पुलिस वाले दादागिरी देखिए
पुलिसकर्मी ने बीमार युवक को जड़े ताबड़तोड़ थप्पड़ जड़ दिया क्या पुलिस वाले को ऐसा करना चाहिए
ललितपुर में मेडिकल कॉलेज इलाज कराने गए एक युवक के साथ पुलिसकर्मी द्वारा कथित तौर पर मारपीट का वीडियो सामने आया है
इसको इतना हाइलाइट करो की ये सस्पेंड हो जाए
"बंद किये गए 26 हज़ार प्राइमरी स्कूल पुन: शुरु किए जाएंगे"
◆ प्रेस कांफ्रेंस में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने किया ऐलान
@yadavakhilesh | #SamajwadiParty | Primary School
🚨 अहमदाबाद मंडल रेलवे की बड़ी कार्रवाई
🔹 स्वर्ण जयंती राजधानी के बेस किचन में RFVF की औचक छापेमारी
🔹 यात्रियों को परोसी जाने वाली बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री बरामद
🔹 369 पैकेट एक्सपायर्ड Haldiram Poha
🔹 984 पैकेट एक्सपायर्ड Haldiram Upma
🔹 24 पैकेट एक्सपायर्ड Haldiram Chhole Masala
🔹 6 पैकेट एक्सपायर्ड Fortune Sooji
🔹 खाद्य सेवा प्रदाता पर ₹10 लाख का जुर्माना
🔹 रेलवे की जीरो टॉलरेंस नीति, भोजन की गुणवत्ता और हाइजीन से समझौता नहीं
#Railways #IndianRailways #FoodSafety
@ZeeBusiness@drmadiwr
आरक्षण गरीबी हटाने की योजना नहीं है, बल्कि उस सामाजिक भेदभाव का जवाब है जो पीढ़ियों से लोगों के अवसर छीनता रहा है।
अगर आर्थिक स्थिति सुधर जाने से जाति खत्म हो जाती, तो शायद आरक्षण की बहस भी खत्म हो जाती।
सवाल है क्या आज भी समाज किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर देखना बंद कर चुका है?
आरक्षण पर राय देने से पहले उसके उद्देश्य को समझना जरूरी है।
#Reservation #CasteDiscrimination #SocialJustice #India
ब्रो का नाम संदीप रघुवंशी है ।
ब्रो UPSC 2023 क्रैक करके IAS बन गया है ।
ब्रो गुना स्कूल से लेकर IIT - IIM की पढ़ाई किया है ।
ब्रो IAS ऑफिसर बनने से पहले 5000 रुपये में एथिक्स कोर्स बेच थे ।
ब्रो UPSC का EWS के तहत फार्म भरा था ।
ब्रो के माता - पिता सरकारी मास्टर है ।
ब्रो के पिता जी डेयरी भी चलाते है ।
ब्रो की पत्नी NUTANIX नामक कंपनी में मैनेजर है ।
ब्रो की शादी 2021 में हो गए थी , जिसका सैलरी 55 लाख के आस - पास है ।
ब्रो बस इतने से गरीब है ।
ट्रेन में दारू पीट पकड़े गए पैसेंजर..सामने वाले पैसेंजर ने दर्ज कराई शिकायत..पुलिस बोली में लिखित में शिकायत करो...
शिकायत करने वाले व्यक्ति ने बोला मेरी सीट चेंज करा दो हम असहज हैं..हम परिवार के साथ हैं..!
रेलवे एक्ट की धारा 145 साफ मना करती है, फिर भी ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं।
RPF-GRP कहाँ हैं? यात्रियों की सुरक्षा का क्या?
@RailMinIndia@AshwiniVaishnaw@PMOIndia
देखिए ये हाल। कब तक कागजी नियम चलेंगे?
