#GodMorningFariday@SaintRampalJiM
Kabir Is Supreme God
इस प्रकार अविनाशी का नाश करने में कोई सक्षम नहीं हैं। परमेश्वर कबीर साहेब जी पूर्ण ब्रह्म हैं, सर्व शक्तिमान परमात्मा हैं।
शेखतकी ने जुल्म गुजारे, बावन करी बदमाशी |
खूनी हाथी आगे डालै, बांध जूड अविनाशी
@ankurarya87
#अत्याचार_की_अति
Kabir Is Supreme God
इस प्रकार अविनाशी का नाश करने में कोई सक्षम नहीं हैं। परमेश्वर कबीर साहेब जी पूर्ण ब्रह्म हैं, सर्व शक्तिमान परमात्मा हैं।
शेखतकी ने जुल्म गुजारे, बावन करी बदमाशी |
खूनी हाथी आगे डालै, बांध जूड अविनाशी ||
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना
गरीब,सौ छल छिद्र मैं करूं,अपने जन के काज।
हिरणाकुश ज्यूं मार हूँ,नरसिंघ धरहूँ साज।।
संत गरीबदासजी ने बताया है कि परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि जो मेरी शरण में किसी जन्म में आया है,मुक्त नहीं हो पाया,मैं उसको मुक्त करने के लिए कुछ भी लीला कर देता हूँ।
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना
Kabir Sahib Comes to Meet His Pious Souls
It has been certified from Holy Rig Veda Mandal 9 Sukt 82 Mantra 2 that Kabir Sahib comes from His native place Satlok to meet His pious souls.
Sant Rampal Ji Maharaj
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना
☘In Kalyug, God Kabir himself appeared in the form of Vitthal and ate the bread of Namdev ji and took him to the temple due to his devotion and faith.
Sant Rampal Ji Maharaj
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना
Merciful Almighty kavirdev granted tamerlane (timur) kingdome of seven generations .
Roti Taimurlung ku dinhi , Taate saat badshshi dinhi
Sant Rampal Ji Maharaj
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना
Sant Rampal Ji Maharaj
क्या आप जानते हैं पूर्ण परमात्मा चारों युगों में आते हैं, अच्छी आत्माओं को मिलते हैं
सतयुग में सत्यसुकृत नाम से,त्रेता में मुनीन्द्र नाम से आये,द्वापर में करुणामय नाम से तथा कलयुग में अपने वास्तविक नाम कबीर नाम से प्रकट हुए।"
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना
Sant Rampal Ji Maharaj
त्रेतायुग में कबीर परमेश्वर "मुनीन्द्र ऋषि" के रूप में आए थे। उस समय नल-नील तथा हनुमान जी को अपना सत्य ज्ञान बताकर अपनी शरण में लिया और अपने आशीर्वाद मात्र से नल-नील के शारीरिक तथा मानसिक रोग को ठीक किया था।
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना सतयुग में विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरुड़ जी को उपदेश दिया, उनको सृष्टि रचना सुनाई और गरुड़ जी मुक्ति के अधिकारी हुए।🙏
Sant Rampal Ji Maharaj
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना
इतिहास गवाह है तैमूर लंग से लेकर औरंगजेब तक ने भारत में शासन किया फिर उनका राज टुकड़ो में बंट गया।
Sant Rampal Ji Maharaj
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना
श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में लिखा है कि उत्तम पुरुष ही तीनों लोकों में प्रवेश करके सबका धारण पोषण करता है।
वह उत्तम पुरुष कबीर साहेब जी हैं जिन्होंने द्रौपदी की साड़ी बढ़ायी थी।
Sant Rampal Ji Maharaj
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना
Sant Rampal Ji Maharaj
चारों युगों में अपनी प्यारी आत्माओं को पार करने आते हैं परमेश्वर कबीर जी
परमात्मा कबीर जी सतयुग में सत सुकृत नाम से प्रकट हुए थे।उस समय अपनी एक प्यारी आत्मा सहते जी को अपना शिष्य बनाया और अमृत ज्ञान समझाकर सतलोक का वासी बनाया
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना
कबीर परमेश्वर हर युग में अपनी पुण्य आत्माओं से मिलने आते हैं। जैसे कलयुग में उनकी मुलाकात 7 साल की उम्र में दादू साहेब जी से, 10 साल की उम्र में संत गरीबदास जी महाराज से, बेई नदी के तट पर गुरु नानक जी से, मीरा बाई आदि से हुई।
Sant Rampal Ji Maharaj
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना
जिस कविर्देव/कबीर साहेब/हक्का कबीर/कबीरन/खबीरा के प्रमाण शास्त्रों (वेद, गीता, क़ुरान, बाइबल, गुरुग्रंथ साहिब) में मिलते हैं वह कोई और नहीं बल्कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब ही हैं जो 600 वर्ष पहले काशी में आये थे।
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना
संत गरीबदास ने कबीर साहेब की समर्थता बताते हुए कहते हैं कि ब्रह्मा विष्णु शिव जी का पिता काल (ब्रह्म) और जौरा (मौत) तो कबीर साहेब के दरबार के नौकर हैं। कबीर जी के हुक्म बिना ये कुछ भी नहीं कर सकते।
Sant Rampal Ji Maharaj
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना
पूर्ण परमात्मा चारों युगों में आते हैं, अच्छी आत्माओं को मिलते हैं।
"सतयुग में सत्यसुकृत नाम से, त्रेता में मुनीन्द्र नाम से आये, द्वापर में करुणामय नाम से तथा कलयुग में अपने वास्तविक नाम कबीर नाम से प्रकट हुए।"
Sant Rampal Ji Maharaj
#परमात्माका_चारोंयुगों_मेंआना
कबीर जी चारों युगों मेंआते हैं।
चारों युग देखो संवादा।पंथउजागर कीन्हो नादा।।कहां निर्गुण कहां सर्गुण भाई।नाद बिना नहीं चलै पंथाई।।
उपरोक्त वाणी में परमात्मा कबीर जीअपने प्रिय शिष्य धर्मदास को समझाते हुए कहते हैं कि हे धर्मदास!
Sant Rampal Ji Maharaj