इन दोनों तस्वीरों को ध्यान से देखिए। इनमें एक संदेश छिपा है! आंदोलन की अगुवाई करने वाले, मंत्री के डाइनिंग रूम में ज्ञापन देते हुए मंत्री जी के साथ फोटो खिंचवा रहे हैं!
दूसरी तरफ मासूम बच्चों को पुलिस सड़कों पर दौड़ा दौड़ा कर मार रही है। बच्चे लहूलुहान हैं।
ज्ञापन देने के लिए आंदोलन और अनशन कौन करता है? यही करना था तो पहले ही कर लिए होते! यह तो बहुत आसान काम था। ऐसे भी नड्डा जी न शिक्षा मंत्री हैं और ना ही प्रधानमंत्री! उनको ज्ञापन देने का क्या मतलब ?
इसलिए मैं कहता हूं कि मासूम बच्चों के साथ धोखा हुआ है! #JantarMantar
यह जंतर-मंतर का वीडियो है। आज दिल्ली की उमस भरी गर्मी जान ले रही है। उस हाल में वहाँ लोग ठसा-ठस भरे हैं। हाथ का पंखा लेकर नौजवान एक दूसरे को हवा का मरहम लगा रहे हैं। घर में पंखे के नीचे राहत नहीं है, वहाँ तो क्या ही हालत होगी। इस गर्मी में वहां मौजूद लोगों की हालत भी ख़राब हो रही होगी। सोनम वांगचुक को जबरन हटाने के बाद भी धरना कमज़ोर नही हुआ है। लोगों ने आगे आकर इस धरने को थाम लिया है। कौन नेता है, कैसा नेता है, यह सब सवाल पीछे चला गया है। आज पूरे दिन जंतर-मंतर पर भारी भीड़ रही। धरना स्थल तक जाने के लिए लोग कतार में बिना शिकायत खड़े हैं। वहाँ से लौटने वाले लोगों की लाइन राजीव चौक मेट्रो में भी बढ़ती जा रही है। सोमवार को सरकार का इम्तहान है। कल वह मार्च में बाधा डालेगी या मार्च होने देगी।
आप नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग़ाज़ियाबाद इन महानगरों, महाज़िलों में रहने वाले जेन ज़ी, जेन बी जेन एक्स, जेन जो भी, किसी से पूछ लीजिए। क्या यहाँ एक भी सरकारी शैक्षणिक संस्थान है, जिसकी दुनिया छोड़िए, भारत में पहचान हो। जिसकी गुणवत्ता की तारीफ होती हो। जिसमें पढ़ने का सपना देखा जाता हो। एक भी नहीं है। सोचिए लाखों करोड़ों की आबादी के बीच एक ढंग का कॉलेज नहीं है। जहाँ भारत का एस्पिरेशनल क्लास रहता है। वह 12 साल से व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी में डूबा रह गया। बच्चों के लिए अमेरिका का वीज़ा बनवाता रहा लेकिन मुड़ कर नहीं देखा कि उसके शहर में एक भी कॉलेज काम का क्यों नहीं है। इसके कारण मिडिल क्लास के साथ साथ नियो मिडिल क्लास के बच्चे भी घिस रहे हैं, पिस रहे हैं, मिट रहे हैं। जो मेहनत मज़दूरी करने वाला तबका है, जिसे लग रहा है कि पढ़ाई से उसके परिवार का भविष्य बदल सकता है, वह कड़ी मेहनत कर अपने बच्चों को किसी तरह स्कूल और कालेज भेज रहा है। उसे पता ही नहीं है कि वह अपने बच्चों को जिन सपनों के लिए तैयार कर रहा है, वह कब का रौंदा जा चुका है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, ग़ाज़ियाबाद और गुरुग्राम के घरों में काम करने वाली महिलाओं से पूछ लीजिए। हाड़ तोड़ मेहनत कर रही हैं और अपने बेटी की पढ़ाई के लिए फीस भर रही हैं। उनके बच्चे भी ख़ूब मेहनत करते हैं लेकिन सामाजिक पूंजी नहीं होने के कारण उन्हें गाइड नहीं मिल पाता। हर दिन लाखों सपनों की हत्या हो रही है। समाज के इस तबके को अभी शिक्षा से जुड़े मुद्दे की समझ नहीं है, कभी तो उन्हें भी पता चलेगा कि सारा सिस्टम इसी तरह डिज़ाइन किया गया है कि उनके बाद उनकी बेटियाँ भी घरों में काम करती रहेंगी । शिक्षा को बर्बाद किया गया ताकि लाखों लोगों का भविष्य बर्बाद हो सके और वे कम से कम पैसे में काम करने के लिए हमेशा मजबूर रहें।
भारत के भविष्य के साथ लंबे समय तक यह धोखा हुआ है। हो सकता है भारत का युवा धर्म की राजनीति में फिर से सनक जाएगा, वह गौरव और पहचान राजनीति में धर्म से पाने लगेगा, यह सब हो सकता है, हो ही रहा है, लेकिन अगले तीस साल में भी वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए बड़े स्तर के शैक्षणिक संस्थानों को नहीं पा सकता है। यह लड़ाई आज की नहीं है, अगले पचास साल की है।
कपिल सिबल जी: "जो कुछ हो रहा है, उससे मैं बहुत चिंतित हूँ।
मुझे याद है जब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान क्या हुआ था।
उन्होंने सरकार की कार्रवाई की खुलेआम आलोचना करते हुए कहा था, 'काश मैं मुख्यमंत्री न होता। मैं वहाँ जाकर पूछता, 'आप ऐसा कैसे कर सकते हैं और लोगों को रात में हिरासत में कैसे ले सकते हैं?'"