“मेरे पास पाँच मास्टर्स की डिग्रियाँ हैं। फ्रेंच फ़िलॉसफ़ी में मैंने फ़्रांस से मास्टर्स किया है, लेकिन मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि अगर मंडल कमीशन नहीं होता, तो मैं JNU में प्रोफ़ेसर नहीं होता। मेरिट के नाम पर हमारे अस्तित्व को ही अपराध बना दिया गया है।”
~ डॉ. Sharad Baviskar
अपने संघर्षों की कहानी "भूरा" में डॉ. @baviskar_sharad लिखते है:
“सामाजिक व्यवस्था सभी को समान संसाधन और समान अवसर उपलब्ध नहीं कराती; लेकिन यदि थोपी गई पहचानों से बाहर निकलना है, तो संघर्ष ही एकमात्र रास्ता है।”
मैं अपने पिता रामविलास जी की कसम खाकर कहता हूं कि— जबतक मैं जिंदा हूं तबतक न संविधान पर कोई खतरा है और न ही आरक्षण पर कोई खतरा होगा।
जबतक मोदी जी प्रधानमंत्री वो ऐसा कभी नहीं होने देंगे।
~ रामविलास पासवान, केंद्रीय मंत्री 🔥🔥🔥
आरक्षण से ‘मेरिट’ खतरे में बताने वालों, इधर भी थोड़ा ज्ञान दीजिए!
यूपी में मंत्री-विधायकों के रिश्तेदारों को नौकरियाँ बाँटने का मामला सामने आया था। भास्कर की पड़ताल के मुताबिक इनमें 55% ठाकुर बताए गए थे। यहां तक कि जांच करने आए अफसर के भतीजे को भी नौकरी मिलने की बात सामने आई थी।
आरक्षण से नौकरी पाने वाला दलित-पिछड़ा आपको तुरंत दिख जाता है, उसकी योग्यता पर सवाल भी उठ जाता है। लेकिन सत्ता, रसूख और रिश्तेदारी के सहारे नौकरी मिले तो ‘मेरिट’ के सारे ठेकेदार अचानक मौन क्यों हो जाते हैं?
सवाल आरक्षण का नहीं, अवसरों पर कब्ज़े और मेरिट के इस दोहरे पैमाने का है।
अब पता चला बिहार क्यों इतना पिछड़ा रह गया, सोचिए डॉलफिन जैसे दुर्लभ जीव प्राणी को चंद पैसे के लिए मार दिया क्यूँकि डॉलफिन से तेल निकालेगा… और बेशर्मी से कबूल भी कर रहा है ..! सहरसा पुलिस और वहाँ के अधिकारी इस व्यक्ति को पकड़ के जल्द जेल भेजे ..@SaharsaDm@SaharsaPolice#Dolphin #ganga #Bihar #sahrsa
वर्चस्व की ‘मेरिट’ देखिए - खुद ज़ीरो पर, सवाल OBC-SC-ST पर!
ये आँकड़े NEET-PG 2023 की काउंसलिंग और दाखिलों से जुड़े हैं, जिनका विश्लेषण Times of India ने 7 फ़रवरी 2026 को NMC की उपलब्ध admission list के आधार पर प्रकाशित किया।
NEET-PG 2023 में शुरुआती qualifying cut-off General/EWS के लिए 291/800 और OBC/SC/ST के लिए 257/800 था। सितंबर 2023 में खाली सीटें भरने के लिए qualifying percentile सभी वर्गों के लिए Zero कर दिया गया।
इसके बाद हुए दाखिलों के आँकड़े देखिए - न्यूनतम स्कोर General: 0, OBC: 5, SC: 10 और ST: 33 रहा। इतना ही नहीं, शुरुआती cut-off से नीचे स्कोर पर दाखिला पाने वालों में 56% से अधिक General category के उम्मीदवार थे।
फिर भी आरक्षण की बात आते ही दलित-पिछड़े-आदिवासियों को ‘कम मेरिट वाला’ बताने का ज्ञान बाँटा जाता है!
यही बताता है कि ‘मेरिट’ का यह शोर अक्सर योग्यता की चिंता नहीं, बल्कि सामाजिक वर्चस्व को सही ठहराने का हथियार बन जाता है।
केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षित पदों का हाल पता है? OBC के 80% और ST के 83% प्रोफेसर पद खाली हैं!
