण को खा जाता है, तो उसमें न अच्छा होता है न बुरा ! यह कुदरत का कानून है, और उसी से संतुलन बना रहता है !
ज़्यादातर लोगों की गलती यह है कि वे इंसाफ़ और अख़लाक़ (नैतिकता) जैसे ख़याल उन हालात पर लागू कर देते हैं जो असल में सिर्फ़ ताक़त और अपने फ़ायदे के हिसाब से चलते हैं ! इंसानी रिश्तों और समाज में, ताक़तवर अक्सर कमज़ोर पर हावी हो जाता है !
एक रणनीतिक सोच रखने वाला इंसान दुनिया की सख़्ती और बेरहमी की शिकायत में अपना वक़्त बर्बाद नहीं करता !
वह हालात को जैसा है वैसा समझकर उनके मुताबिक़ खुद को तैयार करता है ! इसलिए शिकारी मिज़ाज लोगों की शिकायत करने के बजाय उनके तौर-तरीके समझिए, अपनी काबिलियत और ताक़त बढ़ाइए, और इस दुनिया में हमेशा शिकार या मज़लूम की जगह पर रहने से इंकार कीजिए !
रात के साढ़े नौ बजे ट्रेन चारबाग स्टेशन पहुंचती है एक शुभचिंतक चारमीनार से बिरियानी लेकर सीट पर आते है और कहते है कि सर दो चिकन बिरयानी है और छह मटन बिरयानी है वाकई मेरा रब बड़ा रहीम और करीम है जो ऐसे हमदर्दों से नवाज़ता है !
लोहे को कोई नष्ट नहीं कर सकता, उसका खुद का जंग ही उसे खत्म करता है ठीक उसी तरह, मुश्किल वक्त हमें कमजोर करने नहीं, बल्कि हमारे आसपास के 'जंग' (नकली लोगों) को साफ करने और सच्चे हीरों (शुभचिंतकों) को पहचानने का मौका देता है !
मेरे शुभचिंतक मेरे हमदर्द रब आपको खूब बुलंदी दें आमीन 🤲