लेकिन मैं प्रधानमंत्री से पूछता हूँ: आपने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की कोशिश तक क्यों नहीं की?"
सोनम वांगचुक की पत्नी बोलीं- "मुझे तो नहीं लगता कि सोनम की तबीयत कुछ खराब है... वो (सोमवार की) यात्रा के लिए तैयार होंगे। वो यात्रा में शामिल नहीं भी हुए तो मैं उनको रिप्रजेंट करते हुए उस यात्रा को लीड करूंगी..."
मेन स्ट्रीम मीडिया जिसे जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट करने वाले गोदी मीडिया बोलते हैं, आज जंतर मंतर पर गई तो है, लेकिन प्रोटेस्ट साइट पर जाने से घबरा रही है।
मेन स्ट्रीम मीडिया को लेकर वहां बहुत गुस्सा दिखाई दे रहा है। #JantarMantar
"ये प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ है और तब-तक नहीं होगा, जब-तक..."
◆ सोनम वांगचुक के साथ 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठीं AISA की अध्यक्षा नेहा ने कहा
◆ 20 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को अस्पताल ले गई पुलिस
SonamWangchuk | Sonam Wangchuk | दिल्ली पुलिस | Delhi Police | #Neha | #AISA
Peak Dictatorship Happening At Safdarjung Hospital By Govt
Sonam sir’s wife is not allowed to take her phone inside hospital room. His medical reports are not shared with the family. No personal lawyers or doctors are allowed to meet
धर्मेन्द्र प्रधान को पद से हटाने के बजाए
मोदी सरकार के कहने पर,
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को जबरन हटा दिया !
डरपोक
कायर
बुजदिल
निकम्मी
नाकारा
संवेदनशून्य सरकार !
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
और इस तरीके से चादर से Cover करके ताकि कोई वीडियो ना बना सके उठा कर ले जाना उस शख़्स को जो देश के तमाम बच्चो के भविष्य के लिए अनशन पर है कहा तक उचित है ?
क्या सही तरीका ये नहीं कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा करवा देते , या आप सरकार के किसी मंत्री के द्वारा बातचीत करके उनका अनशन तुड़वाने की कोशिश करते लेकिन जबरदस्ती इस तरीके से अनशन तुड़वाना ये अनशन और देश का अपमान है
लोकतंत्र की हत्या है ! ......
दमन हर चीज का हुआ है ! तो दमन सत्ता के गलियारों में घर कर गया उस घमंड का भी होगा जिसके सामने आम नागरिकों की आवाज नहीं सुनाई दे रही !......
महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी जी ने वीडियो संदेश के माध्यम से सोनम वांगचुक जी के संघर्ष का समर्थन किया। उनके शब्दों में, इस अनशन ने लंबे समय बाद समाज की चेतना को जगाया है।
▶️ https://t.co/26wRSXOtUr
#SonamWangchuk#SansadChalo@Cockroachisback@Wangchuk66
आजकल मोबाईल फोन और माईक लेकर कोई भी व्यक्ति खुद को पत्रकार बता सकता है! ..विधायिका को स्वतंत्र पत्रकारिता करने वालों के लिए भी कुछ रेगुलेटरी सिस्टमबनाने पर विचार करना चाहिए। - दिल्ली हाईकोर्ट।
बात तो सही है!
सिर्फ़ सोनम वांगचुक ही नहीं, अमित भटनागर भी न्याय और जवाबदेही की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं।
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध की इस आवाज़ को अनसुना नहीं किया जा सकता। आइए, उनकी मांगों और इस आंदोलन की सच्चाई पर बात करें।