एसोसिएट प्रोफेसर के पदों में भी OBC के करीब 69%, ST के 65% और SC के 51% पद खाली हैं।
आरक्षण कागज़ पर दे दो, पद मत भरो और भर्ती निकले तो आरक्षित उम्मीदवारों को NFS यानी ‘Not Found Suitable’ बताकर पद खाली छोड़ दो - फिर दलित-पिछड़े-आदिवासियों की हिस्सेदारी आएगी कैसे?
विश्वविद्यालयों में बैठा जातिवादी तंत्र आखिर किसकी ‘मेरिट’ बचा रहा है?
अब दलित-पिछड़े-आदिवासी तय करें - अपने आरक्षण, प्रतिनिधित्व और हक़ की रक्षा के लिए भाजपा को वोट से चोट करनी है।
#SaveReservation_SaveConstitution
1980 में वियतनाम को फेल स्टेट घोषित कर दिया गया था.
1978 में चीन भारत से पीछे था.
1975 तक जापान, दक्षिण कोरिया और मलेशिया मच्छरों से फैलने वाली बीमारी को खत्म करने के लिए अपने दलदली इलाकों को साफ कर रहे थे.
1985 तक जापान, कोरिया, चीन, मलेशिया और सिंगापुर ने अपने नागरिकों के स्वास्थ्य पर ज्यादा निवेश किया.
टीकाकरण किया, अस्पतालों की संख्या बढ़ाई. शिक्षा के क्षेत्र में भारी निवेश किया. इन देशों ने स्वास्थ्य नागरिकों ने अपने अपने मुल्क के विकास में भारी योगदान दिया है.
भारत ने नेताओं ने नागरिकों में भारी निवेश नही किया. मच्छरों की बीमारी से बचाने के लिए कुछ नही किया. टीकाकरण किया, लेकिन अस्पतालों में सुविधाएं नही बढ़ाई, अस्पताल नही बनाए.
शिक्षा पर बेहद कम निवेश किया. नतीजा ग्रामीण इलाकों के स्कूल खस्ताहाल हैं.
जो मुल्क अपने नागरिकों और अपने मजदूरों को खिचड़ी खिलाकर 15 घंटे की मेहनत कराएगा वो मुल्क कभी आगे नही बढ़ सकता. इन सब मुद्दों पर चर्चा ना होकर फालतू चीजों पर बहस होती है.
आरक्षण किसी के कहने से समाप्त होने वाली चीज नहीं है। आरक्षण किसी को मिल रही खैरात भी नहीं है। आरक्षण संवैधानिक अधिकार है, जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं जब उनके साथ बैठकर संवाद किया जाएगा उन्हें भी समझ आएगा : @iChiragPaswan
भाजपा की गोद में मलाई काटने बैठे पिछड़े और दलित नेता जो आरक्षण पर चुप हैं,
उनसे लाख गुना बेहतर हैं चिराग पासवान जो कम से कम अपने समाज के लिए मुखर तो हैं।🔥
अब उत्तर प्रदेश में ही देख लो,
भारतीय जनता पार्टी में CM योगी आदित्यनाथ वाली कैबिनेट में 25 OBC और 11 दलित चेहरे शामिल हैं जो वर्तमान में अपने पद पर हैं, लेकिन
इनकी इतनी हिम्मत नहीं है कि ये अपने समाज की आवाज को उठा सकें या आरक्षण पर बोल सकें।
आखिर क्यों देते हो इन्हें वोट?
चुनाव में इन लोगों ने अपने समाज का वोट लिया लेकिन जब आरक्षण पर संकट आया तो इनकी जुबान नहीं खुली। वहीं दूसरी तरफ
चिराग पासवान हैं जो केंद्रीय मंत्री हैं
और कल उन्होंने बेबाकी से आरक्षण पर बात रखी तो नेता ऐसा होना चाहिए जो अपने समाज के लिए लड़ सके।
कल जिस स्कूल से CJP वालों को भगाया गया था
आज वहां BBC के पत्रकार पहुंच गए है
BBC ने पूरी दुनिया में देश के सरकारी स्कूल की पोल खोल कर दी है
युवाओं को ताकत को सरकार बहुत कम करके अंक रही है