वीडियो में जो व्यक्ति दिख रहा है ये हरिद्वार में राजस्थानियों को मोक्ष दिलाने वाले ठेकेदार गोपाल तुम्बडीवाल के भाडे के आदमी हैं,
हरिद्वार में इनका ऐसा खोफ है वहां कोई भी 6-7 हजार से कम में अस्थि विसर्जन नहीं कर सकता,
इनको कोई मतलब नहीं किसी का बाप मरा हो, किसी का पति चाहे किसी का जवान बेटा, रोज 10 से 12 लख रुपए का कलेक्शन है, इनका, कई तरह के व्यापार हैं इनके,
वीडियो में जो महिला है वो जमवारामगढ़ जयपुर की है,
कुछ दिन पहले इनके पति की मृत्यु हुई थी अभी इनके जवान बेटे की मृत्यु हुई है,
वो इनके सामने जवान बेटे की अस्तियां हाथ में ले गिड़गिड़ा रही थी..... कि कुछ पैसे कम कर दो,
पर क्या मजाल ये किसी की तकलीफ समझे,
हरिद्वार का पूरा शासन प्रशासन इनके कंट्रोल में है,
करोड़ों रुपए की आमदनी जो है रोज की,
जवान बेटे की मौत के बाद एक बूढी मां को अस्थि विसर्जन मैं पैसे कम होने पर हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाना पड़े इससे बड़ी पीड़ा कोई हो नहीं सकती.....
बलिया
➡थाने में थर्ड डिग्री से दलित की मौत का आरोप
➡शव लेकर लौट रहे भाई का पुलिस पर आरोप
➡जबरदस्ती अंतिम संस्कार के दबाव का आरोप
➡पुलिसकर्मियों पर लगाया हत्या का आरोप
➡पुलिसकर्मियों हत्या का केस दर्ज हो- भाई
➡रेवती थाना पुलिस पर थर्ड डिग्री देने का आरोप
#Ballia #UttarPradesh #Police @balliapolice@dmballia@Uppolice
जब सवर्ण प्रोटेस्ट करता है तो प्रशासन दांत निपोरते हुए उनके साथ हाहाहा करते हैं, पर जब दलित न्याय मांगता है तो यही पुलिसवाले उन्हें गाली देते हैं, थप्पड़ मारते हैं।
जाति और सत्ता का फर्क है बाबू। वर्ना अविनाश पांडेय की क्या औकात कि वह दलितों को बहन की गाली दे देता।
मैं इसीलिए कहता हूँ कि दलित समुदाय के लोग अपने घर में आग लगाकर पड़ोसी के महल में बैठकर खुश होने वाली सोच का दंश झेल रहे हैं। अगर समाज ने आज बसपा को कमजोर न किया होता, तो क्या एक IPS अफसर की इतनी औकात होती कि वह "पूरी रोड गंदी कर दी सालों ने, इनके पिता जी की रोड नहीं है" जैसी गालियां देता? क्या वह आंदोलन में खड़े युवाओं को थप्पड़ मारता और बंदी वाहन में घुसकर समाज के युवाओं पर अपना जातीय रौब दिखाता? चूंकि वह मुख्यमंत्री योगी और गृहमंत्री अमित शाह का खास अफसर है, जाति से ब्राह्मण है, इसलिए सरकार उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
दलितों को हिंदू कहकर हिंदू एकता का नारा देने वाले लोगों का दोहरा चरित्र देखिए। आज वे खुलकर गालीबाज SSP अविनाश पांडेय के समर्थन में हैशटैग चला रहे हैं। इससे साफ सिद्ध होता है कि सवर्णों की हिंदू एकता का मतलब सिर्फ सवर्ण हितों को सुनिश्चित करना है। वरना जो द्विज हिंदू कल तक बिहार के कुख्यात अपराधी भरत तिवारी के लिए विलाप कर रहे थे, आज वे अविनाश पांडेय की गालीबाजी और गुंडागर्दी का समर्थन क्यों कर रहे हैं? सवर्ण प्रभुत्व ही इनकी हिंदू एकता का सार है; भाजपा सरकार और उसके अफसर इसी हित को बचाने के लिए काम कर रहे हैं।
प्रदेश के मेरठ जिले से आई बड़ी खबर
दलित समाज की लड़की ललिता गौतम के हत्याकांड में दलित समाज के लोगों ने पुलिस प्रशासन न्याय मांगा!!
लेकिन पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने ललिता गौतम के परिवार की महिलाओं पर किया लाठीचार्ज !!
देखो मेरठ पुलिस का गुंडाराज
@Uppolice@BhimArmyChief
बहस अच्छी चीज है होनी चाहिए लेकिन तमीज के लोगों के साथ होनी चाहिए और अजीत भारती जैसे गालीबाज के साथ तो बिल्कुल नहीं होनी चाहिए...
फिर भी बहस हुई और जिसका डर था वही हुआ अजीत भारती के कुतर्क वायरल हो रहे हैं उनपर बात बाद में करेंगे फिलहाल इस बहस में राजकुमार भाटी साहब को सुनिए और यही वायरल होने लायक है...
गलती लोगों की है।
ये road मेरठ के SSP अविनाश पांडेय जी के बाप की है।
क्यों आये उस रोड पे protestors।
पाण्डेय जी है, दलित लड़की के मर्डर के प्रोटेस्ट को ऐसे बर्दाश्त नहीं करेंगे अपने बाप की रोड पे।
अगर कोई जर्नलिस्ट है तो यह मत सोचो कि वो अच्छा रिसर्चर भी है। वह गधा भी हो सकता है।
इस भाई ने तो चाइनीज को तगड़ा रेल दिया।
चाइनीज को लगातार रेला जा रहा है।
हिंदुओं में बहुविवाह चलन में था. 1955 में कानून बनाकर इसे खत्म कर दिया गया. हिंदू मर्दों ने मान लिया. आज बात हो रही है कि मुसलमान महिलाओं को 4 निकाह की बीमारी व डर से मुक्त किया जाए. क्या मुसलमान मर्द इसके लिए तैयार होंगे? न मानें तो भी यूसीसी तो आएगा ही.
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