जंतर मंतर ही तो जाना चाह रही थी @neha_aisa और रोकने के लिए इतनी ताक़त !
आख़िर जंतर मंतर पर क्यों नहीं जुटने देना चाहती है सरकार प्रदर्शनकारियों को? जवाब आप सबको मालूम है
बच्चे पढ़ने के लिए स्कूल जाते हैं, अपनी जान जोखिम में डालने के लिए नहीं। @samrat4bjp
जिन बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की है, उनके लिए ऐसी इमारत को स्कूल के रूप में चलाने का फैसला आखिर कैसे हो सकता है? वो भी जुगाड़ करके ?
गरीब परिवारों के बच्चे हैं तो क्या उन्हें सुरक्षित स्कूल, मजबूत छत और सम्मानजनक माहौल में पढ़ने का अधिकार नहीं है?
उलटी गिनती शुरु हो गयी है 🥴
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आँध्र-प्रदेश के रायलसीमा में भाषण देने पहुँची..उनके मुँह खोलते ही जनता चिल्लाने लगी कि ‘पहले नौकरी दो’!
मंच पर बैठे CM चंद्रबाबू नायडू, पवन कल्याण और अनंत अंबानी हक्के-बक्के रह गए !
इतनी Hooting हुई कि वित्त मंत्री को भाषण बीच में ही ही रोकना पड़ा और चंद्रबाबू नायडू को उठकर जनता को शांत कराना पड़ा !
वक्त बदल रहा है 🔥🔥🔥
ये रितिका चोपड़ा हैं।इंडियन एक्सप्रेस की शानदार पत्रकार। जिन्होंने ज्ञानेश कुमार की पोल खोल दी।
रितिका चोपड़ा ने मीडिया नाम की मरती हुई संस्था को ज़िंदा कर दिया है।
इनके सम्मान में दो शब्द तो लिख दीजिए प्लीज़।
विपक्ष लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाता रहा है। SIR की पूरी प्रक्रिया पर भी विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है।
लेकिन चूंकि ये आरोप विपक्ष की तरफ से लगाए जाते रहे, इसलिए उन्हें राजनीतिक आरोप कहकर खारिज करना आसान था।
अब @IndianExpress की पत्रकार @RitikaChopra__ ने CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर ऐसे खुलासे किए हैं, जिनके बाद इन सवालों को सिर्फ राजनीति कहकर टालना मुश्किल होगा।
निष्पक्ष चुनाव हमारे लोकतंत्र की बुनियाद हैं और उस पर लोगों का विश्वास बनाए रखना चुनाव आयोग का कर्तव्य है। लेकिन जिस तरह के आरोप अब आयोग के भीतर की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आ रहे हैं, वे सिर्फ किसी एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरी संस्था की विश्वसनीयता से जुड़े सवाल खड़े करते हैं।
अमेरिका और कनाडा का टन के हिसाब से प्लास्टिक कचरा मुज़फ्फरनगर पहुँच रहा है!
जिस कचरे को विकसित देश अपने यहाँ संभाल नहीं पा रहे, उसका बोझ भारत क्यों उठाए?
ये विकास नहीं, पर्यावरण के साथ अन्याय है।
जो लोग कहते हैं 'पढ़-लिख जाओ तो आरक्षण/संवैधानिक सुरक्षा की क्या ज़रूरत?'वो देखें कि योग्यता और पद के बाद भी जातिवादी मानसिकता कैसे रास्ते में रोड़ा बनती है।
आरक्षण सिर्फ गरीबी मिटाने की योजना नहीं, बल्कि संस्थागत पूर्वाग्रहों से सुरक्षा का अधिकार है। मामले की निष्पक्ष जांच हो!