समाज के शत्रु आर्य समाजी
ने समाज का नाश कर दिया देख लो हरियाणावासियों आर्य समाजी कालवा गुरुकुल का आचार्य राजेन्दर, सत्यार्थ प्रकाश में लिखी 24 साल की लड़की का विवाह 48 साल के पुरुष से करने को सही ठहरा रहा है।
दयानंद सरस्वती ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में पवित्र हिन्दू धर्म के त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, शिव तथा उनके अवतारों का घोर अपमान किया। शिव जी को हिजड़ा, विष्णु उपासकों को चोरमंडली, श्रीकृष्ण को भगन्दर रोगी तक बता दिया।
महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पृष्ठ संख्या 142 पर लिखा है कि जब श्रद्धालु ने शिव पर जल चढ़ाने हेतु लोटा माँगा, तो दयानंद जी द्वारा कहा गया—‘अपने मुख में कुल्ला भर ले जाओ और उसके ऊपर डाल दो!’
सच्चा रक्षक कौन?
राखी बांधने से जीवन की हर विपत्ति और अकाल मृत्यु से रक्षा संभव नहीं है। वास्तव में सबका एकमात्र और सच्चा रक्षक पूर्ण परमात्मा (कविर्देव/कबीर साहेब) है, जो तीनों लोकों का भरण-पोषण करता है।
किसान मजदूर बचाओ अभियान ने किसानों को उबारा
संत रामपाल जी महाराज ने किसान मजदूर बचाओ अभियान के तहत गाँव-गाँव हजारों फीट लंबी पाइपलाइन और सैकड़ों मोटरें पहुंचाकर बाढ़ से हर साल बर्बाद होती किसानों की खेती को बचाने का अद्भुत कार्य किया है। जिससे देश का किसान समृद्ध होगा तो देश सोन
कूर्म पुराण, अध्याय 5 श्लोक 19-21 में लिखा है कि ब्रह्मा, वासुदेव (विष्णु) तथा शंकर की काल के द्वारा ही सर्जना होती है, पुनः वही काल इनका संहार भी करता है। यानी शिव जी नाशवान हुए तो अविनाशी परमात्मा की जानकारी जानने के लिए देखिए Sant Rampal Ji Maharaj YouTube Channel
ॐ शांति अर्थात ब्रह्माकुमारी पंथ को छोड़ संत रामपाल जी महाराज की शरण क्यों ग्रहण कर रहे लोग? जानने के लिए देखिए वीडियो 'Brahma Kumaris Panth Exposed', सिर्फ Factful Debates यूट्यूब चैनल पर।
यानी ये स्वयं जन्म-मृत्यु में हैं
तो हमें मोक्ष प्रदान नहीं कर सकते तो वह पूर्ण परमात्मा कौन है जिसकी भक्ति से मोक्ष मिलता है? जानने के लिए देखिए Sant Rampal Ji Maharaj YouTube Channel
आमला (बैतुल, म.प्र.):
पति के निधन के बाद 4 बच्चों के पालन-पोषण में जूझ रही सोनू चौकीकर को मिला अन्नपूर्णा मुहिम का सहारा परिवार को राशन और अन्य आवश्यक सामग्रियां पहुँचाई गयी।
जो परिवार भूखे सोने को
मजबूर थे, उनके पास बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। ऐसे कठिन समय में परम संत रामपाल जी महाराज जी की 'अन्नपूर्णा मुहिम' ने उनके जीवन में मदद और उम्मीद की नई किरण जगाई।
गुरू बिन काहू न पाया ज्ञाना, ज्यों थोथा भुस छड़े मूढ़ किसाना।
गुरू बिन वेद पढ़े जो प्राणी, समझे न सार रहे अज्ञानी।
कबीर, नौ मन सूत उलझिया, ऋषि रहे झख मार।
सतगुरू ऐसा सुलझा दे, उलझै ना दूजी बार।।